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खोल खंड के 40 गांव डार्क जोन में, जनस्वास्थ्य विभाग ने की अपील-जल की बर्बादी रोकें

Sun, 13 Mar 2022 11:29 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 13 Mar 2022 11:29 PM IST
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40 villages of Khol Khand in dark zone, Public Health Department appeals - stop wastage of water
शहर के अग्रसेन चौक के पास मंदिर में सबम‌र्सिबल लगवाने के बाद सड़क पर छोड़ा गया पानी। - फोटो : Rewari
रेवाड़ी। जनस्वास्थ्य विभाग का नारा, जल है तो कल है, अब इसे साकार करने का वक्त आ गया है। जिले के खंड खोल के 40 गांवों में इन दिनों अटल भूजल योजना के तहत काम चल रहा है। सरकार की एक अधिकृत एजेंसी भूजल पुनर्भरण को लेकर जिला रेवाड़ी और फरीदाबाद में एक साथ काम कर रही है। ऐसे में पानी की परेशानी झेल रहे जिलावासियों को जल संरक्षण के लिए अभी से सचेत होना होगा। इसलिए संबंधित विभाग की ओर से होली पर अधिक पानी न बर्बाद करने की सलाह दी जा रही है। यहां पर पहले से ही पीने के पानी की किल्लत है। इसलिए समय-समय पर इसकी राशनिंग की जा रही है। होली पर अधिक पानी की बर्बादी होगी तो फिर यहां पर पीने के पानी की किल्लत शहर की ढाई लाख आबादी को झेलना पड़ेगा।
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जिले का खंड खोल इस वक्त डार्क जोन में है, जिसमें भू-जलस्तर कई फीट नीचे है। दूसरे जिलों से आए नहरी पानी को जनस्वास्थ्य विभाग अपने संसाधन इस्तेमाल करके पीने योग्य बनाकर आपूर्ति करता है। पहाड़ी क्षेत्र होने की वजह से दर्जनों गांव आज भी पेयजल की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में भूजल संरक्षण के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, पंचायत विभाग, जनस्वास्थ्य विभाग, सिंचाई विभाग सभी अपनी ओर प्रयासरत हैं। किसान भी अपनी फसलों की सिंचाई के लिए कम पानी इस्तेमाल हो, इसके लिए टपका सिंचाई और माइक्रो सिंचाई प्रणाली इस्तेमाल कर रहे हैं।
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खोल खंड के कुल 47 गांव और 42 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इनमें से 40 गांवों में हरियाणा सरकार की ओर से अधिकृत एजेंसी अटल भूजल योजना के तहत भूमि जल की स्थिति और जल संरक्षण को लेकर सर्वेक्षण कार्य कर रही है। एजेंसी मुख्य रूप से छतों पर बारिश के पानी को जमीन के नीचे डालने, तालाबों की सफाई, जल संरक्षण पर जागरूकता गतिविधियों का आयोजन तथा 85 फीसदी से अधिक भूजल जो फसल सिंचाई के लिए किसान इस्तेमाल कर रहे हैं, इनको माइक्रो सिंचाई प्रणाली, टपका विधि अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।
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सबसे अधिक प्रभावित गांव
- कुंडल, बवाना गुर्जर, टींट और हरजीपुर
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इन गांवों में चल रहा जल संरक्षण कार्य
- भांडोर, चिता डूंगरा, धामलावास, ढाणी शोभा, ढाणी सांतो, ढाणी सुंदरोज, चिमनावास, खोल, गोठडा टप्पा खोरी, गोलियाकी कुंड, मायण, खालेटा, नांधा, बलवाड़ी, बास दूधा, मामडिया आसमपुर, मामडिया ठेठर, कढू, भवानीपुर, गोठड़ा, जैनाबाद, नीमोठ, चौकी नंबर 2, नांगल, मूंदी, सुंदरोज, शहबाजपुर इस्तमुरार, राजपुरा इस्तमुरार, राजियाका, पुंसिका, पीथड़ावास, पाली, पाडला, नांगल जमालपुर, मामडिया अहीर, कोलाना, गुमीना, गोपालपुर प्राणपुरा, गोलियाकी।
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285 मीटर तक गिर चुका है भू-जलस्तर
खंड खोल में 2015 में 53.36 मीटर पर भू-जलस्तर पहुंच चुका था। इसमें प्रतिवर्ष 38.18 मीटर या इससे अधिक गिरावट आ रही है। अब इस खंड के गांवों में भू-जलस्तर 285 मीटर तक जा चुका है। हरियाणा सरकार और जनस्वास्थ्य विभाग के अलावा अब आम लोगों को भी इसके लिए चिंतित होने की जरूरत है।
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शहर में 20 एमएलडी पेयजल होती है आपूर्ति
सिंचाई विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए नहरी पानी को जनस्वास्थ्य विभाग अपने संसाधनों से पीने योग्य बनाकर प्रतिदिन 20 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) पेयजल लोगों तक पहुंचाता है।
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होली खेलने में अधिक होता है पेयजल का इस्तेमाल
अधिकतर घरों में होली खेलने के लिए जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से आपूर्ति किया जाने वाला पेयजल ही इस्तेमाल करते हैं। औसतन एक व्यक्ति होली के दिन होली खेलने के बाद 15 से 20 लीटर पानी इस्तेमाल करता है, जिसे वह रंग छुड़ाने या रंग-गुलाल से होली खेलने के बाद नहाने या होली खेलते वक्त इस्तेमाल करता है। पानी की इस बर्बादी को रोकने के लिए लोगों को जागरूक होना होगा।
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जल की बर्बादी को रोककर समाज और देश की करें सेवा
होली पर्व पर जल संरक्षण जरूरी है, यह बात केवल इसी पर्व पर नहीं, हर दिन के लिए जरूरी है। जल अमूल्य है और इसे बचाने के लिए समाज के हर व्यक्ति को अपनी नैतिक जिम्मेदारी का निर्वाह करना होगा। पक्के रंगों से होली खेलकर नहाते वक्त अधिक इस्तेमाल होता है। शरीर को पक्के रंग नुकसान भी पहुंचाते हैं। हमारा विभाग लोगों को होली खेलने से तो नहीं रोकता, मगर हम होली पर्व पर लोगों से जल बचाने के लिए जागरूकता जरूर फैलाएंगे। लोगों से अपील करता हूं कि वे जल बचाने की मुहिम को अपने जीवन में अपनाएं और जल की बर्बादी को रोककर समाज और देश की सेवा करें।

-विनय प्रकाश चौहान, अधिशाषी अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग।
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जल संरक्षण की अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी
सरकार की ओर से हमारी एजेंसी अटल भूजल योजना के लिए काम कर रही है। जिला रेवाड़ी पूरा पेयजल संकट से ग्रस्त है। खोल खंड के करीब 40 गांवों में एजेंसी अपना काम कर रही है। लोगों को जल संरक्षण की अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
- अमित, भूजल वैज्ञानिक सर्वे एजेंसी।
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