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बिना फिजिशियन के तीसरी लहर से निपटना चुनौती
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पानीपत। जिले में ओमिक्रॉन का खतरा बढ़ गया है। रिपोर्ट में ओमिक्रॉन की पुष्टि के बाद दोनों केस फिलहाल निगेटिव हैं लेकिन अब अमेरिका से 20 दिसंबर को लौटा व्यक्ति कोरोना संक्रमित पाया गया है। अब जीनो सिक्वेंसिंग जांच के लिए सैंपल भेजा गया है। ऐसे में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका बढ़ रही है। इन हालातों में डॉक्टरों की कमी बड़ी मुसीबत बन सकती है।
सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में पिछले चार साल से कोई फिजिशयन नहीं है। जिले के पांच लाख बच्चों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी भी महज दो शिशु रोग विशेषज्ञों पर ही है। किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं है। सिविल अस्पताल में सिविल सर्जन, पीएमओ व छह डिप्टी सिविल सर्जन समेत 36 डॉक्टर हैं। इनमें से पांच डॉक्टर लीव विदाउट पे चल रहे हैं। महज 22 डॉक्टर ही अस्पताल को संभाल रहे हैं, जबकि स्वीकृत पोस्ट के हिसाब से यहां 55 डॉक्टर होने चाहिए। आंकड़ों के मुताबिक, यहां पर डॉक्टरों के 19 पद खाली पड़े हैं।
सिविल अस्पताल में 55 डॉक्टर चाहिए, उपलब्ध हैं 36
अस्पताल की स्थापना शाखा के मुताबिक, सिविल अस्पताल में मेडिकल आफिसर के 55 पद हैं। इनमें से 36 पद भरे हैं, 19 रिक्त हैं। फिजियोथैरेपिस्ट व डाइटिशियन की दो-दो पोस्ट हैं। फिजियोथैरेपिस्ट व डाइटिशियन एक- एक हैं। दो पोस्ट खाली हैं। इनके अलावा फिजिशियन पोस्ट वर्षों से भरी नहीं गई। दो-तीन बार डेप्यूटेशन पर फिजिशियन बुलाए गए, ड्यूटी के नाम पर खानापूर्ति करते हुए लौट गए। सीनियर मेडिकल ऑफिसर के पांच में से दो पद रिक्त हैं।
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डाइटिशियन इसलिए जरूरी
अस्पताल में डाइटिशियन का होना बहुत जरूरी है, कोरोना काल में और भी आवश्यक है। कोरोना की पहली व दूसरी लहर को देखें तो मरीजों के इलाज के दौरान डाइट पर विशेष ध्यान दिया गया है।आइसोलेशन वार्डों में भी हर मरीज का अलग डाइट चार्ट बनाया गया था।
फिजियोथैरेपिस्ट भी जरूरी
कोरोना से रिकवर लोगों को पोस्ट कोविड सबसे बड़ी समस्या कमजोरी, हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द की रही। अस्पताल में उमंग क्लीनिक खोला गया तो फिजियोथैरेपिस्ट और डाइटीशियन की ड्यूटी विशेष रूप से लगाई गई थी।
तीन बार भेजी फिजिशयन की डिमांड
2017 के जनवरी माह में सिविल अस्पताल के फिजिशयन ने एम्स में ड्यूटी ज्वाइन कर ली थी। उसके बाद से स्वास्थ्य विभाग ने तीन बार फिजिशयन की डिमांड भेजी, लेकिन आज तक ये डिमांड पूरी नहीं हो पाई। फिजिशयन के अभाव में उनके मरीजों को एमबीबीएस डॉक्टरों को ही देखना पड़ता है। अस्पताल के प्रिसिपल मेडिकल ऑफिसर डॉ. संजीव ग्रोवर ने कहा कि मानव संसाधनों की कमी से काम में बाधा आती है। मैं खुद फिजिशियन हूं,परामर्श के लिए 24 घंटे तैयार हूं।
मैन पावर की कमी है, फिर भी पूरी ताकत से करेंगे काम
