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ट्रेनों पर पत्थर फेंकना बन सकता है जानलेवा : नूर सिंह
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- गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रही आरपीएफ की टीम
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। ट्रेनों पर पत्थर फेंकने की घटनाएं आरपीएफ के लिए चिंता का विषय बन चुकी हैं। जहां अराजक तत्व ट्रेनों पर पत्थर फेंककर यात्रियों की जान को खतरे में डाल सकते हैं। वहीं बच्चों और युवाओं द्वारा की जा रही यह शरारत किसी बड़ी दुर्घटना को जन्म दे सकती है। इसी सिलसिले में आरपीएफ ने जिले में एक जनजागरूकता अभियान चलाया है। इस अभियान के अंतर्गत आरपीएफ की टीम गांव-गांव जाकर लोगों को ट्रेनों पर पत्थर न फेंकने के लिए जागरूक कर रही हैं।
आमजन को यह भी बताया जा रहा है कि अगर कोई ऐसी घटना देखता है तो वह 182 या 1512 हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दे सकता है। आरपीएफ एएसआई नूर सिंह ने बताया कि दो महीने पहले वंदे भारत एक्सप्रेस पर पत्थर फेंकने का मामला सामने आया था। जिसमें दो नाबालिग बच्चों की पहचान हुई थी। हालांकि उस घटना में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ लेकिन यह घटनाएं कई बार जानलेवा साबित हो सकती हैं। चलती ट्रेन पर पत्थर लगने से खिड़कियां टूट सकती हैं और उसमें बैठे यात्रियों को गंभीर चोट आ सकती है। कुछ मामलों में यात्रियों की आंखों, सिर या शरीर के अन्य हिस्सों में गहरी चोट लग चुकी है। इसके चलते न सिर्फ यात्रियों की जान को खतरा होता है बल्कि रेलवे संपत्ति को भी नुकसान पहुंचता है। आरपीएफ थाना प्रभारी दिनेश कुमार मीना ने बताया कि ट्रेनों की सुरक्षा सिर्फ आरपीएफ या रेलवे की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि यह हम सभी नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। ट्रेनों पर पत्थर फेंकने की घटनाएं आरपीएफ के लिए चिंता का विषय बन चुकी हैं। जहां अराजक तत्व ट्रेनों पर पत्थर फेंककर यात्रियों की जान को खतरे में डाल सकते हैं। वहीं बच्चों और युवाओं द्वारा की जा रही यह शरारत किसी बड़ी दुर्घटना को जन्म दे सकती है। इसी सिलसिले में आरपीएफ ने जिले में एक जनजागरूकता अभियान चलाया है। इस अभियान के अंतर्गत आरपीएफ की टीम गांव-गांव जाकर लोगों को ट्रेनों पर पत्थर न फेंकने के लिए जागरूक कर रही हैं।
आमजन को यह भी बताया जा रहा है कि अगर कोई ऐसी घटना देखता है तो वह 182 या 1512 हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दे सकता है। आरपीएफ एएसआई नूर सिंह ने बताया कि दो महीने पहले वंदे भारत एक्सप्रेस पर पत्थर फेंकने का मामला सामने आया था। जिसमें दो नाबालिग बच्चों की पहचान हुई थी। हालांकि उस घटना में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ लेकिन यह घटनाएं कई बार जानलेवा साबित हो सकती हैं। चलती ट्रेन पर पत्थर लगने से खिड़कियां टूट सकती हैं और उसमें बैठे यात्रियों को गंभीर चोट आ सकती है। कुछ मामलों में यात्रियों की आंखों, सिर या शरीर के अन्य हिस्सों में गहरी चोट लग चुकी है। इसके चलते न सिर्फ यात्रियों की जान को खतरा होता है बल्कि रेलवे संपत्ति को भी नुकसान पहुंचता है। आरपीएफ थाना प्रभारी दिनेश कुमार मीना ने बताया कि ट्रेनों की सुरक्षा सिर्फ आरपीएफ या रेलवे की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि यह हम सभी नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
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