स्कूलों के मिड-डे मील में गोलमाल!

अमर उजाला, पानीपत Updated Fri, 22 Nov 2013 12:07 AM IST
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Schools in the mid - day meal breakup!

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पानीपत के सरकारी स्कूलों में बच्चों के मिड-डे मील में आटा और दलिया पिसाई के नाम पर गोलमाल चल रहा है। शायद ही किसी स्कूल में विद्यार्थियों को पूरी मात्रा में पौष्टिक आहार मिल पाता हो। स्कूलों में दूषित राशन से मिड-डे मील तैयार करने के साथ राशन बेचने या कटौती करने का भी भंडाफोड़ हुआ है।
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स्कूल प्रमुख शिक्षा विभाग के सिर इसका ठीकरा फोड़ रहे हैं, वहीं शिक्षा विभाग पौष्टिक आहार को लेकर चुप है। स्कूल प्रमुखों और शिक्षा विभाग के बीच स्थिति स्पष्ट न होने का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को मिड-डे मील दिया जा रहा है। इस समय जिले में ऐसे करीब 92 हजार विद्यार्थी हैं। शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों को रैसिपी दी गई और उसी अनुसार स्कूलों में खाना दिया जाना है। लेकिन स्कूलों में मिड-डे मील की स्थिति इसके विपरीत है।
ऐसे जाता है बच्चों के नाम का राशन  
स्कूलों में दिए राशन का 15 प्रतिशत हिस्सा पिसाई में जाता है। आटा और दलिया पिसाई के लिए कोई भी स्पष्ट नहीं है। आटा चक्की पर इसकी पिसाई ढाई रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से ली जाती है। ऐसे में सौ किलोग्राम गेहूं पिसवाने की राशि 250 रुपये बन जाती है। स्कूल प्रमुखों के पास इसका कोई खाता नहीं होता और अधिकतर स्कूल संचालक उसी में से कटौती करा देते हैं। इसके अलावा बर्तन साफ करने का भी खाता नहीं है। इसका कुछ हिस्सा बर्तन धोने का साबुन या पाउडर लाने में चला जाता है। बच्चों के राशन का कुछ हिस्सा महंगाई के नाम पर मंडी में चला जाता है। इस हिसाब से अधिकतर स्कूलों में बच्चों को 50-70 प्रतिशत ही राशन मिल पा रहा है।

बुधवार को हुआ था भंडाफोड़
राजकीय स्कूलों में बच्चों के नाम का राशन आटा चक्की संचालकों को देने का बुधवार को भंडा फूटा था। शहर के राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल से एक चक्की संचालक 48 किलोग्राम राशन ले जाते धरा गया था। उसने स्कूल प्रमुख की ओर से पिसाई राशि की एवज में यह राशन देने की कही थी। इसके बाद अन्य स्कूलों में भी मामले को जाना गया तो सच्चाई की परत उठती चली गई। जिले के सभी स्कूलों में आटा और दलिया पिसाई के नाम पर आटे की कटौती और राशन दिया जाता है।

पहले भी मिली हैं खामियां

सरकारी स्कूलों में बनने वाले मिड-डे मील में खामियां पहले भी कई बार पकड़ी जा चुकी हैं। जिला और निदेशालय स्तर के अधिकारी इन खामियाें को खुद पकड़कर कार्रवाई करने का दावा भी कर चुके हैं। लेकिन आज तक न तो किसी पर कुछ कार्रवाई हो सकी और न ही मिड-डे मील की व्यवस्था में किसी तरह का बदलाव हो सका। स्कूलों में मिड-डे मील आज भी रामभरोसे ही चल रहा है।

विभाग ये भी कर चुका है दावा

गत दिनों बिहार में दर्जनों बच्चों की मिड-डे मील खाने से मौत के बाद भी प्रदेश का शिक्षा निदेशालय सतर्क हुआ था और पूरे प्रदेश में कमेटी बनाई गई थी। जिसमें उक्त टीम का सप्ताह या दो सप्ताह के अंदर जिले के स्कूलों में निरीक्षण कर व्यवस्था में सुधार करने का फैसला लिया था। अधिकारियों का दल जिला स्तर पर एक बार पहुंचा, उसके बाद किसी की कोई खबर नहीं है।
राजकुमार जांगड़ा, महासचिव, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ

वर्जन
स्कूलों में मिड-डे मील योजना के सुधार के लगातार प्रयास चल रहे हैं। वे भी स्कूलों के निरीक्षण में मिड-डे मील चखती हैं और विद्यार्थियों से भी बात की जाती है। बच्चों की तरफ से कोई शिकायत नहीं मिली है। वे आटा या दलिया पिसाई के मामले पर भी संज्ञान लेंगी और मामले की जांच की जाएगी।
सरोज बाला गुर, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, पानीपत
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