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सेक्टर-11 प्लॉट फर्जीवाड़ा मामला : मुख्य सूचना आयुक्त ने एस्टेट ऑफिसर से तलब की जांच रिपोर्ट, 22 को होगी अगली सुनवाई
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आरटीआई में थर्ड पार्टी का हवाला देकर सूचना रोकने पर सख्त रुख
1997 की रजिस्ट्री और 2012 के ओसी पर भी उठे सवाल
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के सेक्टर-11 स्थित एक प्लॉट के आवंटन में कथित फर्जीवाड़े का मामला फिर चर्चा में है। आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी को थर्ड पार्टी से संबंधित बताकर रोकने के मामले में राज्य सूचना आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य सूचना आयुक्त टीवीएसएन प्रसाद ने एचएसवीपी के एस्टेट ऑफिसर को प्लॉट से जुड़े मामले की विस्तृत जांच कर 22 अक्तूबर को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर ने 17 जुलाई 2025 को एस्टेट ऑफिसर कार्यालय में आवेदन देकर प्लॉट से संबंधित जानकारी मांगी थी। जन सूचना अधिकारी ने इसे थर्ड पार्टी की सूचना बताते हुए देने से इनकार कर दिया। इसके बाद राज्य सूचना आयोग में अपील के दौरान कपूर ने लिखित तथ्यों के माध्यम से प्लॉट के आवंटन में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। उनका आरोप है कि मामले से जुड़ी जानकारी छिपाने के लिए सूचना देने से इनकार किया गया।
मुख्य सूचना आयुक्त टीवीएसएन प्रसाद ने नौ अक्तूबर को मामले की सुनवाई की। इस दौरान उन्होंने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए एस्टेट ऑफिसर को विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई 22 अक्तूबर को होगी। आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर ने आयोग के आदेश का स्वागत किया है।
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इन बिंदुओं पर मांगी जांच रिपोर्ट
आयोग ने एस्टेट ऑफिसर से मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है। इनमें वर्ष 1997 में प्लॉट की रजिस्ट्री अधिकृत व्यक्ति द्वारा कराए जाने और उसकी पहचान के सत्यापन की स्थिति शामिल है। इसके अलावा, वर्ष 1997 में प्लॉट का हस्तांतरण एचएसवीपी के नियमों के अनुसार हुआ था या नहीं, इसकी जांच भी मांगी गई है।
तीसरे बिंदु में वर्ष 2012 में नक्शा स्वीकृत करने संबंधी पत्र और ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (ओसी) जारी किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। आयोग ने यह जांचने को कहा है कि उस समय प्लॉट का हस्तांतरण रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होने के बावजूद ये दस्तावेज अधिकृत व्यक्ति के नाम पर कैसे जारी हुए और संबंधित आवेदनों पर किए गए हस्ताक्षर सही व्यक्ति के थे या नहीं।
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1997 की रजिस्ट्री और 2012 के ओसी पर भी उठे सवाल
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के सेक्टर-11 स्थित एक प्लॉट के आवंटन में कथित फर्जीवाड़े का मामला फिर चर्चा में है। आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी को थर्ड पार्टी से संबंधित बताकर रोकने के मामले में राज्य सूचना आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य सूचना आयुक्त टीवीएसएन प्रसाद ने एचएसवीपी के एस्टेट ऑफिसर को प्लॉट से जुड़े मामले की विस्तृत जांच कर 22 अक्तूबर को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर ने 17 जुलाई 2025 को एस्टेट ऑफिसर कार्यालय में आवेदन देकर प्लॉट से संबंधित जानकारी मांगी थी। जन सूचना अधिकारी ने इसे थर्ड पार्टी की सूचना बताते हुए देने से इनकार कर दिया। इसके बाद राज्य सूचना आयोग में अपील के दौरान कपूर ने लिखित तथ्यों के माध्यम से प्लॉट के आवंटन में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। उनका आरोप है कि मामले से जुड़ी जानकारी छिपाने के लिए सूचना देने से इनकार किया गया।
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मुख्य सूचना आयुक्त टीवीएसएन प्रसाद ने नौ अक्तूबर को मामले की सुनवाई की। इस दौरान उन्होंने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए एस्टेट ऑफिसर को विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई 22 अक्तूबर को होगी। आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर ने आयोग के आदेश का स्वागत किया है।
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इन बिंदुओं पर मांगी जांच रिपोर्ट
आयोग ने एस्टेट ऑफिसर से मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है। इनमें वर्ष 1997 में प्लॉट की रजिस्ट्री अधिकृत व्यक्ति द्वारा कराए जाने और उसकी पहचान के सत्यापन की स्थिति शामिल है। इसके अलावा, वर्ष 1997 में प्लॉट का हस्तांतरण एचएसवीपी के नियमों के अनुसार हुआ था या नहीं, इसकी जांच भी मांगी गई है।
तीसरे बिंदु में वर्ष 2012 में नक्शा स्वीकृत करने संबंधी पत्र और ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (ओसी) जारी किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। आयोग ने यह जांचने को कहा है कि उस समय प्लॉट का हस्तांतरण रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होने के बावजूद ये दस्तावेज अधिकृत व्यक्ति के नाम पर कैसे जारी हुए और संबंधित आवेदनों पर किए गए हस्ताक्षर सही व्यक्ति के थे या नहीं।