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....तो बढ़ गए रोजगार: बढ़ने की बजाय कम हो गए बेरोजगारी भता पाने वाले..
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। इसे सरकार के स्तर पर बरती गई पारदर्शिता का नाम दें या फिर बेरोजगारी घट गई है। जिला रोजगार अधिकारी कार्यालय के आंकड़े तो इसी तरह से चौंका रहे हैं। जिले में 2014 में जहां बेरोजगारी भत्ता पाने वाले युवाओं की संख्या 435 थी। वह 2018 में घटकर सिर्फ 110 ही रह गई है।
रेवाड़ी शहर की बात करें तो शहर में महज 20 ही ऐसे लाभपात्र हैं जो कि सरकार द्वारा चलाई गई बेराजगारी भत्ता योजना का लाभ ले रहे हैं। इतना ही शहर के मोहल्ला खासापुरा और छीपटवाड़ा में एक भी युवक बेरोजगारी भत्ता नहीं ले रहा है। इन आंकड़ों का खुलासा सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी से हुआ।
शहर के मोहल्ला छीपटवाड़ा निवासी साकेत धींगड़ा ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो सामने आया कि 2014 में बेरोजगारी भत्ता पाने वालों की संख्या 435 थी और अब यह बढ़ने की बजाय कम हो गई है। हालांकि इतना तो तय कि ज्यादातर युवा बेरोजगारी भत्ता के लिए पंजीकरण नहीं कराते हैं लेकिन इससे पहले इतनी बड़ी संख्या में युवाओं को बेरोजगारी भत्ता मिलने और अब उनमें सीधे तौर तीन तिहाई संख्या कम होने से पात्रों की विश्वसनीयता भी घेरे में आ गई है। इससे पहले तक केवल मैनुअल तौर पर आवेदन के बाद भत्ता दे दिया जाता था लेकिन अब पूरी तरह से ऑनलाइन सिस्टम होने के बाद भी आई पारदर्शिता को संख्या कम होने की बड़ी वजह माना जा रहा है।
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यूं घटते गए बेरोजगार
2014 में दिसंबर तक जिला में भत्ता लेने वाले स्नातक बेरोजगारों की संख्या 304, बारहवीं उत्तीर्ण पात्रों की संख्या 131 थी। नवंबर 2015 में स्नातक और बारहवीं पास पात्रों की संख्या 13 ही बढ़ पाई। उसके बाद 2016 में यह यह संख्या 40 तक बढ़ गई। 2017 में बेरोजगारी भत्ता वालों की संख्या महज 37 तक ही बढ़ी है। अब 2018 में इनकी संख्या बढ़ने की बजाय घटकर 110 ही रह गई है।
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रेवाड़ी। इसे सरकार के स्तर पर बरती गई पारदर्शिता का नाम दें या फिर बेरोजगारी घट गई है। जिला रोजगार अधिकारी कार्यालय के आंकड़े तो इसी तरह से चौंका रहे हैं। जिले में 2014 में जहां बेरोजगारी भत्ता पाने वाले युवाओं की संख्या 435 थी। वह 2018 में घटकर सिर्फ 110 ही रह गई है।
रेवाड़ी शहर की बात करें तो शहर में महज 20 ही ऐसे लाभपात्र हैं जो कि सरकार द्वारा चलाई गई बेराजगारी भत्ता योजना का लाभ ले रहे हैं। इतना ही शहर के मोहल्ला खासापुरा और छीपटवाड़ा में एक भी युवक बेरोजगारी भत्ता नहीं ले रहा है। इन आंकड़ों का खुलासा सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी से हुआ।
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शहर के मोहल्ला छीपटवाड़ा निवासी साकेत धींगड़ा ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो सामने आया कि 2014 में बेरोजगारी भत्ता पाने वालों की संख्या 435 थी और अब यह बढ़ने की बजाय कम हो गई है। हालांकि इतना तो तय कि ज्यादातर युवा बेरोजगारी भत्ता के लिए पंजीकरण नहीं कराते हैं लेकिन इससे पहले इतनी बड़ी संख्या में युवाओं को बेरोजगारी भत्ता मिलने और अब उनमें सीधे तौर तीन तिहाई संख्या कम होने से पात्रों की विश्वसनीयता भी घेरे में आ गई है। इससे पहले तक केवल मैनुअल तौर पर आवेदन के बाद भत्ता दे दिया जाता था लेकिन अब पूरी तरह से ऑनलाइन सिस्टम होने के बाद भी आई पारदर्शिता को संख्या कम होने की बड़ी वजह माना जा रहा है।
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यूं घटते गए बेरोजगार
2014 में दिसंबर तक जिला में भत्ता लेने वाले स्नातक बेरोजगारों की संख्या 304, बारहवीं उत्तीर्ण पात्रों की संख्या 131 थी। नवंबर 2015 में स्नातक और बारहवीं पास पात्रों की संख्या 13 ही बढ़ पाई। उसके बाद 2016 में यह यह संख्या 40 तक बढ़ गई। 2017 में बेरोजगारी भत्ता वालों की संख्या महज 37 तक ही बढ़ी है। अब 2018 में इनकी संख्या बढ़ने की बजाय घटकर 110 ही रह गई है।