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Panipat News: फॉल्ट ठीक करने वाली एजेंसी को एसई ने भेजा नोटिस, काम में क्यों हो रहे हैं फेल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 07 Aug 2024 06:34 AM IST
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SE sent notice to the fault repairing agency, why are they failing in the work?
पानीपत। बिजली निगम के अधीक्षण अभियंता ने मॉडल टाउन और सिटी सब डिवीजन में फॉल्ट ठीक करने वाली एजेंसी इंपीरियल को कारण बताओ नोटिस भेजा है। जिससे कंपनी से उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। कंपनी शहर में बिजली के फॉल्ट ठीक करने में काफी देरी कर रही है। जिससे लोगों को 10 से 15 घंटों तक के कटों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले पांच माह से कंपनी न तो मैनपावर पूरी लगा पाई है और न ही संसाधन पूरे हैं। जिससे बिजली निगम के अधिकारियों से लेकर आम जन भी परेशान है। इससे पहले भी कंपनी को नोटिस दिए गए थे। अब कंपनी के मुख्यालय को पत्राचार किया गया है।
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निगम अधिकारियों ने कहा कि कंपनी के पास अनुभवहीन कर्मचारी हैं। जो ज्यादातर अवकाश पर रहते हैं। कंपनी के अधिकारियों का रवैया भी सही नहीं है। इससे पहले कंपनी के अधिकारी और बिजली निगम के कर्मचारी की ऑडियो तक वायरल हो चुकी है। बिजली निगम के एसई धर्म सुहाग ने कार्यालय ज्वाइन करने के साथ ही एक महज औपचारिकता वाली बैठक इंपीरियल कंपनी के पदाधिकारियों के साथ बैठक तो की जो बेनतीजा रही। अधिकारियों ने खुद माना कि एजेंसी की कार्यप्रणाली में काफी लापरवाही है बावजूद एजेंसी पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी। वहीं, कर्मचारी यूनियन नेताओं का कहना है कि एजेंसी काम करने में असफल रही है। इसका टेंडर रद्द कर दिया जाए। इससे जनता परेशान हैं और बिजली निगम की छवि खराब हो रही है। इन दोनों सब डिवीजन की जिम्मेदारी निगम कर्मचारियों को सौंपी जाए।
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गौरतलब है कि बिजली निगम ने सिटी और मॉडल टाउन सब डिवीजन के अंतर्गत संचालन और रखरखाव का ठेका दिसंबर 2023 को दिल्ली की इम्पीरियल इलेक्टि्रक कंपनी को दिया था। जिसमें कंपनी की ओर से 128 कर्मचारी, नौ टू व्हीलर, चार फोर व्हीलर समेत एक स्काई लिफ्टर मशीन उपलब्ध करवानी थी। जबकि स्काई लिफ्टर तो दूर एजेंसी के पास सीढी तक नहीं है। इस पर 29 लाख रुपये प्रतिमाह का भुगतान किया जाना था। जो दो साल के लिए करीब 6.96 करोड़ बनता है।
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बिजली निगम के अधीक्षण अभियंता धर्म सुहाग का कहना है कि फॉल्ट ठीक करने वाली कंपनी की दोनों सब डिवीजन में कार्यप्रणाली सही नहीं है। पहले भी नोटिस भेजा गया था। अब मुख्यालय पत्राचार किया गया है।
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