{"_id":"497639bc-6b69-11e2-a797-d4ae52bc57c2","slug":"plea-against-closure-report-rejected-in-ruchika-case","type":"story","status":"publish","title_hn":"रुचिका कांडः क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ अर्जी खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रुचिका कांडः क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ अर्जी खारिज
पंचकूला/ब्यूरो
Updated Thu, 31 Jan 2013 11:14 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रुचिका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर उसके पिता एससी गिरहोत्रा के हस्ताक्षर में हुई जालसाजी और रुचिका के भाई आशु को हिरासत में यातनाएं देने के मामले में सीबीआई द्वारा दाखिल क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ आनंद प्रकाश की अपील बुधवार को सीबीआई की विशेष अदालत ने खारिज कर दी। आनंद प्रकाश रुचिका की सहेली अनुराधा के पिता हैं।
विज्ञापन
सीबीआई की विशेष अदालत ने कहा कि आनंद प्रकाश न तो पीड़ित हैं और न ही शिकायतकर्ता। वे सिर्फ हस्ताक्षरकर्ता हैं। जरूरी नहीं है कि इस मामले में हस्ताक्षरकर्ता को नोटिस दिया जाए। क्लोजर रिपोर्ट पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए शिकायतकर्ता व इस केस में सूचना देने वाले शख्स को ही नोटिस जारी किया जाता है, हस्ताक्षरकर्ताओं को नहीं। यदि नोटिस नहीं भेजा तो इसका मतलब यह नहीं कि मजिस्ट्रेट के फैसले को गलत ठहराया जाए।
विज्ञापन
सीबीआई ने दोनों ही मामलों में साल 2010 में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। उस समय अदालत की ओर से रुचिका के पिता एससी गिरहोत्रा और भाई आशु गिरहोत्रा को नोटिस भेजा गया था। दोनों ने अदालत में पेश होकर सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर आपत्ति नहीं होने की बात कही थी।
विज्ञापन
एक जून को सीबीआई की निचली अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली। इसके बाद आनंद प्रकाश ने सीबीआई द्वारा क्लोजर रिपोर्ट दायर करने की सूचना नहीं देने पर अदालत में अपील दायर की थी। मालूम हो कि रुचिका ने 28 दिसंबर 1993 को आत्महत्या कर ली थी।
इन मामलों पर थी क्लोजर रिपोर्ट
आरोप था कि रुचिका की मौत के बाद उसके पिता से खाली कागजात पर हस्ताक्षर करवाकर उनकी बेटी की पोस्टमार्टम की औपचारिकताओं को पूरा कर दिया गया और रुचिका का नाम बदलकर रूबी व एससी गिरहोत्रा का नाम बदलकर सुभाष चंद लिख दिया गया था। वहीं, आशु गिरहोत्रा ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि हरियाणा के तत्कालीन डीजीपी एसपीएस राठौर के इशारे पर उस पर वाहन चोरी का एक झूठा मामला दर्ज किया गया। जांच के बाद सीबीआई ने इन दोनों मामलों में क्लोजर रिपोर्ट पेश की थी।
डीजीपी एसपीएस राठौर के एडवोकेट अजय कौशिक का कहना है कि हमने सीबीआई जांच का सपोर्ट किया। राठौर के खिलाफ कोई भी सुबूत नहीं मिला। अदालत ने अपने फैसले में साफ तौर पर कहा है कि निचली अदालत का फैसला बिल्कुल सही है। फैसले में यह कहीं नहीं लिखा है कि आनंद प्रकाश निचली अदालत में अपील कर सकते हैं।