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म्हारी निशा ने पंद्रह की उम्र में ही बैंकाक में जमाई धाक

Tue, 13 May 2014 10:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत Updated Tue, 13 May 2014 10:54 PM IST
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म्हारी निशा दहिया ने 15 साल की उम्र में ही एशियन रेसलिंग कैडेट चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर पूरे विश्व में धाक जमा दी। उसने उज्बेकिस्तान की पहलवान को पटखनी देकर पदक जीता।
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यहीं नहीं, उसने अपने बाकी के तीनों मुकाबलों में भी शानदार प्रदर्शन किया और मंगोलिया व कजाकिस्तान की पहलवानों को भी धूल चटाई।

गांव आदियाना में किसान के घर जन्मी निशा दहिया आज पूरे जिले की शान और बेटी बन गई है। उसका हर कोई स्वागत कर रहा है। निशा ने अपने घर व मां-बाप से दूर रहकर कुश्ती के गुर सीखे और बैंकाक तक पहुंच गई।
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निशा दहिया ने आठ से 11 मई तक एशियन रेसलिंग कैडेट चैंपियनशिप में भाग लिया। 49 किलोग्राम भार वर्ग में नामचीन पहलवानाें के बीच कांस्य पदक जीता। निशा ने जीत का श्रेय अपने कोच राजबीर सिंह, गुरु देवीलाल और पिता रमेश कुमार व मां बबली को दिया है।
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देश की झोली में डालना चाहती है कई मेडल
निशा ने बताया कि वह कुश्ती के क्षेत्र में देश की झोली में कई मेडल लाना चाहती है और वह अपने सपने को पूरा करने के लिए पूरे जोश के साथ कुश्ती के गुर सीख रही है।

उसने बताया कि वह स्कूली पढ़ाई पूरी करने के साथ हर रोज आठ घंटे कुश्ती की प्रैक्टिस करती है। वह चार घंटे सुबह व चार घंटे शाम को प्रैक्टिस को देती है।

उसने बताया कि तीन साल पहले ही कुश्ती के प्रति लगाव हो गया और परिवार की मंजूरी मिलने पर कुश्ती सीखने चली गई। वह एशियन कैडेट चैंपियनशिप में गोल्ड लाना चाहती थी, लेकिन इससे चूक गई। वह इन कमियों को जल्द ही दूर करेगी और देश की झोली में एक नहीं कई गोल्ड मेडल लाकर देगी।

मां-बाप भी हैं मिसाल
निशा के मां-बाप आज के समाज में एक मिसाल हैं। पिता रमेश दहिया खेतीबाड़ी करते हैं और उसकी मां बबली हाउस वाइफ हैं। दोनों ने इतना ज्यादा पढ़ा लिखा न होने पर भी दो बेटियों के बाद आगे संतान पैदा न करने का फैसला लेते हुए उनको ही बेटा मानकर पालने लगे।


बड़ी बेटी की शादी कर दी और अब छोटी बेटी को कुश्ती में लगाव होने पर हरसंभव मदद करने लगे। उन्होंने निशा को समसपुर, रोहतक में उसके गुरु देवीलाल के पास छोड़ दिया। निशा यहां पर रहकर छोटूराम स्टेडियम रोहतक में प्रैक्टिस करती है।
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