{"_id":"68e01824983768092404222e","slug":"safidon-mla-ramkumar-gautam-took-the-blessings-of-upendra-muni-panipat-news-c-244-1-pnp1006-144901-2025-10-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panipat News: सफीदों के विधायक रामकुमार गौतम ने लिया उपेंद्र मुनि का आशीर्वाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panipat News: सफीदों के विधायक रामकुमार गौतम ने लिया उपेंद्र मुनि का आशीर्वाद
Sat, 04 Oct 2025 12:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Sat, 04 Oct 2025 12:08 AM IST
विज्ञापन
जैन स्थानक में विधायक रामकुमार गौतम को सम्मानित करते उपेंद्र मुनि व प्रधान वीरप्रकाश जैन। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
समालखा। सफीदों के विधायक दादा रामकुमार गौतम ने शुक्रवार को नई अनाज मंडी स्थित जैन स्थानक में जैन संत का आशीर्वाद लिया। एसएस जैन सभा के प्रधान वीरप्रकाश जैन ने विधायक राम कुमार गौतम का स्वागत व स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान विधायक ने उपेंद्र मुनि से आशीर्वाद प्राप्त किया।
उपेंद्र मुनि ने कहा कि मनुष्य जीवन को दुर्लभ जीवन इसलिए कहा गया है क्योंकि मनुष्य जीवन लाखों योनियों में भटकने के बाद आत्मा को मिलता है और इसमें चेतना की उच्च स्थिति होती है। जहां से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। कबीर के अनुसार जैसे वृक्ष से पत्ता गिरकर दोबारा नहीं लगता, वैसे ही मानव शरीर बार-बार नहीं मिलता। इस दुर्लभ अवसर का सदुपयोग सत्संग, सेवा और आत्म-चिंतन जैसे पुण्य कर्मों में करना चाहिए। जिससे आवागमन से मुक्ति मिल सके और परमानंद प्राप्त हो सके। मनुष्य जीवन ही एकमात्र ऐसा अवसर है। जिसमें चेतना की उच्च स्थिति से ईश्वर की प्राप्ति और आवागमन से मुक्ति संभव है।
विज्ञापन
समालखा। सफीदों के विधायक दादा रामकुमार गौतम ने शुक्रवार को नई अनाज मंडी स्थित जैन स्थानक में जैन संत का आशीर्वाद लिया। एसएस जैन सभा के प्रधान वीरप्रकाश जैन ने विधायक राम कुमार गौतम का स्वागत व स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान विधायक ने उपेंद्र मुनि से आशीर्वाद प्राप्त किया।
उपेंद्र मुनि ने कहा कि मनुष्य जीवन को दुर्लभ जीवन इसलिए कहा गया है क्योंकि मनुष्य जीवन लाखों योनियों में भटकने के बाद आत्मा को मिलता है और इसमें चेतना की उच्च स्थिति होती है। जहां से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। कबीर के अनुसार जैसे वृक्ष से पत्ता गिरकर दोबारा नहीं लगता, वैसे ही मानव शरीर बार-बार नहीं मिलता। इस दुर्लभ अवसर का सदुपयोग सत्संग, सेवा और आत्म-चिंतन जैसे पुण्य कर्मों में करना चाहिए। जिससे आवागमन से मुक्ति मिल सके और परमानंद प्राप्त हो सके। मनुष्य जीवन ही एकमात्र ऐसा अवसर है। जिसमें चेतना की उच्च स्थिति से ईश्वर की प्राप्ति और आवागमन से मुक्ति संभव है।
विज्ञापन