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असहायों की बने आवाज हक के लिए संघर्ष जारी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 26 Jan 2022 01:12 AM IST
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The struggle continues for the right to be the voice of the helpless
पानीपत। पीपी कपूर। - फोटो : Panipat
पानीपत। गरीबों, मजलूमों और जरूरतमंदों की आवाज बनकर गणतंत्र के प्रहरी के तौर पर जिले के कई समाजसेवी देश की सेवा कर रहे हैं। ये उनके लिए लड़ते हैं, जिनकी कोई नहीं सुनता। लोगों को न्याय दिलाने में इनकी उम्र बीत गई। सैकड़ों चुनौतियां और बधाएं भी इनके इरादे तोड़ नहीं सकीं।
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बंधुआ बनाए गए मजदूरों की उठाते हैं आवाज
समालखा के रहने वाले 60 वर्षीय आर्किटेक्ट पीपी कपूर 20 वर्ष की उम्र से ही जनसेवा से जुड़े हैं। पिछले 40 वर्षों से वह गरीब और मजलूमों की आवाज बनते आ रहे हैं। वह हर वर्ष 150 से 200 बंधुुआ मजदूरों को मुक्त करवाते हैं। जिला प्रशासन की मदद से वह ऐसे मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाने में मदद भी करते हैं। इतना ही नहीं 13 वर्ष से वे भ्रष्टाचार के खिलाफ भी आवाज बुलंद किए हुए हैं।
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अंबाला के मनरेगा घोटाले को उजागर करने के साथ ही पानीपत के सेक्टर-25 में श्रमिकों के करोड़ों रुपये के प्लाटों के गबन भी सामने ला चुके हैं। समालखा की 25 कॉलोनियों को नियमित कराकर श्रमिकों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसके साथ ही कार्यशाला में लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करते हैं।
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परिवार, नौकरी त्याग महाबीर बने किसान-मजदूरों के साथी
न्यू आरके पुरम कॉलोनी के रहने वाले 57 वर्षीय महाबीर शर्मा वर्ष 1990 से किसान और मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ते आ रहे हैं। साथ ही 25 वर्षों से शुगर मिल से अवैध छंटनी किए गए 78 कर्मचारियों के लिए संघर्षरत हैं। इनकी लड़ाई को वह हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक ले जा चुके हैं। लंबे संघर्ष में इन्हें वह परिवार, बच्चे, नौकरी तक का त्याग करना पड़ा पर इनके इरादे नहीं डगमगाए। अब इन कर्मचारियों में से 35 की मौत हो चुकी है, करीब 36 रिटायर तक हो चुके हैं।
महाबीर शर्मा अब इन रिटायर कर्मचारियों और मृतकों के परिवारों को उनका हक दिलवाने का संघर्ष कर रहे हैं। इसके साथ ही शुगर मिल से शराब, शीरा, पेट्रोल पंप के अलावा ऍथेनाल में गोलमाल को सामने लाने में भी आवाज बुलंद की। संघर्ष के लिए इन्होंने अपनी नौकरी तक छोड़ दी। अब पेट पालने के लिए कोरियर का काम करते हैं।
सात वर्ष से लड़ रहीं महिलाओं, नाबालिगों, बच्चों की लड़ाई
सेक्टर 13-17 निवासी सविता आर्या ने भी समाजसेवा को ही अपना हमसफर बना लिया है। सात वर्ष से सविता 500 से भी ज्यादा महिलाओं के टूटते घरों को बचा चुकी हैं। इसके अलावा 150 से भी ज्यादा महिला उत्पीड़न के मामलों में महिलाओं को पुलिस, प्रशासन की मदद से इंसाफ दिला चुकी हैं। करीब 28 राह भटके नाबालिग बच्चों को घर पहुंचा चुकी हैं। कई नवजातों के लालन-पालन से लेकर आश्रय देने के लिए संघर्ष कर चुकी हैं।

यहां तक कि तीन मामलों में जन्म के बाद फेंके गए नवजात बच्चों के मां-बाप को ढूंढ चुकी हैं। दंपतियों के बीच झगड़ा होने पर तलाक तक की नौबत आने वाले परिवारों को बचाने काम करती हैं। उनका कहना है कि उनके जीवन का उद्देश्य अब समाजसेवा बन चुका है। पूरी जिंदगी महिलाओं, बच्चों और नवजातों के हित में करने के नाम कर दी है।

पानीपत।  महावीर शर्मा।

पानीपत। महावीर शर्मा।- फोटो : Panipat

पानीपत।  सविता आर्य।

पानीपत। सविता आर्य।- फोटो : Panipat

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