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Panipat News: सोशल मीडिया छोड़ कथक में हुईं पारंगत
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पानीपत। वर्तमान में सोशल मीडिया पर रील्स बनाकर खुद को स्टार मानने वाले युवाओं की भीड़ में कुछ युवा ऐसे हैंं जो भारतीय लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने का संकल्प ले चुके हैं। इनमें से पानीपत की 16 वर्षीय असमी भी हैं।
असमी पढ़ाई के साथ साथ प्रतिष्ठित लोक नृत्य कथक की कलाओं में पारंगत हो रही हैं। वर्तमान में वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय से कथक में चार साल का कोर्स कर रही हैं। साथ ही कई मंचों पर कलात्मक प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं।
पानीपत के मॉडल टाउन निवासी कारोबारी पंकज दुआ की 16 साल बेटी असमी बचपन से ही प्रतिभावन हैं। असमी ने आठ साल की उम्र में एक बार टीवी पर कथक नृत्य देख था जिसके बाद उनके मन में भी ऐसा ही डांस सीखने की ललक जगी। शुरूआत में परिजनों के बीच टीवी और मोबाइल पर देखकर ही कुछ स्टेप्स सीखे। लेकिन, जब वह नृत्य करने लगी तो उनके पिता ने उनके अंदर छुपी प्रतिभा को पहचान लिया। जिसके बाद असमी को कथक का प्रशिक्षण दिलाना शुरू कर दिया। वर्तमान में वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय से कथक में कोर्स कर रही हैं। असमी ने बताया कि कथक केवल एक नृत्य नहीं, यह अनुशासन, आत्म अभिव्यक्ति का प्रमुख माध्यम हैं। ब्यूरो
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असमी पढ़ाई के साथ साथ प्रतिष्ठित लोक नृत्य कथक की कलाओं में पारंगत हो रही हैं। वर्तमान में वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय से कथक में चार साल का कोर्स कर रही हैं। साथ ही कई मंचों पर कलात्मक प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं।
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पानीपत के मॉडल टाउन निवासी कारोबारी पंकज दुआ की 16 साल बेटी असमी बचपन से ही प्रतिभावन हैं। असमी ने आठ साल की उम्र में एक बार टीवी पर कथक नृत्य देख था जिसके बाद उनके मन में भी ऐसा ही डांस सीखने की ललक जगी। शुरूआत में परिजनों के बीच टीवी और मोबाइल पर देखकर ही कुछ स्टेप्स सीखे। लेकिन, जब वह नृत्य करने लगी तो उनके पिता ने उनके अंदर छुपी प्रतिभा को पहचान लिया। जिसके बाद असमी को कथक का प्रशिक्षण दिलाना शुरू कर दिया। वर्तमान में वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय से कथक में कोर्स कर रही हैं। असमी ने बताया कि कथक केवल एक नृत्य नहीं, यह अनुशासन, आत्म अभिव्यक्ति का प्रमुख माध्यम हैं। ब्यूरो
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