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Panipat News: हर दूसरे दिन मौत को गले लगा रहे विद्यार्थी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 10 Oct 2023 02:20 AM IST
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Students embracing death every other day
पानीपत। बदलता परिवेश और भागदौड़ भरा जीवन विद्यार्थियों के जीवन पर भारी पड़ रहा है। एक दूसरे से तुलना, पढ़ाई के बाद बेहतर भविष्य की चिंता छात्र-छात्राओं को तनाव में धकेल रही है। यही तनाव उन्हें आत्महत्या जैसे बेहद खतरनाक कदम की ओर खींचकर ले जा रहा है। अभिभावकों के लिए अपने बच्चों को तनाव से बचाना बड़ी चुनौती बन चुकी है। छोटी-छोटी बातों पर छात्र-छात्राएं जान देने से नहीं हिचक रहे। उनमें तनाव के लक्षण तो पहले ही दिख जाते हैं, लेकिन अभिभावक इन्हें पहचान नहीं पाते। प्रदेश में हर दूसरे दिन एक विद्यार्थी आत्महत्या कर रहा है।
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पिछले छह साल में प्रदेश में लगभग 1300 छात्र-छात्राएं आत्महत्या कर चुके हैं। 2017 से 2022 तक छात्र-छात्राओं के आत्महत्या करने के मामले 70 प्रतिशत तक बढ़े हैं। 2020 व 2021 में कोरोना ने भी युवाओं को मानसिक रूप से परेशान कर दिया। इन दो वर्षों में 510 विद्यार्थियों ने मौत को गले लगाया था। इस दौर ने बड़े ही नहीं, पांच से 10 साल तक के बच्चों को भी मानसिक रोगी बना दिया। दूसरी ओर बुजुर्ग बेटे-बहू का साथ छूटने से तनाव में घिर रहे हैं। प्रदेश में महिलाओं के मुकाबले तीन गुना पुरुष आत्महत्या करते हैं। महिलाएं पुरुषों के मुकाबले अधिक सहनशील पाई गई हैं। पानीपत के सिविल अस्पताल में पिछले एक साल में साढ़े तीन हजार से अधिक लोग अपना इलाज कराने पहुंचे हैं। आज देशभर में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मेकिंग मेंटल हेल्थ ए यूनिवर्सल ह्यूमन राइट्स थीम पर मनाया जाएगा।
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2017 में प्रदेश में 3665 लोगों ने आत्महत्या की। इनमें 154 छात्र-छात्राएं थे। 2906 पुरुष व 759 महिलाएं थीं। 2018 में 3387 लोगों ने आत्महत्या की। इनमें 176 छात्र-छात्राएं, 2782 पुरुष, 765 महिलाएं थीं। 2019 में 3547 लोगों ने आत्महत्या की। इनमें 179 छात्र-छात्राएं, 3297 पुरुष व 894 महिलाएं थीं। 2020 में सबसे अधिक 4191 लोगों ने आत्महत्या की। इनमें 257 छात्र-छात्राएं, 3084 पुरुष व 917 महिलाएं थीं। 2021 में 3692 लोगों ने आत्महत्या की। इनमें 255 छात्र-छात्राएं, 2870 पुरुष व 822 महिलाएं थीं। 2022 में भी लगभग 3700 लोग आत्महत्या कर चुके हैं।
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मनोरोग विशेषज्ञ डाॅ. मोना नागपाल ने बताया कि इस समय हर आयु वर्ग के लोग मानसिक विकारों से ग्रस्त हैं। खासकर, विद्यार्थी इससे बहुत अधिक प्रभावित हैं। एक-दूसरे से तुलना, उच्च शिक्षा के बाद रोजगार न मिलना। भविष्य की चिंता या प्रेम में असफल होने पर वे तनाव का शिकार हो रहे हैं। बच्चे मोबाइल का अधिक प्रयोग करने से इस विकार की चपेट में आ रहे हैं। बुजुर्ग अकेलेपन का शिकार होकर इस भयंकर बीमारी में घिर रहे हैं। इसके लक्षण पहले ही दिख जाते हैं। अधिसंख्य लोगों को काउंसिलिंग के जरिए ठीक किया जा सकता है। बीमारी पुरानी होने पर दवा देनी पड़ती है। परिवार में बच्चा, युवा, बुजुर्ग, किसी भी आयु का व्यक्ति है तो उससे बातचीत करते रहें। उसकी बातों को सुनें, ताकि उसे अपनापन लगे। बच्चों पर न ज्यादा गुस्सा करें न ज्यादा प्यार दिखाएं। दखलअंदाजी व बार-बार कमेंट न करें।
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