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उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही संपन्न हुआ लोक आस्था का महापर्व छठ
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पानीपत। सचमुच! यह आस्था की गर्माहट ही थी कि कार्तिक के भोर में बर्फ की मानिंद ठरते पानी की तासीर गुनगुनी हो चली थी। सूर्योदय की प्रतीक्षा में घुटने तक ठंडे पानी में खड़े होकर छठी मइया का आह्वान कर रहे व्रतियों का उत्साह देखते बन रहा था। इस दौरान उग हे सुरुज देव भइलीं अरघिया क बेर... कांचहिं बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए... आदि छठ गीतों से यमुना और जलाशयों-सरोवरों के घाट भक्तिमय हो गए थे। भगवान भास्कर के उदित होते ही व्रतियों ने जयकारे लगाए और अर्घ्य दिया। इसके साथ ही लोक आस्था के चार दिवसीय अनुष्ठान डाला छठ का समापन हो गया।
लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा को लेकर पूर्वांचलवासी श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। यमुना नदी सहित दिल्ली पैरलल नहर के असंध रोड, जाटल रोड, एनएफएल के घाटों ओर बाबरपुर रजबाहे पर व्रती श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा।
‘बाट जे पूछेला बटोहिया, ई दल कहवां जाए, तूं आन्हर रे बटोहिया ई दल सूरज बाबा के जाए..., कोपि-कोपि बोलेली छठ माता सुनुए सेवक लोग... ले ले अईह हो भईया गेहूं के मोटरिया..., केरवा पे फरेला घवध से ओ पे सुगा मंडराय... जैसे गीत गाते हुए व्रती महिलाओं ने सूर्य के उगने का इंतजार किया। सुबह 6: 32 बजे सूर्य की पहली किरण के साथ ही व्रतियों ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया और पूजा पाठ कर संतान सुख की कामना की। उगते सूरज को अर्घ्य देने के लिए तमाम लोग जलाशयों के किनारे, नदियों के तट पर जमा हुए और परिवार के साथ पूजा की।
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लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा को लेकर पूर्वांचलवासी श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। यमुना नदी सहित दिल्ली पैरलल नहर के असंध रोड, जाटल रोड, एनएफएल के घाटों ओर बाबरपुर रजबाहे पर व्रती श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा।
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‘बाट जे पूछेला बटोहिया, ई दल कहवां जाए, तूं आन्हर रे बटोहिया ई दल सूरज बाबा के जाए..., कोपि-कोपि बोलेली छठ माता सुनुए सेवक लोग... ले ले अईह हो भईया गेहूं के मोटरिया..., केरवा पे फरेला घवध से ओ पे सुगा मंडराय... जैसे गीत गाते हुए व्रती महिलाओं ने सूर्य के उगने का इंतजार किया। सुबह 6: 32 बजे सूर्य की पहली किरण के साथ ही व्रतियों ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया और पूजा पाठ कर संतान सुख की कामना की। उगते सूरज को अर्घ्य देने के लिए तमाम लोग जलाशयों के किनारे, नदियों के तट पर जमा हुए और परिवार के साथ पूजा की।
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