हमारे पास फिजिशयन व अन्य स्टाफ की कमी है। हम स्टाफ की डिमांड भेज चुके हैं। कोरोना की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए वो तैयार है। मैन पावर बेशक कम है । हम पूरी ताकत से काम करेंगे।
डॉ. जितेंद्र कादियान, सिविल सर्जन
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सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में पिछले चार साल से कोई फिजिशयन नहीं है। जिले के पांच लाख बच्चों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी भी महज दो शिशु रोग विशेषज्ञों पर ही है। किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं है। सिविल अस्पताल में सिविल सर्जन, पीएमओ व छह डिप्टी सिविल सर्जन समेत 36 डॉक्टर हैं। इनमें से पांच डॉक्टर लीव विदाउट पे चल रहे हैं। महज 22 डॉक्टर ही अस्पताल को संभाल रहे हैं, जबकि स्वीकृत पोस्ट के हिसाब से यहां 55 डॉक्टर होने चाहिए। आंकड़ों के मुताबिक, यहां पर डॉक्टरों के 19 पद खाली पड़े हैं।
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सिविल अस्पताल में 55 डॉक्टर चाहिए, उपलब्ध हैं 36
अस्पताल की स्थापना शाखा के मुताबिक, सिविल अस्पताल में मेडिकल आफिसर के 55 पद हैं। इनमें से 36 पद भरे हैं, 19 रिक्त हैं। फिजियोथैरेपिस्ट व डाइटिशियन की दो-दो पोस्ट हैं। फिजियोथैरेपिस्ट व डाइटिशियन एक- एक हैं। दो पोस्ट खाली हैं। इनके अलावा फिजिशियन पोस्ट वर्षों से भरी नहीं गई। दो-तीन बार डेप्यूटेशन पर फिजिशियन बुलाए गए, ड्यूटी के नाम पर खानापूर्ति करते हुए लौट गए। सीनियर मेडिकल ऑफिसर के पांच में से दो पद रिक्त हैं।
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डाइटिशियन इसलिए जरूरी
अस्पताल में डाइटिशियन का होना बहुत जरूरी है, कोरोना काल में और भी आवश्यक है। कोरोना की पहली व दूसरी लहर को देखें तो मरीजों के इलाज के दौरान डाइट पर विशेष ध्यान दिया गया है।आइसोलेशन वार्डों में भी हर मरीज का अलग डाइट चार्ट बनाया गया था।
फिजियोथैरेपिस्ट भी जरूरी
कोरोना से रिकवर लोगों को पोस्ट कोविड सबसे बड़ी समस्या कमजोरी, हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द की रही। अस्पताल में उमंग क्लीनिक खोला गया तो फिजियोथैरेपिस्ट और डाइटीशियन की ड्यूटी विशेष रूप से लगाई गई थी।
तीन बार भेजी फिजिशयन की डिमांड
2017 के जनवरी माह में सिविल अस्पताल के फिजिशयन ने एम्स में ड्यूटी ज्वाइन कर ली थी। उसके बाद से स्वास्थ्य विभाग ने तीन बार फिजिशयन की डिमांड भेजी, लेकिन आज तक ये डिमांड पूरी नहीं हो पाई। फिजिशयन के अभाव में उनके मरीजों को एमबीबीएस डॉक्टरों को ही देखना पड़ता है। अस्पताल के प्रिसिपल मेडिकल ऑफिसर डॉ. संजीव ग्रोवर ने कहा कि मानव संसाधनों की कमी से काम में बाधा आती है। मैं खुद फिजिशियन हूं,परामर्श के लिए 24 घंटे तैयार हूं।
मैन पावर की कमी है, फिर भी पूरी ताकत से करेंगे काम
हमारे पास फिजिशयन व अन्य स्टाफ की कमी है। हम स्टाफ की डिमांड भेज चुके हैं। कोरोना की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए वो तैयार है। मैन पावर बेशक कम है । हम पूरी ताकत से काम करेंगे।
डॉ. जितेंद्र कादियान, सिविल सर्जन