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चंडीगढ़: हाईकोर्ट ने कहा-जघन्य अपराध का दोषी भी पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पैरोल का हकदार

Tue, 02 Nov 2021 09:53 AM IST
प्रमोद कुमार अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: प्रमोद कुमार Updated Tue, 02 Nov 2021 09:53 AM IST
सार

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने जघन्य अपराध के दोषी व्यक्ति की याचिका मंजूर कर ली है। न्यायालय ने कहा कि जघन्य अपराध का दोषी भी पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पैरोल का हकदार है। हत्या के मामले में सजा काट रहे कैदी की याचिका मंजूर करते हुए हाईकोर्ट का अहम आदेश आया है। भांजे की शादी में शामिल होने के लिए झज्जर निवासी याचिकाकर्ता को 14 दिन की पैरोल मिली है।

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Punjab and Haryana High Court accepts the petition of a person convicted of heinous crime
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

कैदी यदि जघन्य अपराध का दोषी है, तो भी वह अपने करीबी रिश्तेदारों के पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पैरोल का हकदार है। हालांकि पैरोल पर फैसला लेते हुए परिस्थितियों और तथ्यों पर विचार करना जरूरी है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भांजे की शादि में शामिल होने के लिए दाखिल पैरोल याचिका मंजूर करते हुए यह अहम आदेश जारी किया है। झज्जर निवासी नवीन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया था कि भांजे की शादी में शामिल होने के लिए उसने झज्जर जेल अधीक्षक से पैरोल की मांग की थी।

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मांग पर नहीं लिया था कोई निर्णय
जेल अधीक्षक ने उसकी मांग पर कोई निर्णय नहीं लिया, जिसके चलते उसे हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। याची ने बताया कि वह हत्या और आर्म्स एक्ट में सजा काट रहा है। हरियाणा सरकार ने कहा कि याची जघन्य अपराध में दोषी है और ऐसे में उसे जमानत नहीं दी जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी भी कैदी को किसी महत्वपूर्ण पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने से वंचित नहीं किया जा सकता। कैदी के करीबी रिश्तेदार ही कैदी के परिवार के सदस्यों की देखभाल करते हैं।
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रिश्तेदार भी कैदी से अपेक्षा करते हैं
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता नियमों के तहत पैरोल पाने का हकदार नहीं है, लेकिन तथ्य और परिस्थितियां इस मामले में पैरोल का आधार बनाती हैं। कैदी और उसका परिवार सहयोग, समर्थन और वित्तीय मदद के लिए रिश्तेदारों पर निर्भर रहते है। बदले में ऐसे व्यक्ति भी कैदी से अपने पारिवारिक कार्यों में भाग लेने की उम्मीद करते हैं। कैदी की उपस्थिति सामाजिक बहिष्कार या जोखिम से भरी होने के बाद भी रिश्तेदारों की अपेक्षा रहती है। 

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इस मामले में याची अपने भांजे का एकमात्र मामा है और उसके लिए हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार धार्मिक भूमिकाएं निभाना महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने पैरोल की मांग स्वीकार करते हुए याची को आवश्यक बांड भरने का आदेश देते हुए चौदह दिनों के लिए पैरोल देने का आदेश दिया है।

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