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Panipat News: खाकी में नशे की गंध, दो प्रभारी समेत नप चुका पूरा थाना
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पानीपत। पुलिस नशा तस्करी को रोकने के लिए बड़े स्तर पर अभियान तो चला रही है। बावजूद इसके नशा और इसका धंधा लगातार फल फूल रहा है। तस्कर नशा की सप्लाई करते पकड़े जाने पर पुलिस के साथ भी सौदा करने से पीछे नहीं हटते। पुलिस की भी सौदा करने की कहानी कोई नई नहीं है। जिले में इससे पहले भी कई बार खाकी पर सवाल उठे चुके हैं। नौ साल पहले भूखी से भरा एक पूरा ट्रक गायब कर दिया था। तत्कालीन एसपी ने उस समय सीआईए का पूरा थाना बदल दिया था और चार पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज किया था। छह सात साल पहले थाना मतलौडा के प्रभारी नशे की मात्रा कम दिखाने पर फंस गए थे। उनको सस्पेंड कर दिया था और मुकदमा भी दर्ज कर लिया था।
जिले में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान से नशा की सप्लाई आती है। तस्कर पुलिस के पकड़े जाने के डर से अलग-अलग तरीके से सप्लाई करते हैं। जीटी रोड से ट्रक व दूसरे वाहनों में आसानी से सीमा पार कर जाते हैं। जिले में भी काफी मात्रा में नशे की खपत हो रही है। शहर की कॉलोनियों के अलावा कई गांवों में नशा सरेआम बिक रहा है। कई जगह तो पुलिस से बेखौफ होकर नशा बेच रहे हैं।
बॉक्स
नशे की मात्रा दिखाना भी बड़ा खेल
पुलिस नशा तस्करों को छोड़ने के अलावा इसमें मात्रा भी कम दिखा देती है। जिससे सजा भी कम हो पाती है। यही काम सीआईए-थ्री के प्रभारी समेत पांचों पुलिसकर्मियों ने मई महीने में रोहतक के चिड़ी निवासी सुमित उर्फ मोनू और रविंद्र के मामले में किया। जानकारों का कहना है कि उनके पास ढाई किलोग्राम अफीम थी। पुलिस टीम ने 30 लाख रुपये में सौदा कर रविंद्र को छोड़ दिया और सुमित को गिरफ्तार कर उसके पास एक किलो 20 ग्राम अफीम बरामद दिखाई। बाकी अफीम खुर्दबुर्द कर दी। इसमें उस समय पुलिस के पास 22 लाख रुपये आ चुके थे। आठ लाख रुपये आने बाकी थे। पुलिस बाद में जांच में रविंद्र को भी गिरफ्तार कर लिया गया था।
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ये दो मामले उठा रहे सवाल
मामला नंबर-एक
सीआइए ने ट्रक कर दिया था गायब
अक्टूबर 2015 में तत्कालीन एसपी ने सीआइए के पूरे थाने को बदल दिया था। इसमें चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कर लिया था। उनको बाद में गिरफ्तार किया गया। मामले के अनुसार सीआइए की टीम ने समालखा के बसेड़ा गांव में भूखी से भरे दो ट्रक पकड़े थे। पुलिस टीम ने लाखों रुपये की सेटिंग कर एक ट्रक को छोड़ दिया। पुलिस अधीक्षक के पास मामला पहुंचा तो सारा खेल खुल गया। जिसमें एक डीएसपी पर भी सवाल उठे थे। यह मामला उस समय का सबसे बड़ा और चर्चित हुआ था। पुलिस ने बाद में पंजाब के तस्कर को गिरफ्तार किया था।
मामला नंबर-दो
प्रभारी इंस्पेक्टर ने लाखों में किया था सौदा
मतलौडा थाना के तत्कालीन प्रभारी इंंस्पेक्टर राजेंद्र ने नशा तस्कर से लाखों में सौदा किया था। आरोप थे कि उन्होंने नारा गांव निवासी एक आरोपी से लाखों रुपये लेकर चरस की मात्रा कम दिखाई थी। जबकि उससे करीब पौना किलो चरस बरामद की थी। यह मामला भी तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के संज्ञान में आया था। उन्होंने थाना प्रभारी राजेंद्र को सस्पेंड कर दिया था और मुकदमा दर्ज कर उनको गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में भी पुलिस की पूरी किरकिरी हुई थी।
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जिले में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान से नशा की सप्लाई आती है। तस्कर पुलिस के पकड़े जाने के डर से अलग-अलग तरीके से सप्लाई करते हैं। जीटी रोड से ट्रक व दूसरे वाहनों में आसानी से सीमा पार कर जाते हैं। जिले में भी काफी मात्रा में नशे की खपत हो रही है। शहर की कॉलोनियों के अलावा कई गांवों में नशा सरेआम बिक रहा है। कई जगह तो पुलिस से बेखौफ होकर नशा बेच रहे हैं।
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नशे की मात्रा दिखाना भी बड़ा खेल
पुलिस नशा तस्करों को छोड़ने के अलावा इसमें मात्रा भी कम दिखा देती है। जिससे सजा भी कम हो पाती है। यही काम सीआईए-थ्री के प्रभारी समेत पांचों पुलिसकर्मियों ने मई महीने में रोहतक के चिड़ी निवासी सुमित उर्फ मोनू और रविंद्र के मामले में किया। जानकारों का कहना है कि उनके पास ढाई किलोग्राम अफीम थी। पुलिस टीम ने 30 लाख रुपये में सौदा कर रविंद्र को छोड़ दिया और सुमित को गिरफ्तार कर उसके पास एक किलो 20 ग्राम अफीम बरामद दिखाई। बाकी अफीम खुर्दबुर्द कर दी। इसमें उस समय पुलिस के पास 22 लाख रुपये आ चुके थे। आठ लाख रुपये आने बाकी थे। पुलिस बाद में जांच में रविंद्र को भी गिरफ्तार कर लिया गया था।
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अक्टूबर 2015 में तत्कालीन एसपी ने सीआइए के पूरे थाने को बदल दिया था। इसमें चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कर लिया था। उनको बाद में गिरफ्तार किया गया। मामले के अनुसार सीआइए की टीम ने समालखा के बसेड़ा गांव में भूखी से भरे दो ट्रक पकड़े थे। पुलिस टीम ने लाखों रुपये की सेटिंग कर एक ट्रक को छोड़ दिया। पुलिस अधीक्षक के पास मामला पहुंचा तो सारा खेल खुल गया। जिसमें एक डीएसपी पर भी सवाल उठे थे। यह मामला उस समय का सबसे बड़ा और चर्चित हुआ था। पुलिस ने बाद में पंजाब के तस्कर को गिरफ्तार किया था।
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मतलौडा थाना के तत्कालीन प्रभारी इंंस्पेक्टर राजेंद्र ने नशा तस्कर से लाखों में सौदा किया था। आरोप थे कि उन्होंने नारा गांव निवासी एक आरोपी से लाखों रुपये लेकर चरस की मात्रा कम दिखाई थी। जबकि उससे करीब पौना किलो चरस बरामद की थी। यह मामला भी तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के संज्ञान में आया था। उन्होंने थाना प्रभारी राजेंद्र को सस्पेंड कर दिया था और मुकदमा दर्ज कर उनको गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में भी पुलिस की पूरी किरकिरी हुई थी।