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200 बेड तो दूर 100 के लिए पर्याप्त चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ नहीं

Sun, 04 Jul 2021 11:48 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 04 Jul 2021 11:48 PM IST
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200 beds not enough doctors and paramedical staff for 100
रेवाड़ी। जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए मई 2020 में नागरिक अस्पताल को 100 से 200 बेड का कर दिया गया। लेकिन सरकार आज तक 100 बेड के लिए भी पर्याप्त चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ उपलब्ध नहीं करा पाई है। पुरानी व्यवस्थाओं के तहत नागरिक अस्पताल में 55 चिकित्सकों की पोस्ट प्रस्तावित हैं। इनमें से 11 पद खाली हैं और 9 चिकित्सक लंबे समय से अनुपस्थित चल रहे हैं। कहने का तात्पर्य यह कि कार्यरत महत 30 हैं। इनमें से भी कुछ चिकित्सकों की तैनाती ट्रॉमा सेंटर में की जाती है। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ की हड्डी कहे जाने वाले स्टाफ नर्स की भारी कमी है। 64 स्टाफ नर्स और 9 नर्सिंग सिस्टर की पोस्ट चार साल से खाली पड़ी हैं।
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200 बेड के लिए 110 डॉक्टर और 180 स्टाफ नर्स जरूरी
100 बेड के हिसाब से रेवाड़ी नागरिक अस्पताल में स्टाफ नर्स की 90 पोस्ट प्रस्तावित हैं, लेकिन कार्यरत महज 26 हैं। अब अस्पताल 200 बेड का हो चुका है। ऐसे में स्टाफ नर्स की प्रस्तावित पोस्ट बढ़कर 180 व डॉक्टर की 110 होनी चाहिए थी, लेकिन महज 35 डॉक्टर कार्यरत हैं। ऐसा ही हाल नर्सिंग सिस्टर का है। यहां पर इनके लिए 10 पोस्ट प्रस्तावित है, लेकिन कार्यरत महज दो हैं। ऐसे में 8 पोस्ट खाली होने का खामियाजा यहां पर भर्ती मरीजों को उठाना पड़ रहा है।
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ओपीडी बढ़ी, नहीं बढ़े चिकित्सक और स्टाफ
कोरोना से पहले शहर के नागरिक अस्पताल में हर रोज औसतन 1500 की ओपीडी होती थी। कई बार यह संख्या बढ़ कर 2000 तक पहुंच जाती है। मलेरिया-डेंगू व अन्य मच्छर जनित बीमारियों के चलते ओपीडी औसतन 2500 तक भी पहुंच रही है। ऐसे में पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के चलते यहां पर भर्ती मरीजों को परेशानी का सामना पड़ रहा है। कोरोनाकाल में भी चिकित्सकों को बीमार होने के बावजूद ड्यूटी करनी पड़ी है।
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ट्रॉमा सेंटर में भी महज खानापूर्ति
जिले से तीन नेशनल हाईवे- 48, 11 व 71 होकर गुजरते हैं। पटौदी रोड को भी हाईवे में तब्दील करने पर कार्य चल रहा है। ऐसे में सड़क दुर्घटनाओं के हर रोज शहर के ट्रॉमा सेंटर में 10-12 केस पहुंचते हैं। ट्रॉमा सेंटर में व्यवस्थाएं नहीं होने से हर रोज 80 फीसदी घायलों को रेफर कर दिया जाता है। इसका बड़ा कारण यह है कि आज तक ट्रॉमा सेंटर में स्थायी चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं हो पाई है। रात के समय हालात और ज्यादा बदतर हो जाते हैं। लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद रवाना कर दिया जाता है।
संभावित तीसरी लहर के लिए अनुबंध पर भर्ती की तैयारी
एक सप्ताह पहले कोरोना की संभावित तीसरी लहर की तैयारियों का जायजा लेने पहुंची स्वास्थ्य विभाग की महानिदेशक डॉ. वीना सिंह ने आईसीयू बनाने के आदेश दिए थे। पहले से ही चिकित्सकों की कमी झेल रहे नागरिक अस्पताल में अब आईसीयू और बच्चों के चिकित्सकों को अनुबंध आधार पर भर्ती करने की तैयारी चल रही है।

सीएमओ, रेवाड़ी डॉ. केके ने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए सरकार की ओर से हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। जरूरत के हिसाब से डॉक्टर की भर्ती के लिए स्वास्थ्य विभाग आदेश दे चुका है। 200 बेड के लिए प्रक्रिया चल रही है।
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