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गिरती बर्फ में घंटों बॉर्डर पर किया इंतजार
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पानीपत। यूक्रेन से लौटा छात्र अमन।
- फोटो : Panipat
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पानीपत। आसमान से गिरती बर्फ में 31 घंटे तक पानीपत निवासी अमन शर्मा ने रोमानिया बॉर्डर पर भारत आने के लिए इंतजार किया। इसके बाद वह घर लौट सके हैं। उनके आने से घर में खुशी का माहौल है। इससे पहले बीते पांच दिन से माता-पिता की आंखों से नींद गायब थी।
अमन ने बताया कि यूक्रेन में स्थिति काफी खराब है। वह आइवानो फ्रैंकिस्क में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे थे। वह रोमानिया के बॉर्डर के पास थे, जहां से अपनी जान बचाकर भारत लौट पाए हैं। रोमानिया बॉर्डर तक आना मुश्किल नहीं रहा लेकिन बॉर्डर पार करने में परेशानी पेश आई। लाखों की संख्या में लोग बॉर्डर पार करने के इंतजार में खड़े थे। वहां लगातार बर्फबारी हो रही थी। न तो खाने को खाना मिल रहा था न ही जैकेट थी। जो विद्यार्थी बॉर्डर पर मौजूद थे वहीं एक-दूसरे से काम आ रहे थे।
टीवी और सोशल मीडिया पर भी नहीं देख सके तबाही का मंजर
अमन के पिता सुरेंद्र ने बताया कि उनकी 58 वर्ष की जिंदगी में ये पांच दिन सबसे कठिन रहे। वह इस बीच सो तक नहीं सके। सुरेंद्र ने बताया कि उन्होंने पहले दिन टीवी पर युद्ध का मंजर देखा, जिसने झकझोर कर रख दिया। फिर तो न टीवी देख सके न ही सोशल मीडिया।
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कीव से जान बचाकर हंगरी बॉर्डर से भारत पहुंचे अनुज
कीव से जान बचाकर पानीपत के अनुज वीरवार को अपने घर पहुंच गए। अनुज यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे है। कीव से हंगरी बॉडर पहुंचने में अनुज को कामयाबी मिली, जहां से वह भारत आ सके।
अनुज ने बताया कि कीव में लगातार बमबारी हो रही है, सायरन बज रहे हैं। सभी एटीएम खाली हो चुके हैं, जो स्टोर अपने स्टॉक के लिए जाने जाते थे, वे भी खाली हो गए हैं। अब राशन नहीं आ रहा है। सबसे ज्यादा खाने की दिक्कत हो रही है। उन्होंने कहा कि एक पल तो लग रहा था कि वह अपने घर पहुंच नहीं पाएंगे लेकिन भारतीय दूतावास ने मदद से भारत लौट सके । अनुज के पिता का कहना है कि उनके बेटे का दूसरा जन्म हुआ है। मां सुशीला ने बेटे के आने के बाद राहत की सांस ली है।
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अमन ने बताया कि यूक्रेन में स्थिति काफी खराब है। वह आइवानो फ्रैंकिस्क में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे थे। वह रोमानिया के बॉर्डर के पास थे, जहां से अपनी जान बचाकर भारत लौट पाए हैं। रोमानिया बॉर्डर तक आना मुश्किल नहीं रहा लेकिन बॉर्डर पार करने में परेशानी पेश आई। लाखों की संख्या में लोग बॉर्डर पार करने के इंतजार में खड़े थे। वहां लगातार बर्फबारी हो रही थी। न तो खाने को खाना मिल रहा था न ही जैकेट थी। जो विद्यार्थी बॉर्डर पर मौजूद थे वहीं एक-दूसरे से काम आ रहे थे।
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टीवी और सोशल मीडिया पर भी नहीं देख सके तबाही का मंजर
अमन के पिता सुरेंद्र ने बताया कि उनकी 58 वर्ष की जिंदगी में ये पांच दिन सबसे कठिन रहे। वह इस बीच सो तक नहीं सके। सुरेंद्र ने बताया कि उन्होंने पहले दिन टीवी पर युद्ध का मंजर देखा, जिसने झकझोर कर रख दिया। फिर तो न टीवी देख सके न ही सोशल मीडिया।
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कीव से जान बचाकर हंगरी बॉर्डर से भारत पहुंचे अनुज
कीव से जान बचाकर पानीपत के अनुज वीरवार को अपने घर पहुंच गए। अनुज यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे है। कीव से हंगरी बॉडर पहुंचने में अनुज को कामयाबी मिली, जहां से वह भारत आ सके।
अनुज ने बताया कि कीव में लगातार बमबारी हो रही है, सायरन बज रहे हैं। सभी एटीएम खाली हो चुके हैं, जो स्टोर अपने स्टॉक के लिए जाने जाते थे, वे भी खाली हो गए हैं। अब राशन नहीं आ रहा है। सबसे ज्यादा खाने की दिक्कत हो रही है। उन्होंने कहा कि एक पल तो लग रहा था कि वह अपने घर पहुंच नहीं पाएंगे लेकिन भारतीय दूतावास ने मदद से भारत लौट सके । अनुज के पिता का कहना है कि उनके बेटे का दूसरा जन्म हुआ है। मां सुशीला ने बेटे के आने के बाद राहत की सांस ली है।

पानीपत। य्रक्रेन से लौटे छात्र अनुज को लेने एयरपोर्ट पर पहुंचे परिवार के सदस्य।- फोटो : Panipat