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किराये के भवन में चल रहें

Wed, 13 Feb 2019 12:54 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 13 Feb 2019 12:54 AM IST
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किराये के भवन में चल रहें
किराये के भवन में चल रहें जिले के 126 आंगनबाड़ी केंद्र
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-प्रतिमाह 150 सौ रुपये किराया दे रहा है विभाग
-स्थान अभाव में बजट स्वीकृत होने के बाद भी पेंडिंग पड़ा 88 केंद्रों का निर्माण
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। जगह के अभाव एवं सरकार की हीला हवाली के चलते जिले के 126 आंगनबाड़ी केंद्र किराये के भवनों में चल रहे हैं। विभाग की ओर से प्रतिमाह पंद्रह सौ रुपये किराया भी दिया जा रहा है। इसके अलावा करीब 600 केंद्र पंचायत भवनों या फिर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के घरों से ही संचालित किए जा रहे हैं। मात्र 351 केंद्र ही ऐसे हैं जिनके पास स्वयं का भवन हैं। ऐसे में सवाल यह है कि कैसे बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जा सकता है। उधर, महिला विकास एवं बाल कल्याण विभाग का कहना है कि पंचायतों की तरफ से जमीन नहीं दिए जाने के कारण भवन नहीं बनाए जा रहे हैं। गांवों में आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए सरकार की तरफ से एक भवन के लिए करीब 250 फीट जमीन की आवश्यकता होती है। यह भूमि ग्राम पंचायत की तरफ से उपलब्ध कराई जाती है। इसके निर्माण के लिए सरकार की ओर से दस लाख रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाती है।
एक साल से स्वीकृत है 88 केंद्रों के भवन की राशी
सरकार की ओर से जिले के 88 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए बजट राशि स्वीकृत होकर आ चुकी है, जिसे जिला परिषद को भेजा जा चुका है। लेकिन स्थान मुहैया नहीं होने के कारण नए आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण नहीं हो रहा है। हालांकि करीब तीन माह पूर्व आयोजित हुए जिला परिषद की बैठक में आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण का मुद्दों भी उछला था, लेकिन स्थान के अभाव की समस्या वहां पर भी नजर आई।
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351 आंगनबाड़ी केंद्रों के पास है स्वयं का भवन
जिले में 1099 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है। जिनमें बच्चों को प्री स्कूल एजूकेशन, न्यूट्रिशन हेल्थ एवं पौष्टिक आहार दिया जाता है। केवल 351 केंद्र ही ऐसे हैं जिनके पास स्वयं का भवन हैं। इसके अलावा किसी के पास भी स्वयं का भवन नहीं हैं। हालांकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तरफ से कई बार स्वयं के भवन निर्माण की मांग की जा चुकी है। इसके बावजूद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ओर से कई बार ग्राम सभाओं में भवन निर्माण के लिए ग्राम पंचायत की ओर से नि:शुल्क जमीन मुहैया कराने की मांग की जाती है। लेकिन ग्राम पंचायतों की ओर से जमीन उपलब्ध कराने में कोई दिलचस्पी नहीं ली जा रही हैं। जिले के जिन गांवों में आंगनबाड़ी केंद्रों का अपना भवन नहीं है उनमें डवाना, शहबाजपुर, पदैयावास, लालपुर, गढ़ी, बोलनी, रालियावास व राजीव नगर आदि शामिल हैं।
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जिले में कई केंद्रों के पास स्वयं का भवन नहीं है। इसीलिए इन्हें पंचायत भवनों, संजीवनी केंद्रों या घरों से ही संचालित किया जा रहा हैं। सरकार की ओर से दी जा रही सुविधाओं से बच्चों एवं महिलाओं के पोषण का विशेष ध्यान रखा जाता है। कार्यकर्ताओं की ओर से ग्राम सभाओं की बैठकों में जाकर केंद्र के लिए जमीन की भी मांग की जाती है।

- राजबाला, जिला अध्यक्ष आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर यूनियन रेवाड़ी।

विभाग की ओर से सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को सुचारु रूप से चलाने का प्रयास किया जाता है। जमीन नहीं मिलने के कारण अधिकांश केंद्रों का अपना भवन नहीं है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ओर से ग्राम सभाओं में केंद्र के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग की जाती रही है। लेकिन सहयोग नहीं मिलने से ऐसा हो रहा है। इसके बावजूद भी सरकार सभी केंद्रों में सभी सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं। विभाग द्वारा बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है। महिलाओं एवं बच्चों का विशेष ध्यान रखा जाता है।
- लता शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग रेवाड़ी।
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