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कोरोना का बदला इलाज, अब मरीजों को नहीं दी जा रही एंटीबायोटिक दवा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 19 Jan 2022 01:51 AM IST
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Revenge treatment of corona, now antibiotics are not being given to patients
पानीपत। कोरोना की तीसरी लहर में वायरस बॉडी को इंफेक्ट नहीं कर पा रहा। अब कोरोना वायरस का स्वरूप सीजनल फ्यू जैसा ही है। इसमें दो तीन दिन जुकाम, खांसी व बुखार होने के बाद बॉडी रिकवर हो जाती है। तीसरी लहर में कोरोना का अब इलाज भी बदल चुका है। अब डॉक्टर कोरोना के मरीजों को एंटीबायोटिक दवा लेने की सलाह नहीं दे रहे, बल्कि एंटीबॉयोटिक दवा लेने से इनकार किया जा रहा।
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डॉक्टरों की सलाह है कि कोरोना रोगियों को अगर बुखार है तो सिर्फ बुखार की दवा लें और अगर खांसी हैं तो उसकी दवा लें, क्योंकि कोरोना टीकाकरण से शरीर में एंटीबॉडी बन चुकी है। ऐसे में एंटीबॉयोटिक दवाओं की जरूरत भी नहीं है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग के पास एंटीबायोटिक दवा एंटीपाइरेटिक, एंटीट्यूसिव, अजित्रोमायसीन का स्टॉक ज्यों की त्यों पड़ा है।
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इस बार बुखार नहीं, दर्द हो रहा बदन
कोरोना की सभी लहर में कोरोना के लक्षणों में परिवर्तन हुआ है। कोरोना की तीसरी लहर में मरीजों को बुखार नहीं हुआ ब्लकि उन्हें बदन दर्द हुआ है। शरीर में जकड़न महसूस हुई है। इस रोग की दवा खाने के बाद मरीज दो दिन में रिकवर भी हो गए।
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बिना डॉक्टर के परामर्श के नहीं होगा सीटी स्कैन
कोरोना की दूसरी लहर में वायरस ने फेफड़ों को बुरी तरह से इंफेक्टिड किया था। सैंकड़ों लोगों की मौत इसी कारण हो गई थी। कोरोना की तीसरी लहर में वायरस फेफड़ों को इंफेक्ट नहीं कर पाया। सिविल सर्जन की ओर से भी निर्देश दिए गए कि बिना डॉक्टरों के परामर्श के सीटी स्कैन न किया जाए।
पहले दिन में खानी पड़ती थी आठ एंटीबॉयोटिक दवा
कोरोना की पहली लहर में कोरोना का खौफ इस कदर था कि मरीजों को दिन में तीन बार एंटी वायरल व एंटीबॉयोटिक दवा दी जाती थी। चार गोली एंटीबायोटिक खानी पड़ती थी। करीब 10 दिन बाद मरीज रिकवर करता था। अब कोरोना टीकाकरण से शरीर में एंटीबॉडी विकसित हो चुकी है।
124 बच्चे बच्चे संक्रमित हुए, सभी घर में आइसोलेट
कोरोना की तीसरी लहर में नवयुवक व बच्चे अधिक संक्रमित हो रहे हैं। पिछले 17 दिन में 124 बच्चे कोरोना की चपेट में आए हैं। बच्चों के लिए सिविल अस्पताल में एचडीयू बनाई गई है। शहर में एक भी मरीज किसी ऑक्सीजन बेड, आईसीयू बेड या वेंटिलेटर पर नहीं है। 1850 मरीजों में से महज 11 रोगी ही सरकारी व निजी अस्पतालों में दाखिल हैं।
ऑक्सीजन की कमी से नहीं होगी मौत
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की किल्लत से लोग परेशान हो गए थे, हालांकि इस बार ऑक्सीजन की किल्लत नहीं होगी। सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया है, जिसका ट्रायल हो गया है। इससे एक मिनट में एक हजार लीटर ऑक्सीजन बनेगी। समालखा में भी प्लांट लगाया गया है। विभाग के पास कुल 302 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर हैं।

जिले के निजी एवं सरकारी अस्पतालों में बेड
कुल बेड 1698
ऑक्सीजन बेड 535
नॉन ऑक्सीजन बेड 880
आईसीयू बेड 203
वेंटीलेटर बेड 80
अब एंटीबायोटिक दवा लेने की जरूरत नहीं
कोरोना की पहली व दूसरी लहर में शरीर में एंटीबॉडी विकसित नहीं हुई थी इसलिए कोरोना के रोगियों को एंटीबायोटिक दवा देनी पड़ती थी। अब मरीजों को जो दिक्कत है सिर्फ उसकी दवा दी जाती है। कोरोना की ये लहर सीजनल फ्यू जैसी ही है। मरीज जल्द ठीक हो रहे हैं। -डॉ. अमित कुमार, डॉक्टर सिविल अस्पताल
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