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ऑपरेशन के दौरान महिला के पेट में छोड़ी पट्टी व रुई , डॉक्टर पर केस दर्ज
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पानीपत। सेक्टर-11 स्थित जीसी गुप्ता अस्पताल के डॉक्टर पर ऑपरेशन के दौरान महिला के पेट में रुई और पट्टियां छोड़ने का आरोप लगा है। महिला ने इसी वर्ष जुलाई में ऑपरेशन कराया था। जब महिला को दोबारा पेट में दर्द हुआ तो बरसत रोड स्थित निजी अस्पताल में वीडियोग्राफी के साथ सात मार्च को दोबारा ऑपरेशन कराया। महिला डॉक्टर ने उसके पेट से रुई एवं पट्टी निकाली। इसके बाद इस मामले की शिकायत सिविल सर्जन को दी। सिविल सर्जन ने जांच के लिए कमेटी गठित की। कमेटी ने अपनी जांच में डॉ. जीसी गुप्ता अस्पताल को दोषी माना। पीड़ित परिवार ने सिविल सर्जन की कमेटी की जांच के आधार पर चांदनी बाग थाने में केस दर्ज कराया है।
सिवाह गांव निवासी सुमनलता पत्नी संदीप ने बताया कि 2021 में उसके पेट में गांठ थी। उसे दर्द होता था। इस पर जुलाई में डॉ. जीसी गुप्ता अस्पताल में जांच कराई। वहां बताया गया कि ऑपरेशन करना पड़ेगा। ऑपरेशन के लिए 13 जुलाई 2021 को अस्पताल में भर्ती हो गईं। 15 जुलाई को उनका ऑपरेशन हुआ। 19 जुलाई को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। सुमनलता का आरोप है कि डिस्चार्ज होने के चार-पांच दिन बाद उसे पेट में दोबारा दर्द होने लगा। उन्होंने फिर डॉ. जीसी गुप्ता अस्पताल में दिखाया, जिस पर लिखी गई दवा खाते रहने के लिए कहा गया। फिर भी कोई राहत नहीं मिली। आरोप है कि दोबारा अस्पताल जाने पर उनके साथ अभद्रता की गई। दो-तीन माह तक जब दर्द से राहत नहीं मिली तो एक महिला डॉक्टर से जांच कराई। तब सीटी स्कैन कराने पर पेट में ऑपरेशन के दौरान रुई एवं पट्टियां छूटने का पता चला। इसके बाद बरसत रोड स्थित अस्पताल में ऑपरेशन कराकर रुई और पट्टियां निकलवाई गई। ऑपरेशन की वीडियोग्राफी भी की गई। इसकी शिकायत तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र कादियान को दी। उन्होंने इस मामले में सरकारी एवं एक निजी डॉक्टर की टीम का गठन किया। टीम ने अपनी जांच में डॉ. जीसी गुप्ता अस्पताल पर लगे आरोप सही पाए। पीड़िता ने चांदनी बाग थाने में डॉ. जीसी गुप्ता पर केस दर्ज कराकर उसकी गिरफ्तारी की मांग की है।
इस मामले में डॉ. जीसी गुप्ता का कहना है कि उन्होंने महिला का ऑपरेशन नहीं किया। उनका ऑपरेशन एक दूसरे अस्पताल की महिला डॉक्टर ने उनके अस्पताल में किया था। वह इसके सबूत सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों की कमेटी को दे भी चुके हैं। उसके खिलाफ कुछ डॉक्टर साजिश कर रहे हैं। महिला की स्लिप उनके अस्पताल के नाम पर कटी थी, इसलिए साजिश के तहत उन्हें फंसाया जा रहा है।
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रिपोर्ट दर्ज, जांच शुरू : एसएचओ
सरकारी डॉक्टरों की कमेटी की रिपोर्ट और महिला की शिकायत के आधार पर डॉक्टर के खिलाफ लापरवाही का केस दर्ज किया गया है। अब रिपोर्ट के आधार पर मामले में आगामी कार्रवाई की जाएगी।
- महिपाल सिंह, एसएचओ चांदनी बाग
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सिवाह गांव निवासी सुमनलता पत्नी संदीप ने बताया कि 2021 में उसके पेट में गांठ थी। उसे दर्द होता था। इस पर जुलाई में डॉ. जीसी गुप्ता अस्पताल में जांच कराई। वहां बताया गया कि ऑपरेशन करना पड़ेगा। ऑपरेशन के लिए 13 जुलाई 2021 को अस्पताल में भर्ती हो गईं। 15 जुलाई को उनका ऑपरेशन हुआ। 19 जुलाई को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। सुमनलता का आरोप है कि डिस्चार्ज होने के चार-पांच दिन बाद उसे पेट में दोबारा दर्द होने लगा। उन्होंने फिर डॉ. जीसी गुप्ता अस्पताल में दिखाया, जिस पर लिखी गई दवा खाते रहने के लिए कहा गया। फिर भी कोई राहत नहीं मिली। आरोप है कि दोबारा अस्पताल जाने पर उनके साथ अभद्रता की गई। दो-तीन माह तक जब दर्द से राहत नहीं मिली तो एक महिला डॉक्टर से जांच कराई। तब सीटी स्कैन कराने पर पेट में ऑपरेशन के दौरान रुई एवं पट्टियां छूटने का पता चला। इसके बाद बरसत रोड स्थित अस्पताल में ऑपरेशन कराकर रुई और पट्टियां निकलवाई गई। ऑपरेशन की वीडियोग्राफी भी की गई। इसकी शिकायत तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र कादियान को दी। उन्होंने इस मामले में सरकारी एवं एक निजी डॉक्टर की टीम का गठन किया। टीम ने अपनी जांच में डॉ. जीसी गुप्ता अस्पताल पर लगे आरोप सही पाए। पीड़िता ने चांदनी बाग थाने में डॉ. जीसी गुप्ता पर केस दर्ज कराकर उसकी गिरफ्तारी की मांग की है।
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इस मामले में डॉ. जीसी गुप्ता का कहना है कि उन्होंने महिला का ऑपरेशन नहीं किया। उनका ऑपरेशन एक दूसरे अस्पताल की महिला डॉक्टर ने उनके अस्पताल में किया था। वह इसके सबूत सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों की कमेटी को दे भी चुके हैं। उसके खिलाफ कुछ डॉक्टर साजिश कर रहे हैं। महिला की स्लिप उनके अस्पताल के नाम पर कटी थी, इसलिए साजिश के तहत उन्हें फंसाया जा रहा है।
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रिपोर्ट दर्ज, जांच शुरू : एसएचओ
सरकारी डॉक्टरों की कमेटी की रिपोर्ट और महिला की शिकायत के आधार पर डॉक्टर के खिलाफ लापरवाही का केस दर्ज किया गया है। अब रिपोर्ट के आधार पर मामले में आगामी कार्रवाई की जाएगी।
- महिपाल सिंह, एसएचओ चांदनी बाग