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आईजीयू सीट विवाद : बचे हुए विद्यार्थी 17 की ओपन काउंसिलिंग में ले सकेंगे एडमिशन

Wed, 26 Jun 2019 11:08 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 26 Jun 2019 11:08 PM IST
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आईजीयू सीट विवाद : बचे हुए विद्यार्थी 17 की ओपन काउंसिलिंग में ले सकेंगे एडमिशन

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रेवाड़ी। इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय (आईजीयू) मीरपुर में विभिन्न संकायों में सीट कम करने का विरोध बढ़ता देख विवि प्रशासन विद्यार्थियों के हितों को देखते सेंट्रल काउंसलिंग के बाद प्रवेश से वंचित पीजी के विद्यार्थियों को ओपन काउंसिलिंग के माध्यम से समायोजित करने पर सहमत हो गया है।
आईजीयू की एग्जीक्यूटिव कमेटी (ईसी) ने 8 जून को हुई मीटिंग में एमएससी मैथ, एमएससी मैथ विद कंप्यूटर साइंस, फिजिक्स, बॉटनी, जुलॉजी एवं एमएसी एनवायरमेंटल साइंस में 60-60 सीटों की संख्या घटाकर 20-20 करने को फैसला लिया था। सीट कम करने के बाद एमडीयू व केयू की ओर से आयोजित सेंट्रल काउंसिलिंग के लिए सीटों की संख्या भी भेज दी गई थी। इसको देखते हुए विभिन्न छात्र संगठन इसका विरोध कर रहे थे। करीब 5 दिन पहले मीरपुर की पंचायत ने भी वीसी प्रो. एसके गक्खड़ से मिलकर सीट नहीं बढ़ाने पर आंदोलन की चेतावनी दी थी। लेकिन अब विवि प्रशासन की ओर से 17 जुलाई को आयोजित ओपन काउंसिलिंग के माध्यम से क्षेत्र के बचे हुए विद्यार्थियों को प्रवेश देने की बात कही जा रही है। बता दें कि सेंट्रल काउंसिलिंग की पहली मेेरिट लिस्ट 8 व दूसरी 12 व तीसरी 15 जुलाई को जारी होनी है। 27 जून आवेदन करने की अंतिम तारीख थी। बता दें कि 22 जुलाई से विवि में नया सत्र शुरू हो जाएगा।
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छात्रों के विरोध को देखते विवि में लगानी पड़ी थी धारा 144
विभिन्न संकायों में सीट कम करने व एलएलम बंद करने के विरोध में एबीवीपी, एनएसयूआई व इनसो सहित अन्य छात्र संगठनों की ओर से विरोध प्रदर्शन के साथ तालाबंदी की चेतावनी दी गई थी। इसको देखते हुए विवि प्रशासन ने जिला प्रशासन व एसपी रेवाड़ी को पत्र लिखकर विवि कैंपस की 500 मीटर परिधि में धरना-प्रदर्शन पर रोक लगा दी थी। छात्र संगठनों ने इसे लोकतंत्र का हनन बताया था। लेकिन अब विवि की ओर से विद्यार्थियों को दी गई राहत फायदेमंद हो सकती है।
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लैब नहीं होने का हवाला देकर सीट की गई थी कम
विवि की ओर से सीट कम करने के पीछे लैब नहीं होने का हवाला दिया गया था। विवि प्रशासन ने कहा था कि यूजीसी गाइड लाइन के तहत 15-20 विद्यार्थियों के लिए लैब की जरूरत होती है। ऐसे में एक संकाय की 60 सीटों के लिए तीन लैब की जरूरत है। वहीं केमिस्ट्री को जोड़कर अकेले साइंस विभाग के 7 संकायों के लिए 21 लैब होनी चाहिए। विद्यार्थियों को प्रयोगात्मक ज्ञान नहीं मिलने के चलते व आगे जाकर पिछड़ जाते हैं। लेकिन विवि प्रशासन यह बताने में विफल रहा कि जो विद्यार्थी यहां से पास आउट हो चुके हैं, उनके भविष्य का क्या होगा।
अब एलएलम पर पेंच
विवि प्रशासन की ओर से एलएलएम संकाय को बंद ही कर दिया है। ऐसे में विवि प्रशासन को यहां पर विरोध का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि विवि से एलएलबी कर रहे विद्यार्थियों का कहना है कि एलएलएम बंद करने के लिए अब उन्हें किसी अन्य विवि जाना पड़ेगा। इसलिए उनके पास विरोध करने के सिवाय कोई रास्ता नहीं है। वहीं दूसरी ओर विवि का तर्क है कि इस विभाग में स्थायी एक भी प्रो. नहीं है, ऐसे में विद्यार्थियों के हित में ही एलएलएम बंद करने का निर्णय लिया गया है।

विवि का फोकस..आधारभूत ढांचा: कुलसचिव
आईजीयू की कुलसचिव डॉ. अन्नपूर्णा शर्मा ने कहा कि सीट कम करने का मकसद शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना है। साइंस के विद्यार्थियों के लिए प्रयोगात्मक ज्ञान जरूरी है। इसके लिए लैब निर्माण कार्य शुरू किया जा रहा है। अगले सत्र से पहले लैब निर्माण कार्य पूरा कर दिया जाएगा। क्षेत्र के बच्चों का नुकसान किसी भी कीमत पर नहीं होने दिया जाएगा। जो विद्यार्थी प्रवेश से वंचित रहेंगे, उनको 17 जुलाई की ओपन काउंसिलिंग में एडमिशन दिया जाएगा। बात रही एलएलएम की यहां का भी आधारभूत ढांचा तैयार होने के बाद कोर्स फिर से शुरू कर दिया जाएगा। शिक्षकों की भर्ती व आधारभूत ढांचा तैयार करने पर कार्य चल रहा है।
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