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Panipat News: कोथली में मिली सुहाली दांतों से कटी न हाथ से टूटी
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पानीपत। तीज महोत्सव में प्रदेशभर से आईं महिलाओं को कोथली दी गई। सरकारी आंकड़ों में 50 हजार महिलाओं के आने का दावा किया है। पहली बार कोथली मिलने की सूचना से उत्साहित महिलाएं इसे देखकर नाखुश हो गईं। महिलाओं को आने से पहले कहा गया कि उन्हें कोथली मिलेगी और घेवर खिलाया जाएगा। वे सपने संजोकर तीज महोत्सव में पहुंचीं। महिलाओं ने प्रशासन के इंतजाम पर सवाल खड़े कर दिए।
हिसार से तीज महोत्सव में पहुंचीं राम भतेरी, राजपति, वनस्पति व मूर्ति समेत उनके समूह को मिली कोथली में दो-दो सुहाली निकली, जो दांतों से नहीं कटी और न हाथों से टूटी। इसके अलावा महिलाओं को सफेद डिब्बे में चार चूड़ियां मिलीं, जिसे देखकर महिलाओं का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। महिलाओं ने सरकार को खरी-खोटी सुनाई। कहा कि चार चूड़ियां देना अपशगुन है, सुहागिनों की चार नहीं बल्कि 12 चूड़ियां होती हैं। इसके अलावा कोथली में सात गुलगुले मिले। महिलाओं ने जब उन्हें खाना चाहा तो उनके अंदर फफूंद लगी थी। महिलाओं ने कोथली की पोटली जमीन पर पटक मारी और कहा कि ऐसी कोथली आज तक हमारा भाई नहीं लेकर आया।
महिलाओं को दी गई कोथली में दो बतासे, दो सुहाली, सात गुलगुले, एक मेहंदी की कीप, चार से पांच चूड़ियां, बिंदी का एक छोटा पत्ता मिला शामिल था। यह कोथली लाल रंग के कपड़े में थी। बताया जा रहा है कोथली में रोहतक, फरीदाबाद व जींद समेत अन्य जिलों का प्रसिद्ध खाने का सामान था।
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हिसार की रहने वाली राजवति ने कहा कि तीज महोत्सव में प्रदेशभर से पहुंची 50 हजार महिलाओं के सामने प्रशासन की तैयारी धरी रह गई। महिलाओं को चाय पकोड़े तो दूर पीने का पानी तक नसीब नहीं हो पाया। उनका गर्मी में हाल बेहाल था।
हिसार के न्यौलीकलां से पहुंचीं रामभतेरी से कोथली पर तंज कसते हुए कहा कि कोथली में दो सुहाली मिली, जो इतनी सख्त थी कि वह न हाथों से टूटी न दांतों से। अब इसे घर लेकर जा रही हूं, हथौड़ी ते तोड़के खाऊंगी।
हिसार की चौकस निवासी वनस्पति ने कहा कि वह सुबह पांच बजे से भूखी प्यासी थी। पानीपत पहुंचने पर कोथली मिली, जिसमें सुहाली को छोड़कर गुलगुलों को खाने का प्रयास किया तो उनके अंदर जाले लगे थे। ये गुलगुले कई दिन पहले के हैं।
मूर्ति ने कहा कि उन्हें कहा गया था कि पानीपत पहुंचने के बाद कोथली में घेवर मिलेगा, लेकिन उन्हें पत्थर जैसी सुहाली और जाले लगे गुलगुले मिले। कोथली में घेवर नहीं मिला। उनका घेवर कौन खा गया? इसमें भ्रष्टाचार तो नहीं हो गया।
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हिसार से तीज महोत्सव में पहुंचीं राम भतेरी, राजपति, वनस्पति व मूर्ति समेत उनके समूह को मिली कोथली में दो-दो सुहाली निकली, जो दांतों से नहीं कटी और न हाथों से टूटी। इसके अलावा महिलाओं को सफेद डिब्बे में चार चूड़ियां मिलीं, जिसे देखकर महिलाओं का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। महिलाओं ने सरकार को खरी-खोटी सुनाई। कहा कि चार चूड़ियां देना अपशगुन है, सुहागिनों की चार नहीं बल्कि 12 चूड़ियां होती हैं। इसके अलावा कोथली में सात गुलगुले मिले। महिलाओं ने जब उन्हें खाना चाहा तो उनके अंदर फफूंद लगी थी। महिलाओं ने कोथली की पोटली जमीन पर पटक मारी और कहा कि ऐसी कोथली आज तक हमारा भाई नहीं लेकर आया।
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महिलाओं को दी गई कोथली में दो बतासे, दो सुहाली, सात गुलगुले, एक मेहंदी की कीप, चार से पांच चूड़ियां, बिंदी का एक छोटा पत्ता मिला शामिल था। यह कोथली लाल रंग के कपड़े में थी। बताया जा रहा है कोथली में रोहतक, फरीदाबाद व जींद समेत अन्य जिलों का प्रसिद्ध खाने का सामान था।
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हिसार की रहने वाली राजवति ने कहा कि तीज महोत्सव में प्रदेशभर से पहुंची 50 हजार महिलाओं के सामने प्रशासन की तैयारी धरी रह गई। महिलाओं को चाय पकोड़े तो दूर पीने का पानी तक नसीब नहीं हो पाया। उनका गर्मी में हाल बेहाल था।
हिसार के न्यौलीकलां से पहुंचीं रामभतेरी से कोथली पर तंज कसते हुए कहा कि कोथली में दो सुहाली मिली, जो इतनी सख्त थी कि वह न हाथों से टूटी न दांतों से। अब इसे घर लेकर जा रही हूं, हथौड़ी ते तोड़के खाऊंगी।
हिसार की चौकस निवासी वनस्पति ने कहा कि वह सुबह पांच बजे से भूखी प्यासी थी। पानीपत पहुंचने पर कोथली मिली, जिसमें सुहाली को छोड़कर गुलगुलों को खाने का प्रयास किया तो उनके अंदर जाले लगे थे। ये गुलगुले कई दिन पहले के हैं।
मूर्ति ने कहा कि उन्हें कहा गया था कि पानीपत पहुंचने के बाद कोथली में घेवर मिलेगा, लेकिन उन्हें पत्थर जैसी सुहाली और जाले लगे गुलगुले मिले। कोथली में घेवर नहीं मिला। उनका घेवर कौन खा गया? इसमें भ्रष्टाचार तो नहीं हो गया।