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पराली अब आय और जैविक खाद का साधन : उपायुक्त
Sun, 05 Oct 2025 12:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Sun, 05 Oct 2025 12:26 AM IST
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पानीपत। हरियाणा सरकार द्वारा पराली प्रबंधन को लेकर व्यापक और प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि पराली अब कोई समस्या नहीं, बल्कि किसानों के लिए जैविक खाद और अतिरिक्त आय का साधन बन सकती है। जिला प्रशासन पानीपत भी इस दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।
यह जानकारी उपायुक्त डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया ने दी है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार किसानों के हित में कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही है। किसानों को पराली प्रबंधन को बारीकी से समझना होगा। फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। जिससे किसान आसानी से मशीनें खरीदकर पराली को खेत में ही सड़ाने की प्रक्रिया अपना सकते हैं। इन-सीटू पराली प्रबंधन को अपनाने वाले किसानों को 1200 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। डीएसआर (डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस) विधि अपनाने वाले किसानों को 4500 रुपये प्रति एकड़ और वैकल्पिक फसलें अपनाने पर आठ हजार रुपये प्रति एकड़ की सहायता राशि दी जाती है। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि जल संरक्षण और मृदा स्वास्थ्य भी बेहतर होगा। ब्यूरो
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यह जानकारी उपायुक्त डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया ने दी है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार किसानों के हित में कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही है। किसानों को पराली प्रबंधन को बारीकी से समझना होगा। फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। जिससे किसान आसानी से मशीनें खरीदकर पराली को खेत में ही सड़ाने की प्रक्रिया अपना सकते हैं। इन-सीटू पराली प्रबंधन को अपनाने वाले किसानों को 1200 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। डीएसआर (डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस) विधि अपनाने वाले किसानों को 4500 रुपये प्रति एकड़ और वैकल्पिक फसलें अपनाने पर आठ हजार रुपये प्रति एकड़ की सहायता राशि दी जाती है। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि जल संरक्षण और मृदा स्वास्थ्य भी बेहतर होगा। ब्यूरो
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