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साढ़े सात घंटे पहले बेटे को जेल से कॉल कर कहा था- जान को है खतरा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 09 Nov 2022 01:33 AM IST
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Seven and a half hours ago, the son was called from jail and said - life is in danger
पानीपत। सोमवार की रात डेढ़ बजे उम्रकैद की सजा काट रहे रणबीर के बाथरूम में टोंटी से फंदा लगाए शव मिलने के साढ़े सात घंटे पहले रणबीर ने बेटे को कॉल कर अपनी जान को खतरा बताया था। रणबीर के बेटे सतेंद्र का कहना है कि उसके पिता ने सोमवार शाम करीब छह बजे उसे फोन किया था। फोन पर उन्होंने कहा था कि जेल प्रशासन प्रताड़ित कर रहा है। उसे दूसरी जेल में शिफ्ट कराया जाए। सुबह छह बजे उन्हें पिता रणबीर की मौत की सूचना मिली। परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम सिविल अस्पताल में कराने से इनकार कर दिया। परिजनों की मांग है कि मामले में पहले 302 का केस दर्ज कराया जाए और पोस्टमार्टम रोहतक पीजीआई में कराया जाए।
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परिजन शाम साढ़े छह बजे तक सिविल अस्पताल में ही रहे। उनमें रोष देखकर यहां पर भारी पुलिस बल तैयात किया गया। डीएसपी प्रदीप कुमार ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे हत्या का केस दर्ज कराने की मांग पर अड़े रहे। परिजनों के साथ गांव आदियाना के ग्रामीणों का दल एसपी शशांक कुमार सावन से मिलने उसके आवास पर भी पहुंचा। एसपी ने उन्हें उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। परिजनों के मुताबिक बुधवार को पोस्टमार्टम रोहतक पीजीआई कराने पर सहमति जताई गई है। गौरतलब है कि इस साल जेल में तीन युवकों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। इन तीनों के शव जेल में फंदे पर ही लटके मिले थे।
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बेटे सतेंद्र का आरोप है कि पिता रणबीर का शव गमछे से बाथरूम में टोंटी पर फंदे से बंधा था। शव बैठने की मुद्रा में था। ऐसी मुद्रा में फांसी लगाना असंभव है। उन्हें शक है कि पिता रणबीर की हत्या की गई है। दो कैदी तो पिता की बैरक में थे, उन्हें छुपा लिया गया है। वह उनसे मिलने की मांग कर रहे थे, लेकिन जेल प्रशासन ने नहीं मिलवाया। उनकी मांग है कि मामले में 302 का केस दर्ज किया जाए।
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बेटे सतेंद्र ने सवाल उठाया कि पेरोल खत्म होने पर 21 अक्तूबर को पिता दोबारा जेल गए। दो दिन बाद उनके बेड से 50 ग्राम चरस मिली। जब जेल जाते हुए पूरी तलाशी होती है फिर पिता के पास चरस कैसे आई। जेल में गमछे पर भी प्रतिबंध है, फिर उनके पास गमछा कैसे पहुंचा।
परिजनों ने सवाल उठाया है कि रणबीर का कद 5.9 इंच था और वजन 80 किलोग्राम से अधिक था। वह जमीन से महज तीन फुट की ऊंची टोंटी से फंदा कैसे लगा सकते हैं। शव भी बैठी मुद्रा में मिला है। टोंटी पर इतने वजन के बाद का दबाव नहीं पड़ना शंका उत्पन्न करता है।

सतेंद्र ने बताया कि उसके पिता चार नवंबर 2007 को गांव के अमरनाथ की हत्या के आरोप में जेल में गए थे। 2010 में उसे उम्रकैद सुनाई गई। वह 15 साल से जेल में थे। उनकी सजा पूरी होने में डेढ़ साल का वक्त बचा था।
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