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Haryana: राजनीतिक दलों ने जातिगत समीकरण साधे; आधी आबादी से कर गए किनारा, 37 उम्मीदवारों में सिर्फ चार महिलाएं

Sun, 28 Apr 2024 11:58 AM IST
नवीन दलाल आशीष वर्मा, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, चंडीगढ़ Published by: नवीन दलाल Updated Sun, 28 Apr 2024 11:58 AM IST
सार

राजनीतिक दल महिलाओं को उम्मीदवार बनाए जाने से किनारा तो करते हैं बल्कि महिलाएं भी वोट बनवाने और वोट देने में पीछे हैं। हरियाणा में कुल 19981982 मतदाता हैं। इनमें से 9377244 महिला वोटर हैं। 18-19 वर्ष आयु वर्ग के कुल मतदाताओं में महिलाओं की संख्या में काफी बड़ा अंतर है।

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Political parties in Haryana solved caste equations; Sidelined from half the population, only four women
वोटिंग - फोटो : प्रतीकात्मक

विस्तार

महिलाओं की बराबरी की बात सभी दल करते हैं। लोकसभा चुनाव में महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा बना रहे हैं। महिला आरक्षण बिल पास होने पर सबने सराहना की। अधिकतर दलों ने इसे जल्द से जल्द लागू करने की बात कही। मगर लोकसभा चुनावों में जब महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की बात आती है, तो सभी दल किनारा कर लेते हैं।

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महिला सशक्तिकरण की कोशिश में सभी राजनीतिक दलों का रुख ठंडे बस्ते में चला जाता है। लोकसभा चुनाव में भाजपा-कांग्रेस व राजनीतिक दलों ने हरियाणा में अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी, मगर महिलाओं को टिकट देने में कंजूसी कर गए। हरियाणा में अब तक 37 उम्मीदवार घोषित किए जा चुके हैं। इनमें सिर्फ चार महिलाओं को लोकसभा का टिकट दिया गया है।
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भाजपा, कांग्रेस, इनेलो और जजपा ने सिर्फ एक-एक महिलाओं को टिकट दिया है। वहीं, बसपा ने एक भी महिला को टिकट नहीं दिया है। हालांकि कांग्रेस की एक, इनेलो की चार, जजपा की पांच और बसपा की तीन टिकटों की घोषणा होना अभी बाकी है। हरियाणा में भाजपा और कांग्रेस दोनों विधानसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का वादा करती हैं, मगर जब संसदीय चुनावों की बात आती है तो दोनों ही आधी आबादी से किनारा कर लेते हैं।
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हरियाणा में दस संसदीय सीटें हैं। इन सीटों पर 25 मई को मतदान होना है। भाजपा ने अंबाला लोकसभा सीट से बंतो कटारिया को मैदान उतारा है। पिछली बार भी भाजपा ने एक महिला उम्मीदवार को उतारा था। सिरसा सुरक्षित सीट से पूर्व आईआरएस सुनीता दुग्गल को टिकट दिया था। सुनीता दुग्गल ने मैदान भी फतेह कर लिया था। कांग्रेस ने आठ उम्मीदवारों की घोषणा की है। इनमें से सिरसा से कुमारी सैलजा को चुनावी मैदान में उतारा है। पिछले साल कांग्रेस ने दो महिलाओं को टिकट दिया था। भिवानी-महेंद्रगढ़ से श्रुति चौधरी भी मैदान में थी। जजपा ने नैना चौटाला और इनेलो ने सुनैना चौटाला को टिकट दिया है।

चारों की पृष्ठभूमि राजनीतिक, नया चेहरा कोई नहीं
गौर करने वाली बात है कि हरियाणा में जिन महिलाओं को टिकट दिया है। इनमें सभी की पृष्ठभूमि राजनीतिक रही है। कोई भी नया चेहरा नहीं है। भाजपा उम्मीदवार बंतो कटारिया के पति स्व. रतनलाल कटारिया तीन बार सांसद रह चुके हैं। कांग्रेस की कुमारी सैलजा भी राजनीतिक परिवार से आती हैं। उनके पिता दलबीर सिंह सिरसा सीट से चार बार सांसद रह चुके हैं। कुमारी सैलजा भी दो बार सिरसा और दो बार अंबाला लोकसभा सीट से सांसद रही हैं। जजपा की नैना चौटाला पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला के बेटे अजय चौटाला की पत्नी व राज्य के पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला की मां हैं।

वहीं, इनेलो की उम्मीदवार सुनैना चौटाला पूर्व उपप्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल के पौत्र रविंद्र उर्फ रवि चौटाला की पत्नी हैं। 58 साल में संसद की दहलीज पर सिर्फ छह महिलाएं पहुंची महिलाओं को टिकट देने और संसद तक पहुंचाने में हरियाणा का इतिहास कुछ खास अच्छा नहीं रहा है। 1966 में राज्य के गठन के बाद से हरियाणा से केवल छह महिलाएं ही लोकसभा के लिए चुनी गई हैं। इनमें चंद्रावती, सुधा यादव, श्रुति चौधरी, कैलाशो देवी, सुनीता दुग्गल और कुमारी सैलजा शामिल हैं। कुमारी सैलजा चार बार और श्रुति चौधरी दो बार सांसद चुनी गई हैं। खास बात है कि करनाल, सोनीपत, रोहतक, हिसार, गुरुग्राम और फरीदाबाद लोकसभा सीट से कभी महिला सांसद नहीं चुनी गई।


वोट बनवाने व वोट देने में भी पीछे महिलाएं
राजनीतिक दल महिलाओं को उम्मीदवार बनाए जाने से किनारा तो करते हैं बल्कि महिलाएं भी वोट बनवाने और वोट देने में पीछे हैं। हरियाणा में कुल 19981982 मतदाता हैं। इनमें से 9377244 महिला वोटर हैं। 18-19 वर्ष आयु वर्ग के कुल मतदाताओं में महिलाओं की संख्या में काफी बड़ा अंतर है। इस आयु वर्ग के कुल 3,43,908 मतदाता हैं। इनमें सिर्फ 113346 ही महिलाएं हैं। वहीं, 20 से 29 आयु वर्ग में सिर्फ 40 फीसदी ही महिलाएं हैं। वहीं, वोट देने में भी महिलाएं पीछे हैं। एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, 2014 में 21 लाख महिलाएं और 2019 में 25 लाख महिलाओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं किया था।

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