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Panipat News: वित्तीय बजट से भी ज्यादा की लगा दी निविदा, कैसे होंगे पूरे, बना संशय

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 28 Nov 2023 02:03 AM IST
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Tender has been floated for more than the financial budget, how will it be completed
पानीपत। नगर निगम ने चालू वित्तीय वर्ष के विकास कार्याें के लिए निर्धारित बजट से भी कई करोड़ रुपये ज्यादा की निविदा लगा दी, लेकिन अब ये काम पूरे कैसे होंगे, इस पर संशय बना हुआ है। निगम ने शहरी और ग्रामीण विधानसभा एरिया में अब तक करीब 168 करोड़ की निविदा लगाई है। इनमें से अकेले शहरी विधानसभा के टेंडर 70 करोड़ के आसपास हैं, जबकि बाकी के ग्रामीण विधानसभा के हैं। वहीं, निगम ने पहले वित्तीय वर्ष में करीब 59.85 करोड़ का विकास कार्याें का बजट बनाया था, जिसे बाद में बढ़ाकर अधिकारियों ने करीब 135 करोड़ तक भी किया। अब भी मौजूदा निविदा बाद के बजट से करीब 33 करोड़ रुपये के ज्यादा हैं, जबकि हालात ये हैं कि निगम के एमसी फंड में इतनी राशि भी नहीं है।
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शहर विधायक प्रमोद विज ने शनिवार को बताया कि निगम अब तक 168 करोड़ के टेंडर लगा चुका है, जिनमें 70 करोड़ के शहरी विस के टेंडर हैं। उन्होंने निगम के एमसी फंड में भी करीब 60 करोड़ की राशि तक होने की बात कही है। वहीं यह राशि भी लगाए गए टेंडरों से कम है।
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सूत्रों का कहना है कि निगम के पास करीब 30 करोड़ की राशि तो ड्रेन नंबर एक को पक्का करने के लिए आई है, लेकिन यह पैसा इन कामों से परे है। इसके अलावा निगम का एमसी फंड में कम पैसा है। जो करीब 15 से 20 करोड़ के आसपास ही है। ऐसे में निगम की ओर से धड़ाधड़ लगाए जा रहे ये विकास कार्य अधिकारी कैसे पूरे करेंगे, इस पर संशय बना हुआ है।
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नगर निगम के पास स्टेट फाइनेंस कमेटी, सेंटर फाइनेंस कमेटी, निगम की खुद की आय का एमसी फंड और अन्य कई योजनाओं के मदों से पैसा आता है। जो पैसा जिस योजना के तहत आता है, उसे उसी के लिए बुक कर दिया जाता है। वहीं, जो टेंडर लगाए जाते हैं, उनका भी फंड बुक कर दिया जाता है। अब टेंडरों की संख्या ज्यादा है, लेकिन बजट कम है। ऐसे में निगम ठेकेदारों के बकाया का भुगतान तक नहीं कर पा रहा है। जिन ठेेकेदारों की पेमेंट का भुगतान होता है, उनकी राशि में कटौती कर दी जाती है। इसलिए कुछ ठेकेदार वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद भी काम नहीं करना चाहते। यही वजह है कि पहले टेंडर लगा दिए जाते हैं और बाद में अधिकारियों को उन्हें रद्द करना पड़ता है। अब तक सैकड़ों टेंडर लगाने के बाद रद्द भी किए जा रहे हैं।



सीनियर डिप्टी मेयर एवं फाइनेंस कमेटी सदस्य दुष्यंत भट्ट ने बताया कि यह मामला गंभीर है। इस बारे में 28 को नगर निगम सदन की बैठक में अधिकारियों से जवाब तलब किया जाएगा।
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