फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Panipat News ›   You have to keep yourself away from children, doctor mothers remain isolated

मातृ दिवस: खुद को बच्चों से रखना होता है दूर, डॉक्टर माताएं रहती हैं आइसोलेट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 09 May 2021 12:19 AM IST
विज्ञापन
You have to keep yourself away from children, doctor mothers remain isolated
कोरोना संक्रमण से खुद को बचाते हुए अपने परिवार और बच्चों को बचाने की जिम्मेदारी डॉक्टर माताएं बखूबी निभा रहीं हैं। घर जाकर खुद को आइसोलेट रखती हैं, जिससे बच्चों या परिवार के किसी अन्य सदस्य को कोरोना का संक्रमण न हो। आज मातृ दिवस पर ऐसी माताओं को सलाम।
विज्ञापन

बेटी भी है डॉक्टर, उससे मिलती है हिम्मत : डॉ. निशि जिंदल
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. निशि जिंदल कोरोना संक्रमितों के इलाज के साथ ही परिवार भी संभाल रहीं हैं। दो बच्चों की मां हैं। बेटी भी दिल्ली में डॉक्टर है। वह दो बार कोरोना संक्रमित हो चुकी हैं। अस्पताल के मुख्य प्रशासनिक कार्य की जिम्मेदारी इन्हीं पर है। तीन निजी अस्पतालों का नोडल अधिकारी भी बनाया गया है। इन अस्पतालों में ऑक्सीजन और बेड की सुविधाएं सुचारु रखने की जिम्मेदारी इन्हीं पर है। कोरोना काल में फ्रंट फाइटर के तौर जिम्मेदारी निभा रहीं डॉ. निशि अस्पताल में लगातार 12-15 घंटे तक काम कर रही हैं। कोरोना संक्रमण को रोकने की दिशा में स्क्रीनिंग महत्वपूर्ण हैं, अब तक पांच हजार से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग कर चुकी हैं। वह बताती हैं कि ये ऐसी घड़ी है, जिसमें सबको एकजुट होकर काम करना होगा। परिवार में पति और बेटी डॉक्टर हैं, उनकी लगन, मेहनत और जुझारू पन देखकर हिम्मत मिलती है।
विज्ञापन

बेहतर इंतजामों से ही कोरोना को हरा सकते हैं : डॉ. शालिनी मेहता
डॉ. शालिनी मेहता सिविल अस्पताल की नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं। जब सिविल अस्पताल के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कोरोना संक्रमित हो गए तो प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी इन्होंने बखूबी निभाई। वह खुद कोरोना संक्रमित हो चुकी हैं। संक्रमण से उभरने के 7 दिन बाद ही इन्होंने ड्यूटी पर वापस लौटकर मोर्चा संभाल लिया था। प्रशासनिक कार्यों के साथ ही नेत्र रोगियों की जांच भी की। सुबह 9 से शाम पांच बजे तक अस्पताल में रहकर व्यवस्था को संभालना और फिर घर जाकर भी डॉक्टरों और स्टाफ के संपर्क में रहकर कोरोना मरीजों की सेवा की दिशा में काम किया। वह कहती हैं कि बेहतर इंतजामों से ही कोरोना को हराया जा सकता है। इसके लिए प्रयास करना उनकी प्राथमिकता में है। उनकी एक बेटी है, जिनका विवाह हो चुका है।
विज्ञापन
विज्ञापन

हारकर घर नहीं बैठ सकते हैं : डॉ. मोना नागपाल
डॉ. मोना नागपाल सिविल अस्पताल में मनोरोग विशेषज्ञ हैं। इनको कोरोना के इस काल में फिलहाल इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी करने की जिम्मेदारी दी गई है। सबसे अधिक खतरे में इमरजेंसी के डॉक्टर ही काम करते हैं। कोरोना के मरीजों की जांच करना उन्हें ऑक्सीजन देना, दाखिल करना और उनकी हिस्ट्री तैयार करना और इमरजेंसी में काम करने वाले स्टाफ को प्रेरित करते हैं, यह असल कोरोना फाइटर बने हैं। लगातार आठ घंटे इमरजेंसी में संक्रमण के बीच रहकर अपनी ड्यूटी निभा रहीं हैं। वह कहती हैं कि ये ऐसी घड़ी है, जहां ड्यूटी को पूरे समर्पण भाव से निभाना है। हम इससे हार कर घर नहीं बैठ सकते हैं। लोगों से अपील है कि वो कोविड नियमों का पालन करें।
शायद इस घड़ी से लड़ने के लिए डॉक्टर बने थे : डॉ. प्रीति
डॉ. प्रीति पिछले एक साल से कोरोना के खिलाफ काम करने वाले उन फाइटर में शामिल हैं, जो पहले दिन से मोर्चे पर डटी हुईं हैं। कोरोना के पहले रोगी का सैंपल इन्होंने ही लिया था। सैंपलिंग के लिए ये 18 घंटे लगातार अस्पताल में रहकर काम कर चुकी हैं। हर स्टाफ के साथ मिलकर रोगियों के सैंपल लेना, उनकी जांच करना इनका मुख्य कार्य है। इनको ये भी पता है कि ये किसी भी वक्त संक्रमण का शिकार हो सकती हैं, लेकिन इनका कहना है कि खुद की फिक्र कम है, लेकिन ड्यूटी इस वक्त सबसे महत्वपूर्ण है। शायद इस घड़ी से लड़ने के लिए ही डॉक्टर बने थे। घर में दो बच्चे हैं, जिनका पति और सास ख्याल रखते हैं। वह खुद को घर पर आइसोलेट ही रखती हैं।

दो बच्चों से दूर रहती हूं, खुद को आइसोलेट रखना होता है : डॉ. शशि गर्ग
डॉ. शशि गर्ग पहले कोविड की नोडल अधिकारी भी रह चुकी हैं। अब इनको सबसे बड़ा जिम्मा अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की व्यवस्था को देखने का दिया गया है। दिन भर अस्पतालों का निरीक्षण करना लोगों की परेशानियां सुनना और डॉक्टरों को बेहतर सुविधाएं देने का जिम्मा इन्हीं को दिया गया है। डॉ. शशि गर्ग कहती हैं कि उन्हें जो भी ड्यूटी मिलती है वह पूरी ईमानदारी से निभाती हैं। घर पर दो बच्चे हैं, वह घर जाकर खुद को आइसोलेट कर लेती है। उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है। बच्चों से दूर रहना होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed