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Panipat News: सामाजिक जीवन के महत्व को चीन, कनाडा, भूटान, बांग्लादेश व पाकिस्तान ने भी जाना, प्रस्तुत किए शोध
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पानीपत। एसडी पीजी कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का रविवार को समापन हो गया। इसमें सामाजिक परिप्रेक्ष्य में हो रहे बदलावों, शिक्षा का भविष्य, सामाजिक मूल्यों, मानवीय मूल्यों की स्थापना में हिंदी की भूमिका, मानविकी और सोशल साइंस में समकालीन रुझान विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे। विशेषज्ञों ने सामाजिक परिप्रेक्ष्य में हो रहे बदलावों पर गहरी चिंता व्यक्त की। दूसरे दिन चीन, कनाडा, भूटान, बांग्लादेश, पाकिस्तान, पंजाब, उत्तराखंड, महाराष्ट्र व हिमाचल प्रदेश के शोधकर्ताओं के शोध प्रस्तुत किए गए।
कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन मुख्य वक्ता एवं मुख्य अतिथि के रूप में विधि विभाग भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय से प्रो. संध्या रोहल पुनिया रहीं। इसके अलावा जनकवि फौजी मेहर चंद पुरस्कार से अलंकृत एवं पूर्व विभागाध्यक्ष हिंदी विभाग डॉ. बाल किशन शर्मा व गीता इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ करहंस की निदेशक डॉ. प्रेरणा डावर ने भी संबोधित किया।
प्रो. पुनिया ने कहा कि एक अच्छे प्राध्यापक का सबसे बड़ा गुण है कि वह खुद को हमेशा एक विद्यार्थी और सीखने वाला माने। सामाजिक विज्ञान के माध्यम से सामाजिक परिप्रेक्ष्य में हो रहे बदलावों को नियंत्रित किया जाता है। डॉ. बाल किशन शर्मा ने मानवीय मूल्यों की स्थापना में हिंदी की भूमिका’ विषय पर कहा कि इंसान जीवन में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के उद्देश्यों को लेकर पैदा होता है और हमें इन सभी भूमिकाओं को ईमानदारी के साथ निभाना चाहिए।
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कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने कहा कि ‘मानविकी और सामाजिक विज्ञान में समकालीन रुझान’ विषय के कितने ही आयामों को इस कांन्फ्रेंस में उठाया गया और कई नए विचार आम आदमी से लेकर नीति निर्धारकों के लिए सुझाए गए। यही इस कॉन्फ्रेंस की सार्थकता रही। काॅन्फ्रेंस ने रिसर्च स्कॉलर्स को सोचने और शोध करने के लिए विचार दिए हैं। कॉन्फ्रेंस में मुख्य रूप से प्रो. अन्नू आहूजा, डॉ. एसके वर्मा, डॉ. राकेश गर्ग, डॉ. सुशीला बेनीवाल, डॉ. नवीन गोयल, प्रो. प्रवीण खेरडे, प्रो. पवन सिंगला, प्रो. गीता परुथी व डॉ. संगीता गुप्ता मौजूद रहीं।
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कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन मुख्य वक्ता एवं मुख्य अतिथि के रूप में विधि विभाग भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय से प्रो. संध्या रोहल पुनिया रहीं। इसके अलावा जनकवि फौजी मेहर चंद पुरस्कार से अलंकृत एवं पूर्व विभागाध्यक्ष हिंदी विभाग डॉ. बाल किशन शर्मा व गीता इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ करहंस की निदेशक डॉ. प्रेरणा डावर ने भी संबोधित किया।
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प्रो. पुनिया ने कहा कि एक अच्छे प्राध्यापक का सबसे बड़ा गुण है कि वह खुद को हमेशा एक विद्यार्थी और सीखने वाला माने। सामाजिक विज्ञान के माध्यम से सामाजिक परिप्रेक्ष्य में हो रहे बदलावों को नियंत्रित किया जाता है। डॉ. बाल किशन शर्मा ने मानवीय मूल्यों की स्थापना में हिंदी की भूमिका’ विषय पर कहा कि इंसान जीवन में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के उद्देश्यों को लेकर पैदा होता है और हमें इन सभी भूमिकाओं को ईमानदारी के साथ निभाना चाहिए।
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कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने कहा कि ‘मानविकी और सामाजिक विज्ञान में समकालीन रुझान’ विषय के कितने ही आयामों को इस कांन्फ्रेंस में उठाया गया और कई नए विचार आम आदमी से लेकर नीति निर्धारकों के लिए सुझाए गए। यही इस कॉन्फ्रेंस की सार्थकता रही। काॅन्फ्रेंस ने रिसर्च स्कॉलर्स को सोचने और शोध करने के लिए विचार दिए हैं। कॉन्फ्रेंस में मुख्य रूप से प्रो. अन्नू आहूजा, डॉ. एसके वर्मा, डॉ. राकेश गर्ग, डॉ. सुशीला बेनीवाल, डॉ. नवीन गोयल, प्रो. प्रवीण खेरडे, प्रो. पवन सिंगला, प्रो. गीता परुथी व डॉ. संगीता गुप्ता मौजूद रहीं।