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तकनीकी क्षेत्र में युवाओं को करनी होगी कठोर मेहनत, तभी युवा बनेंगे देश का भविष्य : ढांडा
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पानीपत। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए कठोर मेहनत करनी होगी। हर क्षेत्र में कुछ नया करने पर विचार करना होगा। विजन तय करने के बाद ही अच्छे से कार्य करना होगा और अपने कार्य को और गति देनी होगी। तभी युवा देश का भविष्य बनेंगे।
उन्होंने यह बात सोमवार को महर्षि कश्यप राजकीय बहुतकनीकी संस्थान जाटल में कही। वे यहां शिक्षकों की पहली एक्सपोजर विजिट की बस को रवाना करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इसमें सरकारी इंजीनियरिंग, बहुतकनीकी संस्थानों के इलेक्ट्रानिक्स, इलेक्ट्रिकल व इंस्ट्रूमेटेशन से संबंधित 65 शिक्षक रवाना हुए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण एवं उच्च संस्थानों के दौरे से उनके शिक्षण एवं प्रेक्टिकल की गुणवत्ता में सुधार होगा। नए आयाम विद्यार्थियों को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर प्रदान करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लगाव देश के युवा व विद्यार्थियों पर केंद्रित है।
नए सत्र से दिखनी चाहिए शुरुआत
शिक्षा मंत्री ने कहा कि अच्छे परिणाम को लेकर हमें प्रयास करने की जरूरत है। इसमें किसी तरह की कोताही न बरतें। संस्थानों में 2025 के सत्र में इसकी शुरूआत दिखाई देनी चाहिए। मंत्री ने कहा कि 2047 के विकसित भारत को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। भारत में पूरी दुनिया के सामने चुनौती रखी है। मंत्री ने संकाय प्रदर्शन यात्रा में जाने वाले विभिन्न संस्थानों के बहुतकनीकी संस्थानों के इलेक्ट्रानिक्स व इंस्ट्रूमेटेशन से संबंधित शिक्षकों का आह्वान किया। संस्थानों को ऐसे रास्ते खोजने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बहुत कुछ नया है। जो बहुत कुछ प्रभाव देगा। तकनीकी शिक्षा विभाग के महानिदेशक प्रभजोत सिंह (आईएएस) ने कई तकनीकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में पीएचडी के लिए भी दरवाजे खुले हैं। उन्होंने कहा कि फैकल्टी एक्सपोजर में जाने वाले सदस्यों को आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से उनके प्रयोगशाला एक्सपोजर फैकल्टी विद्यार्थी विचार विमर्श को ध्यान से समझना होगा। इस मौके पर तकनीकी शिक्षा के निदेशक केके कटारिया, अतिरिक्त निदेशक अनिल सहरावत, उपनिदेशक रेनू आर्य, संस्थान प्रधानाचार्य राजीव नरवाल, प्रधानाचार्य नीलोखेड़ी ज्वाला प्रसाद, प्रताप सिंह चैंची, प्रधानाचार्य जीपी मंदकोला, सांपला की प्राचार्या गीता गुलिया, कृष्ण चहल व गुलशन आर्य मौजूद रहे।
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उन्होंने यह बात सोमवार को महर्षि कश्यप राजकीय बहुतकनीकी संस्थान जाटल में कही। वे यहां शिक्षकों की पहली एक्सपोजर विजिट की बस को रवाना करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इसमें सरकारी इंजीनियरिंग, बहुतकनीकी संस्थानों के इलेक्ट्रानिक्स, इलेक्ट्रिकल व इंस्ट्रूमेटेशन से संबंधित 65 शिक्षक रवाना हुए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण एवं उच्च संस्थानों के दौरे से उनके शिक्षण एवं प्रेक्टिकल की गुणवत्ता में सुधार होगा। नए आयाम विद्यार्थियों को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर प्रदान करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लगाव देश के युवा व विद्यार्थियों पर केंद्रित है।
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नए सत्र से दिखनी चाहिए शुरुआत
शिक्षा मंत्री ने कहा कि अच्छे परिणाम को लेकर हमें प्रयास करने की जरूरत है। इसमें किसी तरह की कोताही न बरतें। संस्थानों में 2025 के सत्र में इसकी शुरूआत दिखाई देनी चाहिए। मंत्री ने कहा कि 2047 के विकसित भारत को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। भारत में पूरी दुनिया के सामने चुनौती रखी है। मंत्री ने संकाय प्रदर्शन यात्रा में जाने वाले विभिन्न संस्थानों के बहुतकनीकी संस्थानों के इलेक्ट्रानिक्स व इंस्ट्रूमेटेशन से संबंधित शिक्षकों का आह्वान किया। संस्थानों को ऐसे रास्ते खोजने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बहुत कुछ नया है। जो बहुत कुछ प्रभाव देगा। तकनीकी शिक्षा विभाग के महानिदेशक प्रभजोत सिंह (आईएएस) ने कई तकनीकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में पीएचडी के लिए भी दरवाजे खुले हैं। उन्होंने कहा कि फैकल्टी एक्सपोजर में जाने वाले सदस्यों को आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से उनके प्रयोगशाला एक्सपोजर फैकल्टी विद्यार्थी विचार विमर्श को ध्यान से समझना होगा। इस मौके पर तकनीकी शिक्षा के निदेशक केके कटारिया, अतिरिक्त निदेशक अनिल सहरावत, उपनिदेशक रेनू आर्य, संस्थान प्रधानाचार्य राजीव नरवाल, प्रधानाचार्य नीलोखेड़ी ज्वाला प्रसाद, प्रताप सिंह चैंची, प्रधानाचार्य जीपी मंदकोला, सांपला की प्राचार्या गीता गुलिया, कृष्ण चहल व गुलशन आर्य मौजूद रहे।
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