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जाटों ने मीटिंग में सरकार के साथ तो जाटणियों ने धरने पर संभाला मोर्चा
अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत।
Updated Sun, 12 Feb 2017 12:59 AM IST
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पानीपत
- फोटो : पानीपत
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अमर उजाला ब्यूरो।
पानीपत। जाट आरक्षण के 14वें दिन पुरुष जाट नेताओं ने सरकार द्वारा गठित कमेटी के साथ अपनी बात स्पष्ट की, वहीं उग्रा खेड़ी के स्टेडियम में चल रहे धरने की कमान जाटनियों ने संभाली। गांव कवी से दो और तामशाबाद से एक ट्रैक्टर-ट्रालियों में महिलाएं सवार होकर धरने पर पहुंची। शनिवार के धरने की रोचक बात यह रही कि महिलाएं खुद ट्रैक्टर चलाकर धरनास्थल पर पहुंची। जाटनियों द्वारा ट्रैक्टर चलाने की चर्चा पूरे जिले में होती रही। वहीं धरने को हरियाणा शिवसेना की तरफ से भी समर्थन मिला। चंदे के तौर पर एक लाख से अधिक की राशि तीन गांवों द्वारा जमा करवाई गई। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन द्वारा सनौली-हरिद्वार रोड पर सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए। वहीं समिति के सदस्यों द्वारा 250 लोगों के लिए अलग से खाना भी तैयार करवाया गया, जिसे बाद में गांव उग्रा खेड़ी के ग्रामीणों द्वारा गरीब लोगों को बांटना पड़ा।
धरने को संबोधित करते हुए शिव सेना हरियाणा के उपाध्यक्ष नफे सिंह मलिक ने कहा कि अपनी मांगों को लेकर लड़ाई लड़ रहे जाट समाज के साथ उनकी शिव सेना साथ खड़ी है और पूरा समर्थन उनके साथ है। जब तक जाट समाज की मांगे नहीं मानी जाती, तब तक शिव सेना जाट समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ती रहेंगी। उन्होंने भी सरकार पर वादाखिलाफी के आरोप लगाए। मलिक ने कहा कि सरकार द्वारा आयोजित की गई वार्ता महज दिखावा है तथा उनकी नीयत ठीक नहीं है। उन्होंने बताया कि इस धरने को और मजबूत बनाने के लिए सभी को एकता का परिचय देते हुए हर घर से एक सदस्य पहुंचना चाहिए, ताकि धरने को विशाल रूप दिया जा सके। जाट संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष सतबीर सिंह देशवाल ने बताया कि सरकार द्वारा की गई बैठक महज एक दिखावा है। इस तरह की बैठकें सरकार पहले भी तीन बार करवा चुकी हैं, जिनमें आज तक कोई समाधान नहीं निकला। देशवाल ने कहा कि अबकी बार तो जाट समाज अपनी मांगी पूरी करवाने के बाद ही चैन की सांस लेगा। अब तो आरक्षण के लिए वे कुर्बानी तक देने को तैयार है। शांतिपूर्वक रहे धरने में रागनी व चुटकलों से भी उपस्थित लोगों का मनोरंजन किया गया।
इस धरने में गांव कवी की बहू सरोज स्वयं ट्रैक्टर चलाकर धरने स्थल पर पहुंची। गांव कवी से दो ट्रैक्टर-ट्रालियों में 60 के करीब महिलाएं उग्रा खेड़ी के धरने में शामिल हुई। इसी तरह से गांव तामशाबाद से भी ट्रैक्टर-ट्राली से महिलाएं पहुंची, जिन्हें देखकर गांव रिसालू व उग्रा खेड़ी की महिलाएं भी आगे आई और धरने में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। दोपहर एक बजे के बाद स्टेडियम में भारी तादाद में भीड़ देखने को मिली। धरने में संख्या बढ़ाने के लिए ग्रामीणों व महिलाओं को जागरूक करने के लिए महिला सरोज ट्रैक्टर-ट्राली को चलाकर उग्रा खेड़ी सहित विभिन्न गांवों से होती हुई कवी गांव में पहुंची। चंदा कमेटी के अध्यक्ष रामचंद्र डाहर को गांव चमराड़ा की तरफ से 71 हजार, बांध व बलाना की तरफ से 21-21 हजार रुपये का चंदा दिया गया। इस अवसर पर सुरेश आर्य, दयानंद, चर्तुभूज, सतपाल, सतबीर, कमल व प्रतीक मौजूद रहे।
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साढ़े 5 बजे तक करते रहे इंतजार
स्टेडियम में चल रहे धरने में मौजूद जाट समाज के लोग बार-बार रिफाइनरी में चल रही बैठक के बारे में संघर्ष समिति के सदस्यों से पूछते रहे। बैठक के उपरांत समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक के धरनास्थल में आने का इंतजार भी जाट समाज के लोग करते देखे गए, परंतु यशपाल मलिक धरने में शामिल होने की बजाए सीधे दिल्ली की तरफ चल पड़े। करीब साढ़े पांच बजे तक लोग मलिक के आने के बारे में पूछते रहे। धरनारत लोगों का ध्यान सरकार व समिति पदाधिकारियों के बीच बातचीत पर रहा।
होमगार्ड के जवानों का लिया सहारा
प्रशासन द्वारा शनिवार को होमगार्ड के जवानों का भी सहारा लिया गया। जिले में एक तरफ उग्रा खेड़ी के स्टेडियम में चल रहा धरना और दूसरी तरफ रिफाइनरी के सामुदायिक केंद्र में चल रही जाट नेताओं की बैठक को लेकर सुरक्षा के मद्देनजर विशेष प्रबंध किए गए। सीआरपीएफ जवानों के साथ-साथ आरपीएफ के जवान भी उक्त स्थानों पर तैनात दिखे। दोनों स्थानों पर होमगार्ड के जवान तैनात दिखे। डीएसपी मुख्यालय जगदीप दूहन बैठक स्थल के साथ-साथ धरना स्थल पर पुलिस जवानों को खास हिदायतें देते रहे। दोनों स्थानों पर सुरक्षा के मद्देनजर डीएसपी ने पूरी चौकसी बरती।
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पानीपत। जाट आरक्षण के 14वें दिन पुरुष जाट नेताओं ने सरकार द्वारा गठित कमेटी के साथ अपनी बात स्पष्ट की, वहीं उग्रा खेड़ी के स्टेडियम में चल रहे धरने की कमान जाटनियों ने संभाली। गांव कवी से दो और तामशाबाद से एक ट्रैक्टर-ट्रालियों में महिलाएं सवार होकर धरने पर पहुंची। शनिवार के धरने की रोचक बात यह रही कि महिलाएं खुद ट्रैक्टर चलाकर धरनास्थल पर पहुंची। जाटनियों द्वारा ट्रैक्टर चलाने की चर्चा पूरे जिले में होती रही। वहीं धरने को हरियाणा शिवसेना की तरफ से भी समर्थन मिला। चंदे के तौर पर एक लाख से अधिक की राशि तीन गांवों द्वारा जमा करवाई गई। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन द्वारा सनौली-हरिद्वार रोड पर सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए। वहीं समिति के सदस्यों द्वारा 250 लोगों के लिए अलग से खाना भी तैयार करवाया गया, जिसे बाद में गांव उग्रा खेड़ी के ग्रामीणों द्वारा गरीब लोगों को बांटना पड़ा।
