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जरूरतमंदों की मदद के लिए भारत सरकार की डिस्ट्रेस राशन टोकन योजना में भी फर्जीवाड़ा
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कोरोना काल में जरूरतमंद व गरीब लोगों की मदद के लिए भारत सरकार की डिस्ट्रेस टोकन योजना में भी राशन का फर्जीवाड़ा सामने आया है। इसके अतंर्गत जिले में गरीब, जरूरतमंद या जिनके पास राशन कार्ड तक नहीं थे, ऐसे करीब 37 हजार परिवारों के 56 हजार लोगों को निशुल्क राशन बांटा जाना था जबकि विभाग की ओर से सभी 56 हजार लोगों तक राशन पहुंचा ही नहीं। ऑफलाइन रिकार्ड होने की वजह से कागजों में बांटे गए इस राशन का आज तक कोई हिसाब किताब नहीं बन पाया है। आज भी इस बचे हुए स्टॉक का राशन शहर में कई जगहों पर सड़ रहा है, जहां इसे चूहे खराब कर रहे हैं। निगम पार्षद शिव कुमार शर्मा ने इस राशन फर्जीवाड़े को घोटाले का नाम देकर इसका विरोध किया है। उन्होंने विभाग अधिकारियों समेत डिपो होल्डरों पर गरीबों के इस राशन को हड़पने के आरोप लगाए हैं।
मई में 26, जून में 21, जुुलाई में 1222 और अगस्त में 228 को ही मिला राशन
पानीपत खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा मुख्यालय में मई में 36694 परिवारों की सूची भेजी थी, जिसमें योजना के अंतर्गत जिले के 57578 लोगों को मई और जून में इसका लाभ मिलना था, लेकिन मई में केवल 26066 लोगों को इसके तहत राशन मिला। जून की बात करें तो ये लाभार्थी घटकर सिर्फ 21108 ही रह गए। इसके बाद जुलाई में सिर्फ 1222 लोगों को ही राशन मिला और अगस्त अंत तक सिर्फ 228 लोग इसके लाभार्थी पाए गए। अब सवाल ये है कि किस आधार पर जिला प्रशासन ने जरूरतमंद लोगों का सर्वे कर करीब 37 हजार परिवारों की सूची बनाई थी, जिनके लिए राशन मंगवाया गया था और अब ये परिवार कहां गए जो सिर्फ 228 लोग ही इसका लाभ ले रहे हैं। वहीं शहर में कई जगहों पर बंद कमरों में पड़ा डीआरटी योजना का ये राशन किसका है, जिसे न तो विभाग अधिकारी उठा रहे हैं, और न ही डिपो संचालक इसे ले जा रहे हैं। जहां से राशन सड़ रहा है और चूहों का निवाला बन रहा है।
फर्जी टोकनों को विभाग में लगा ढेर
वैसे तो विभाग ने खानापूर्ति करने के लिए सैंकड़ों डीआटी योजना के टोकनों को भी पकड़ा है, जिन पर राशन नहीं दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि ये वे टोकन थे, जो लोगों ने लिए थे और वे इसके पात्र ही नहीं थे। अधिकारियों के अनुसार सक्षम लोगों को इसका लाभ मिलने पर इन टोकनों को रद्द कर विभाग में रखवाया गया था।
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वार्ड-13 के स्कूल में पड़ा हजारों किलो राशन: शिव कुमार शर्मा
निगम पार्षद शिव कुमार शर्मा ने बताया कि उनके वार्ड की एकता विहार कॉलोनी के राजेंद्रा स्कूूल में डीआरटी योजना के अंतर्गत आए राशन की सैकड़ों बोरियां ताले में बंद हैं। ये राशन यहां सड़ रहा है, इसके चूहे खा रहे हैं। जरूरतमंद लोगों को देने के समय विभाग अधिकारी आना कानी करते रहे और यहां इसका फर्जीवाड़ा देखने का मिल रहा है। डिपो होल्डर द्वारा पहले तो राशन दिया गया, लेकिन अब साफ तौर पर मना किया जा रहा है।
स्कीम गई, राशन बचा, अब हो रही धांधली, जबरदस्त घोटाला
पार्षद का आरोप हैं कि डिस्ट्रेस योजना स्कीम तो जा चुकी है, ये स्कीम केवल मई व जून के लिए बनाई गई थी, जिसमेें लॉकडाउन व कोरोना काल के दौरान आया राशन लोगों को बांटने की बजाए इकट्ठा किया गया और अब इसे धीरे धीरे बेचा जा रहा है। यहां राशन के ढेर लगे हैं, जरूरतमंद लोग परेशान होकर वापस जा चुके हैं, लेकिन डिपो होल्डर उनको राशन ही नहीं दे रहे हैं। ये विभाग की मिलीभगत से बड़े स्तर के राशन घोटाले को अंजाम दिया जा रहा है।
