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Panipat News: समागम से पानीपत के व्यापार के साथ परिवहन को मिली गति

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 20 Nov 2024 03:58 AM IST
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Panipat's business and transportation gained momentum from the Samagam
पानीपत। तीन दिवसीय निरंकारी संत समागम में लाखों अनुयायियों ने मिशन के थीम पर ज्ञान लेने के साथ पानीपत में जमकर खरीदारी की। यहां से कंबल, चादर और हैंडलूम के बाजार में तीनों दिन अनुयायी खरीदारी को पहुंचे। पानीपत के साथ समालखा व समागम स्थल के नजदीक भोड़वाल माजरी गांव में अस्थायी बाजार में खरीदारी की। तीन दिन में करोड़ों रुपये की खरीद की गई। वहीं ऑटो और ई-रिक्शा समेत परिवहन से जुड़े लोगों की उम्मीद पूरी हुई।
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भोड़वाल माजरी गांव स्थित निरंकारी मिशन के आध्यात्मिक स्थल पर 16 से 18 नवंबर को तीन दिवसीय निरंकारी संत समागम का आयोजन किया गया। इसमें देशभर आठ से दस लाख अनुयायियों के पहुंचने का दावा किया गया है। इनके साथ 16 देशों से करीब दो हजार अनुयायी पहुंचे। यहां तीन दिवसीय समागम में गुरु ज्ञान लेने के साथ अनुयायियों ने समालखा व पानीपत के बाजार में जमकर खरीदारी की। पानीपत के कंबल और चादर बाजार में सुबह से शाम तक खरीदारी को लेकर लाइन लगी रही।
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दुकानदार बोले समागम में तेज होता है बाजार
गोहाना रोड स्थित बालाजी हैंडलूम के संचालक सुरेश सैनी ने बताया कि वैसे तो सर्दी में पानीपत का बाजार तेज हो जाता है। तीन दिवसीय समागम के चलते खरीदारी और बढ़ जाती है। उनके पास थोक का ग्राहक अधिक रहता है। इस बार अनुयायी भी अधिक संख्या में पहुंचे हैं। यहां से कंबल व चादर समेत हैंडलूम के सामान की खूब खरीदारी की गई है। अशोक नारंग ने बताया कि पानीपत के मिंक कंबल के अलावा यहां की गर्म चादर की भी मांग रही है। इसके अलावा ओढ़ने के लिए चादर और शॉल की काफी बिक्री हो रही है। समागम बेशक तीन दिन का होता है लेकिन अनुयायी 10 दिन तक यहां रहते हैं। इससे इन दिनों में खरीदारी रहती है।
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ऑटो व ई-रिक्शा के साथ दूसरे वाहनों की मांग
भोड़वाल माजरी से पानीपत व समालखा आने के लिए अनुयायी रिक्शा, ई-रिक्शा व दूसरे वाहन लेकर चलते हैं। इसके अलावा वे इकट्ठा होकर भी अपना किराये पर स्पेशल वाहन कर लाते हैं। समालखा निवासी रितेश और हरजीत ने बताया कि उनके पास ई-रिक्शा है। वे पहले समालखा में लोकल चलाते थे। इसमें चार सौ रुपये तक कमा लेते थे। समागम के दौरान भोड़वाल माजरी से समालखा तक चलते हैं। उनको यहां हर रोज एक हजार रुपये की आमदनी होती है।
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