धरने को संबोधित करते हुए शिव सेना हरियाणा के उपाध्यक्ष नफे सिंह मलिक ने कहा कि अपनी मांगों को लेकर लड़ाई लड़ रहे जाट समाज के साथ उनकी शिव सेना साथ खड़ी है और पूरा समर्थन उनके साथ है। जब तक जाट समाज की मांगे नहीं मानी जाती, तब तक शिव सेना जाट समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ती रहेंगी। उन्होंने भी सरकार पर वादाखिलाफी के आरोप लगाए। मलिक ने कहा कि सरकार द्वारा आयोजित की गई वार्ता महज दिखावा है तथा उनकी नीयत ठीक नहीं है। उन्होंने बताया कि इस धरने को और मजबूत बनाने के लिए सभी को एकता का परिचय देते हुए हर घर से एक सदस्य पहुंचना चाहिए, ताकि धरने को विशाल रूप दिया जा सके। जाट संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष सतबीर सिंह देशवाल ने बताया कि सरकार द्वारा की गई बैठक महज एक दिखावा है। इस तरह की बैठकें सरकार पहले भी तीन बार करवा चुकी हैं, जिनमें आज तक कोई समाधान नहीं निकला। देशवाल ने कहा कि अबकी बार तो जाट समाज अपनी मांगी पूरी करवाने के बाद ही चैन की सांस लेगा। अब तो आरक्षण के लिए वे कुर्बानी तक देने को तैयार है। शांतिपूर्वक रहे धरने में रागनी व चुटकलों से भी उपस्थित लोगों का मनोरंजन किया गया।
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इस धरने में गांव कवी की बहू सरोज स्वयं ट्रैक्टर चलाकर धरने स्थल पर पहुंची। गांव कवी से दो ट्रैक्टर-ट्रालियों में 60 के करीब महिलाएं उग्रा खेड़ी के धरने में शामिल हुई। इसी तरह से गांव तामशाबाद से भी ट्रैक्टर-ट्राली से महिलाएं पहुंची, जिन्हें देखकर गांव रिसालू व उग्रा खेड़ी की महिलाएं भी आगे आई और धरने में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। दोपहर एक बजे के बाद स्टेडियम में भारी तादाद में भीड़ देखने को मिली। धरने में संख्या बढ़ाने के लिए ग्रामीणों व महिलाओं को जागरूक करने के लिए महिला सरोज ट्रैक्टर-ट्राली को चलाकर उग्रा खेड़ी सहित विभिन्न गांवों से होती हुई कवी गांव में पहुंची। चंदा कमेटी के अध्यक्ष रामचंद्र डाहर को गांव चमराड़ा की तरफ से 71 हजार, बांध व बलाना की तरफ से 21-21 हजार रुपये का चंदा दिया गया। इस अवसर पर सुरेश आर्य, दयानंद, चर्तुभूज, सतपाल, सतबीर, कमल व प्रतीक मौजूद रहे।
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साढ़े 5 बजे तक करते रहे इंतजार
स्टेडियम में चल रहे धरने में मौजूद जाट समाज के लोग बार-बार रिफाइनरी में चल रही बैठक के बारे में संघर्ष समिति के सदस्यों से पूछते रहे। बैठक के उपरांत समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक के धरनास्थल में आने का इंतजार भी जाट समाज के लोग करते देखे गए, परंतु यशपाल मलिक धरने में शामिल होने की बजाए सीधे दिल्ली की तरफ चल पड़े। करीब साढ़े पांच बजे तक लोग मलिक के आने के बारे में पूछते रहे। धरनारत लोगों का ध्यान सरकार व समिति पदाधिकारियों के बीच बातचीत पर रहा।
होमगार्ड के जवानों का लिया सहारा
प्रशासन द्वारा शनिवार को होमगार्ड के जवानों का भी सहारा लिया गया। जिले में एक तरफ उग्रा खेड़ी के स्टेडियम में चल रहा धरना और दूसरी तरफ रिफाइनरी के सामुदायिक केंद्र में चल रही जाट नेताओं की बैठक को लेकर सुरक्षा के मद्देनजर विशेष प्रबंध किए गए। सीआरपीएफ जवानों के साथ-साथ आरपीएफ के जवान भी उक्त स्थानों पर तैनात दिखे। दोनों स्थानों पर होमगार्ड के जवान तैनात दिखे। डीएसपी मुख्यालय जगदीप दूहन बैठक स्थल के साथ-साथ धरना स्थल पर पुलिस जवानों को खास हिदायतें देते रहे। दोनों स्थानों पर सुरक्षा के मद्देनजर डीएसपी ने पूरी चौकसी बरती।