तुरंत जांच कर होगी कार्रवाई: डीएफएससी
मामला संज्ञान में आया है। अगर ऐसा है तो तुंरत इस मामले की गहनता से जांच होगी। विभाग अधिकारियों को मौके पर भेजा जाएगा ओर चैक करवाया जाएगा। वहीं पहले से बंटे राशन और रिकार्ड का मिलान भी किया जाएगा। किसी भी सूरत में किसी भी प्रकार का फर्जीवाड़ा नहीं होने दिया जाएगा।
- मंजुला दहिया, डीएफएससी, पानीपत।
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मई में 26, जून में 21, जुुलाई में 1222 और अगस्त में 228 को ही मिला राशन
पानीपत खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा मुख्यालय में मई में 36694 परिवारों की सूची भेजी थी, जिसमें योजना के अंतर्गत जिले के 57578 लोगों को मई और जून में इसका लाभ मिलना था, लेकिन मई में केवल 26066 लोगों को इसके तहत राशन मिला। जून की बात करें तो ये लाभार्थी घटकर सिर्फ 21108 ही रह गए। इसके बाद जुलाई में सिर्फ 1222 लोगों को ही राशन मिला और अगस्त अंत तक सिर्फ 228 लोग इसके लाभार्थी पाए गए। अब सवाल ये है कि किस आधार पर जिला प्रशासन ने जरूरतमंद लोगों का सर्वे कर करीब 37 हजार परिवारों की सूची बनाई थी, जिनके लिए राशन मंगवाया गया था और अब ये परिवार कहां गए जो सिर्फ 228 लोग ही इसका लाभ ले रहे हैं। वहीं शहर में कई जगहों पर बंद कमरों में पड़ा डीआरटी योजना का ये राशन किसका है, जिसे न तो विभाग अधिकारी उठा रहे हैं, और न ही डिपो संचालक इसे ले जा रहे हैं। जहां से राशन सड़ रहा है और चूहों का निवाला बन रहा है।
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फर्जी टोकनों को विभाग में लगा ढेर
वैसे तो विभाग ने खानापूर्ति करने के लिए सैंकड़ों डीआटी योजना के टोकनों को भी पकड़ा है, जिन पर राशन नहीं दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि ये वे टोकन थे, जो लोगों ने लिए थे और वे इसके पात्र ही नहीं थे। अधिकारियों के अनुसार सक्षम लोगों को इसका लाभ मिलने पर इन टोकनों को रद्द कर विभाग में रखवाया गया था।
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वार्ड-13 के स्कूल में पड़ा हजारों किलो राशन: शिव कुमार शर्मा
निगम पार्षद शिव कुमार शर्मा ने बताया कि उनके वार्ड की एकता विहार कॉलोनी के राजेंद्रा स्कूूल में डीआरटी योजना के अंतर्गत आए राशन की सैकड़ों बोरियां ताले में बंद हैं। ये राशन यहां सड़ रहा है, इसके चूहे खा रहे हैं। जरूरतमंद लोगों को देने के समय विभाग अधिकारी आना कानी करते रहे और यहां इसका फर्जीवाड़ा देखने का मिल रहा है। डिपो होल्डर द्वारा पहले तो राशन दिया गया, लेकिन अब साफ तौर पर मना किया जा रहा है।
स्कीम गई, राशन बचा, अब हो रही धांधली, जबरदस्त घोटाला
पार्षद का आरोप हैं कि डिस्ट्रेस योजना स्कीम तो जा चुकी है, ये स्कीम केवल मई व जून के लिए बनाई गई थी, जिसमेें लॉकडाउन व कोरोना काल के दौरान आया राशन लोगों को बांटने की बजाए इकट्ठा किया गया और अब इसे धीरे धीरे बेचा जा रहा है। यहां राशन के ढेर लगे हैं, जरूरतमंद लोग परेशान होकर वापस जा चुके हैं, लेकिन डिपो होल्डर उनको राशन ही नहीं दे रहे हैं। ये विभाग की मिलीभगत से बड़े स्तर के राशन घोटाले को अंजाम दिया जा रहा है।
तुरंत जांच कर होगी कार्रवाई: डीएफएससी
मामला संज्ञान में आया है। अगर ऐसा है तो तुंरत इस मामले की गहनता से जांच होगी। विभाग अधिकारियों को मौके पर भेजा जाएगा ओर चैक करवाया जाएगा। वहीं पहले से बंटे राशन और रिकार्ड का मिलान भी किया जाएगा। किसी भी सूरत में किसी भी प्रकार का फर्जीवाड़ा नहीं होने दिया जाएगा।
- मंजुला दहिया, डीएफएससी, पानीपत।