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Panipat News: नई और विभाजित संपत्ति कर पार्ट आईडी बनाने का काम ठप
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पानीपत। नगर निगम में पिछले एक सप्ताह से नई और विभाजन की संपत्तिकर आईडी को बनाने का कार्य बंद है। जिसके बाद से निगम में इनके आवेदनों की भरमार हो चुकी है। लोग नई संपत्ति कर आईडी बनवाने और विभाजन के भूखंड की आईडी बनवाने के लिए निगम कार्यालय में चक्कर काट रहे हैं। जबकि अधिकारियों का कहना है कि ये काम तकनीकी कमी की वजह से बंद हो गया था। जिसे सोमवार से चालू करवा दिया गया है।
मंगलवार को निगम कर्मचारी लेवल वन पर बकाया फाइलों के निपटान में जुटे हुए हैं। अधिकारियों का तर्क है कि जब निगम आयुक्त ने अधिकारियों में शक्तियों का विकेंद्रीकरण किया था तो नई व विभाजन की संपत्ति कर करने वाले कर्मचारी से उसकी यूजर आईडी और पासवर्ड ले लिया गया था। अधिकारी किसी नए कर्मचारी को ये काम सौंपना चाहते थे। इसी बीच निगम में नई और विभाजन की संपत्तिकर आईडी बनवाने के आवेदन बढ़ने लगे। जिसे देखते हुए अधिकारियों ने फिर से उक्त कर्मचारी को ये काम सौंप दिया है।
किसी भी एक संपत्ति को अगर दो से तीन भागाें में विभाजित कर इसकी खरीद फरोख्त करनी है तो इसके लिए उनकी संपत्तिकर आईडी अलग बनती हैं। जिसे विभाजन की आईडी कहा जाता है। ये योजना पिछले साल ही शुरू हुई है। इसके लिए पूरी संपत्ति का विकास शुल्क और संपत्तिकर कर जमा करवाने के बाद विभाजन की फाइल लगानी पड़ती है। ये चरण लेवल वन का होता है। इसमें सभी दस्तोवजों की वेरिफिकेशन के बाद फाइल डीटीपी ब्रांच में जाती है जहां से मंजूरी मिलने के बाद विभाजन की संपत्तिकर आईडी तैयार हो जाती है। ये प्रक्रिया उन संपत्तियों पर भी लागू होती है जिनकी संपत्ति को निगम क्षेत्र में है लेकिन उनकी आईडी नहीं है।
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नगर निगम के क्षेत्रीय कराधान अधिकारी कुलदीप राणा ने बताया कि नई और विभाजन की संपत्तिकर आईडी बनाने का काम चालू हो गया है। शहर के लोगों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
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मंगलवार को निगम कर्मचारी लेवल वन पर बकाया फाइलों के निपटान में जुटे हुए हैं। अधिकारियों का तर्क है कि जब निगम आयुक्त ने अधिकारियों में शक्तियों का विकेंद्रीकरण किया था तो नई व विभाजन की संपत्ति कर करने वाले कर्मचारी से उसकी यूजर आईडी और पासवर्ड ले लिया गया था। अधिकारी किसी नए कर्मचारी को ये काम सौंपना चाहते थे। इसी बीच निगम में नई और विभाजन की संपत्तिकर आईडी बनवाने के आवेदन बढ़ने लगे। जिसे देखते हुए अधिकारियों ने फिर से उक्त कर्मचारी को ये काम सौंप दिया है।
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किसी भी एक संपत्ति को अगर दो से तीन भागाें में विभाजित कर इसकी खरीद फरोख्त करनी है तो इसके लिए उनकी संपत्तिकर आईडी अलग बनती हैं। जिसे विभाजन की आईडी कहा जाता है। ये योजना पिछले साल ही शुरू हुई है। इसके लिए पूरी संपत्ति का विकास शुल्क और संपत्तिकर कर जमा करवाने के बाद विभाजन की फाइल लगानी पड़ती है। ये चरण लेवल वन का होता है। इसमें सभी दस्तोवजों की वेरिफिकेशन के बाद फाइल डीटीपी ब्रांच में जाती है जहां से मंजूरी मिलने के बाद विभाजन की संपत्तिकर आईडी तैयार हो जाती है। ये प्रक्रिया उन संपत्तियों पर भी लागू होती है जिनकी संपत्ति को निगम क्षेत्र में है लेकिन उनकी आईडी नहीं है।
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नगर निगम के क्षेत्रीय कराधान अधिकारी कुलदीप राणा ने बताया कि नई और विभाजन की संपत्तिकर आईडी बनाने का काम चालू हो गया है। शहर के लोगों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा।