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योजनाओं का लिया लाभ: भिवानी की रेखा ने खींची कुटीर उद्योग की लंबी लकीर, विदेशी भी स्वाद व मसालों के दीवाने

Thu, 03 Apr 2025 11:17 AM IST
नवीन दलाल संजय वर्मा, भिवानी (हरियाणा)
संजय वर्मा, भिवानी (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Thu, 03 Apr 2025 11:17 AM IST
सार

रेखा का ब्रांड अब इतना प्रचलित हो गया है कि उसकी मांग देश-विदेश में बढ़ गई है। मसाले, अचार और मोटे अनाज की खिचड़ी, दलिया, सेतू हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़ से लेकर यूएसए और कनाडा तक जा रहे हैं।

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Rekha of Bhiwani drawn a long line of cottage industry, even foreigners are crazy about the taste and spices
रेखा तिवारी - फोटो : संवाद

विस्तार

बहल की 33 वर्षीय रेखा तिवारी के हाथों ने ऐसा जादू बिखेरा कि मसालों और मोटे अनाज के उत्पादों का स्वाद लाजवाब बन गया। रेखा ने अपनी मेहनत से कुटीर उद्योग की ऐसी लंबी लकीर खिंची कि देश ही नहीं अमेरिका और कनाडा में भी उसके उत्पाद के लोग मुरीद हो गए। ये जिले की पहली ऐसी महिला भी हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री मूद्रा लोन और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम की मदद से कुटीर उद्योग में सफलता हासिल की है। इनके यहां तैयार मोठ की दाल, बाजरे की खिचड़ी, मिर्च के अचार और जौ के सत्तू के स्वाद का कोई जवाब नहीं है।

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रेखा तिवारी ने बताया कि उसके मायके राजस्थान के हनुमान के हरिपुर गांव में परिवार के लोग अचार और मोटे अनाज से घर में उत्पाद तैयार करते थे। वहीं पर उसने ये परंपरागत उत्पाद बनाने सीखे। शादी के बाद वह बहल में अपनी ससुराल आ गई। यहां पर भी वह अपने परंपरागत रेसीपी से तैयार होने वाले उत्पादों को पहले घर परिवार के लिए बनाने लगी। बाद में उसने छोटे स्तर पर इनका उत्पादन शुरू कर दिया। अक्तूबर 2023 में उसने प्रधानमंत्री मुद्रा लोन लिया और इसके बाद प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम का औपचारीकरण योजना में भी उसने लोन लेकर बहल में ही आरडीएमएम के नाम से खुद का ब्रांड बनाया। उसकी पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग भी उसने खुद कराई। उसके साथ 15 से 20 महिलाएं भी मसाला कारोबार से जुड़ गई हैं। संवाद
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दिल्ली, चेन्नई से लेकर यूएसए और कनाडा में भी बिक रहे उत्पाद
रेखा का ब्रांड अब इतना प्रचलित हो गया है कि उसकी मांग देश-विदेश में बढ़ गई है। मसाले, अचार और मोटे अनाज की खिचड़ी, दलिया, सेतू हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़ से लेकर यूएसए और कनाडा तक जा रहे हैं। रेखा कोरियर से विदेश में मसाले और अचार भेज रही है, जबकि मोटे अनाज के ताजा उत्पाद भी विदेशी लोगों को पसंद आ रहे हैं।
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शिक्षक पति से मिली कुटीर उद्योगपति बनने की प्रेरणा
रेखा तिवारी ने बताया कि उनके पति संदीप कुमार एक निजी शिक्षण संस्थान में निदेशक हैं। बेटी इशिका पांचवीं में पढ़ रही है। उसने स्नातकोत्तर की पढ़ाई की है। जब वह घर पर हाथ से मसाले कूटकर तैयार करती थी तो उसका पति उसे इसे बड़े स्तर पर तैयार करकर उसकी मार्केटिंग का आइडिया देते थे। पति से प्रोत्साहन और साथ मिलने के बाद रेखा ने मसाले का कुटीर उद्योग स्थापित कर अपना सपना पूरा कर दिखाया। अब वह हर माह एक लाख से अधिक की आमदनी कमा रही हैं।

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