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नहीं थम रही पराली की आग:
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पराली में लगी आग।
पानीपत। सरकार और प्रशासन की सख्ती के बाद भी जिले के खेतों में पराली में आग लगाने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। अभी भी आए दिन कहीं न कहीं खेतों से जलती पराली का धुआं उठता दिखाई दे ही जाता है। कृषि विभाग के सामने पराली में आग लगाए जाने के 31 मामले सामने आए हैं। इनकी धरातल पर वेरिफिकेशन की तो इसमें से 18 मामले सही पाए गए। अन्य 13 मामले कबाड़, फसल अवशेष या गैर कृषि योग्य भूमि में लगी आग के मिले हैं।
जिन 18 मामलों में पराली जलाना पाया गया विभाग ने उन किसानों के खिलाफ पुलिस को शिकायत देकर एफआईआर दर्ज करवा दी है। वहीं, ढाई हजार प्रति एकड़ के हिसाब से जुर्माना भी लगाया गया है।
इसके अलावा ऐसे किसानों को अब सरकार की फसल योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाएगा। अधिकारियों का कहना है कि जो भी किसान पराली में आग लगाएगा उनकी फसल एमएसपी पर नहीं बिकेगी। आग लगाने वाले पर जुर्माना भी होगा और कार्रवाई अलग से होगी। अगर किसान पराली का प्रबंधन करेगा तो उसे एक हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलेगी।
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कृषि उपनिदेशक डॉ. आत्मा राम ने बताया कि जिले में 55 किसान बेलर से पराली की बेल बना रहे हैं। ऐसे किसानों को वे बेलर उपलब्ध करवाते हैं। 1500 किसानों को सुपर सीडर और एक हजार किसानों को रोटावेटर सब्सिडी के तौर पर दी गई है। पराली को जमीन में मिलाने की कई फायदे हैं। जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ेगी। कृषि उपकरणों का उपयोग कर पराली को जमीन में मिलाने से जमीन के ऑग्रेनिक कार्बनिक पदार्थ बढ़ेंगे। इससे किसान की खेत में लागत कम आएगी और उत्पादन ज्यादा बढ़ेगा। उन्होंने जिले भर के किसानों से अपील की है कि वे पराली न जलाएं और इसका प्रबंधन करें।
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जिन 18 मामलों में पराली जलाना पाया गया विभाग ने उन किसानों के खिलाफ पुलिस को शिकायत देकर एफआईआर दर्ज करवा दी है। वहीं, ढाई हजार प्रति एकड़ के हिसाब से जुर्माना भी लगाया गया है।
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इसके अलावा ऐसे किसानों को अब सरकार की फसल योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाएगा। अधिकारियों का कहना है कि जो भी किसान पराली में आग लगाएगा उनकी फसल एमएसपी पर नहीं बिकेगी। आग लगाने वाले पर जुर्माना भी होगा और कार्रवाई अलग से होगी। अगर किसान पराली का प्रबंधन करेगा तो उसे एक हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलेगी।
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कृषि उपनिदेशक डॉ. आत्मा राम ने बताया कि जिले में 55 किसान बेलर से पराली की बेल बना रहे हैं। ऐसे किसानों को वे बेलर उपलब्ध करवाते हैं। 1500 किसानों को सुपर सीडर और एक हजार किसानों को रोटावेटर सब्सिडी के तौर पर दी गई है। पराली को जमीन में मिलाने की कई फायदे हैं। जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ेगी। कृषि उपकरणों का उपयोग कर पराली को जमीन में मिलाने से जमीन के ऑग्रेनिक कार्बनिक पदार्थ बढ़ेंगे। इससे किसान की खेत में लागत कम आएगी और उत्पादन ज्यादा बढ़ेगा। उन्होंने जिले भर के किसानों से अपील की है कि वे पराली न जलाएं और इसका प्रबंधन करें।