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Panipat News: मौसम ने फिर ली करवट, दो मार्च से बूंदाबांदी के आसार
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पानीपत। मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। आसमान में दिनभर हल्के बादल छाए रहे। मौसम विशेषज्ञों ने दो व तीन मार्च को बूंदाबांदी की संभावना जताई है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को गेहूं की फसल में एक सप्ताह तक सिंचाई न करने की सलाह दी है।
रविवार सुबह ही मौसम ने एक साथ करवट ली। सुबह कुछ देर घनी धूप निकलने के बाद आसमान में बादल छा गए। धूप पूरा दिन बादलों में लुका छीपी करती रही। अधिकतम तापमान 23 और न्यूनतम तापमान नौ डिग्री रहा। मौसम विशेषज्ञों ने बताया कि अगले कई दिन तक हल्के बादल आसमान में छाए रहेंगे। दो व तीन मार्च को जिले में मध्यम से तेज बारिश होने की संभावना है। अधिकतम तापमान कम नहीं होगा। न्यूनतम तापमान कुछ कम हो सकता है। अगले दस दिन तक आसमान में बादल छाए रहने का अनुमान है।
बॉक्स
गेहूं के लिए चिंता में किसान
मौसम के बदलने पर किसानों की चिंता बढ़ गई है। जिले में 85 हजार हेक्टेयर में गेहूं की फसल है। इस समय फसल पकाई पर चल रही है। ऐसे में बूंदाबांदी या तेज हवा चलने पर फसल गिरने पर उत्पादन को नुकसान हो सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि मौसम बदलने पर किसानों को गेहूं की सिंचाई को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है। किसानों को अभी पानी नहीं देना चाहिए। वे जहां तक हैं एक सप्ताह सिंचाई न करें। इसके बाद मौसम के अनुसार फसल की सिंचाई की जा सकती है।
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रविवार सुबह ही मौसम ने एक साथ करवट ली। सुबह कुछ देर घनी धूप निकलने के बाद आसमान में बादल छा गए। धूप पूरा दिन बादलों में लुका छीपी करती रही। अधिकतम तापमान 23 और न्यूनतम तापमान नौ डिग्री रहा। मौसम विशेषज्ञों ने बताया कि अगले कई दिन तक हल्के बादल आसमान में छाए रहेंगे। दो व तीन मार्च को जिले में मध्यम से तेज बारिश होने की संभावना है। अधिकतम तापमान कम नहीं होगा। न्यूनतम तापमान कुछ कम हो सकता है। अगले दस दिन तक आसमान में बादल छाए रहने का अनुमान है।
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गेहूं के लिए चिंता में किसान
मौसम के बदलने पर किसानों की चिंता बढ़ गई है। जिले में 85 हजार हेक्टेयर में गेहूं की फसल है। इस समय फसल पकाई पर चल रही है। ऐसे में बूंदाबांदी या तेज हवा चलने पर फसल गिरने पर उत्पादन को नुकसान हो सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि मौसम बदलने पर किसानों को गेहूं की सिंचाई को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है। किसानों को अभी पानी नहीं देना चाहिए। वे जहां तक हैं एक सप्ताह सिंचाई न करें। इसके बाद मौसम के अनुसार फसल की सिंचाई की जा सकती है।
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