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Panipat News: साधकों को दिखाई आध्यात्मिकता की राह
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चातुर्मास में प्रवचन सुनते श्रावक। स्रोत : सभा
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। चातुर्मास पर सोमवार को जैन मुनियों ने साधकों को आध्यात्मिकता से जुड़ने, सामयिक साधना अपनाने और बड़ों के सम्मान का संदेश दिया। जिले में शहर समेत पांच स्थानों पर चातुर्मास और प्रवचन कार्यक्रम चल रहे हैं।
राजाखेड़ी में रमण गुरनीजी महाराज, अग्रवाल मंडी में मनोज मुनि महाराज और गांधी मंडी में राजेश मुनि महाराज व डॉ. राजेंद्र मुनि महाराज ने प्रवचन दिए। कार्यक्रम रोजाना सुबह आठ से नौ बजे तक आयोजित हो रहे हैं।
चातुर्मास आध्यात्मिकता से जुड़ने का समय : रमण गुरनीजी महाराज
एसएस जैन सभा राजाखेड़ी में रमण गुरनीजी महाराज ने कहा कि चातुर्मास के चार माह मोह-माया से दूर होकर आध्यात्मिकता से जुड़ने का अवसर देते हैं। प्रभु का स्मरण मन को आत्मिक शांति देता है और मानसिक दबाव कम करता है। उन्होंने क्रोध और मोह-माया का त्याग कर प्रभु भक्ति में मन लगाने का संदेश दिया।
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सामयिक साधना को जीवन में दें प्रथम स्थान : राजेंद्र मुनि महाराज
जैन स्थानक गांधी मंडी में डॉ. राजेंद्र मुनि महाराज और राजेश मुनि महाराज ने प्रवचन दिए। डॉ. राजेंद्र मुनि ने कहा कि सामयिक साधना व्यक्ति को शोक से निकालकर अच्छे कर्मों के मार्ग पर ले जाती है और आत्मा के गुणों को प्रकट करती है। क्रोध, मान, माया और लोभ आत्मिक गुणों पर आवरण डालते हैं। सामयिक साधना इन आवरणों को हटान े का माध्यम है, इसलिए इसे जीवन के प्रथम कार्यों में स्थान देना चाहिए।
नरेंद्र मुनि ने दिए सद्भाव के सूत्र
एसएस जैन सभा मतलौडा में गुरुदेव नरेंद्र मुनि महाराज ने सद्भाव, सहयोग और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए सूत्र प्रदान किए। कहा कि दीवारें सांझी होना ही पड़ोस नहीं है, बल्कि एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनना असली अड़ोस-पड़ोस का धर्म है।
बड़ों के प्रति सम्मान का भाव रखें : मनोज मुनि
एसएम जैन सभा अग्रवाल मंडी में मनोज मुनि महाराज ने विशाल मुनि, पवित्र मुनि, नरेंद्र मुनि और आनंद मुनि के सानिध्य में प्रवचन किए। उन्होंने कहा कि बच्चों को माता-पिता, दादा-दादी और परिवार के बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए। ऐसे संस्कार परिवार और समाज की नींव मजबूत करते हैं। माता-पिता बच्चों के भविष्य के लिए मेहनत करते हैं, जबकि दादा-दादी शिक्षा के साथ संस्कार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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पानीपत। चातुर्मास पर सोमवार को जैन मुनियों ने साधकों को आध्यात्मिकता से जुड़ने, सामयिक साधना अपनाने और बड़ों के सम्मान का संदेश दिया। जिले में शहर समेत पांच स्थानों पर चातुर्मास और प्रवचन कार्यक्रम चल रहे हैं।
राजाखेड़ी में रमण गुरनीजी महाराज, अग्रवाल मंडी में मनोज मुनि महाराज और गांधी मंडी में राजेश मुनि महाराज व डॉ. राजेंद्र मुनि महाराज ने प्रवचन दिए। कार्यक्रम रोजाना सुबह आठ से नौ बजे तक आयोजित हो रहे हैं।
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चातुर्मास आध्यात्मिकता से जुड़ने का समय : रमण गुरनीजी महाराज
एसएस जैन सभा राजाखेड़ी में रमण गुरनीजी महाराज ने कहा कि चातुर्मास के चार माह मोह-माया से दूर होकर आध्यात्मिकता से जुड़ने का अवसर देते हैं। प्रभु का स्मरण मन को आत्मिक शांति देता है और मानसिक दबाव कम करता है। उन्होंने क्रोध और मोह-माया का त्याग कर प्रभु भक्ति में मन लगाने का संदेश दिया।
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सामयिक साधना को जीवन में दें प्रथम स्थान : राजेंद्र मुनि महाराज
जैन स्थानक गांधी मंडी में डॉ. राजेंद्र मुनि महाराज और राजेश मुनि महाराज ने प्रवचन दिए। डॉ. राजेंद्र मुनि ने कहा कि सामयिक साधना व्यक्ति को शोक से निकालकर अच्छे कर्मों के मार्ग पर ले जाती है और आत्मा के गुणों को प्रकट करती है। क्रोध, मान, माया और लोभ आत्मिक गुणों पर आवरण डालते हैं। सामयिक साधना इन आवरणों को हटान े का माध्यम है, इसलिए इसे जीवन के प्रथम कार्यों में स्थान देना चाहिए।
नरेंद्र मुनि ने दिए सद्भाव के सूत्र
एसएस जैन सभा मतलौडा में गुरुदेव नरेंद्र मुनि महाराज ने सद्भाव, सहयोग और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए सूत्र प्रदान किए। कहा कि दीवारें सांझी होना ही पड़ोस नहीं है, बल्कि एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनना असली अड़ोस-पड़ोस का धर्म है।
बड़ों के प्रति सम्मान का भाव रखें : मनोज मुनि
एसएम जैन सभा अग्रवाल मंडी में मनोज मुनि महाराज ने विशाल मुनि, पवित्र मुनि, नरेंद्र मुनि और आनंद मुनि के सानिध्य में प्रवचन किए। उन्होंने कहा कि बच्चों को माता-पिता, दादा-दादी और परिवार के बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए। ऐसे संस्कार परिवार और समाज की नींव मजबूत करते हैं। माता-पिता बच्चों के भविष्य के लिए मेहनत करते हैं, जबकि दादा-दादी शिक्षा के साथ संस्कार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।