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कहानियों के जरिये दिए बड़े-बड़े संदेश
ब्यूरो/अमर उजाला/ पानीपत
Updated Sat, 19 Nov 2016 12:05 AM IST
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पानीपत
- फोटो : bureau
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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ चालक डॉ. मोहन भागवत ने शुक्रवार को आर्य गर्ल्स पब्लिक स्कूल में जिले के स्वयं सेवकों को दृष्टांतों के जरिये एकजुट होने, लगनशील होने की सीख दी। भागवत ने कहा कि व्यक्ति को खुद की असावधानी ही डुबोती है।
इसे समझाने के लिए उन्होंने एक किसान की कहानी सुनाई। बोले, एक किसान के खेत में हर रोज कपास खा ली जाती थी। रखवाली करने पर उसने देखा कि एक हाथी स्वर्ग से आकर कपास खा जाता है। उसने अपने साथियों के साथ हाथी को पकड़ने की योजना बनाई।
हाथी आया तो उसकी पूंछ पकड़ ली। वह उड़ने लगा तो उसके साथी ने उसके साथी भी उसके सहारे चेन बनाकर हाथी के साथ उड़ने लगे। हाथी न किसान को बातों में उलझा लिया। उसकी बातों से आश्वस्त हो किसान ने हाथ ढीले छोड़ दिए और वह साथियों समेत जमीन पर आ गया।
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इसी तरह श्रीराम के अयोध्या लौटने पर सम्मान समारोह में हनुमान का दृष्टांत सुना उन्होंने स्वयंसेवकों को सत्यम सेवक बनने का संदेश दिया। कहा कि समारोह में सीता ने मोतियों की माला हनुमान को पहनाकर स्वागत किया।
हनुमान अपनी जगह बैठकर मोतियों को तोड़ने लगे तो लोगों ने इसका कारण पूछा। हनुमान ने जवाब दिया कि इन मोतियों में श्रीराम नहीं हैं। इसलिए यह उनके लिए बेकार हैं। एक स्वयंसेवक को संघ का कार्य भी इसी तरह करना चाहिए।
डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि एक कील ढीली होने पर भी राजा का सिंहासन चला जाता है। इसे स्पष्ट करने के लिए उन्होंने कहानी सुनाई। बोले-एक राज्य पर आक्रमण कर दिया गया। राजा को अपना राज्य बचाने के लिए पहाड़ी की चोटी पर पहुंचना था।
वह अपनी सेना लेकर आगे-आगे चल पड़ा। राजा का घोड़ा लंगड़ा रहा था। ऐसा नाल की एक कील ढीली होने के कारण हो रहा था। राजा ने इस बात को नजरअंदाज कर दिया और एक के बाद नाल की सारी कील निकल गई और नाल की गिर गई।
इससे घोड़े की गति कम हो गई। तो सेना की गति भी कम हो गई। दुश्मन की सेना राजा की सेना से पहले पहाड़ी की चोटी पर पहुंच गई। इस तरह एक छोटी चूक के चलते राजा को अपने राज से हाथ धोना पड़ा। सार ये कि व्यक्ति को छोटी-छोटी कमियों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
युवा व बुजुर्ग स्वयंसेवकों में भी दिखा जोश
आरएसएस के कार्यक्रम को लेकर युवा व बुजुर्ग स्वयंसेवकों में भी जोश दिखाई दिया। करीब चार सौ युवा व बुजुर्ग स्वयंसेवकों ने भागवत के सम्मुख शारीरिक और योग क्रियाओं का प्रदर्शन किया। स्वयंसेवकों ने सुरक्षा, यातायात व्यवस्था, जलपान, आगंतुकों को बैठाने, साफ-सफाई की पूरी व्यवस्था खुद की।
मंच के पीछे शार्ट सर्किट ने पैदा की हलचल
आएसएस के कार्यक्रम में सब कुछ शांति से चल रहा था। इसी वक्त मंच के पीछे बिजली की तारों में शार्ट सर्किट हो गया। यह कुछ अंतराल में दो बार हुआ। इससे मंच के नजदीक हलचल पैदा हो गई। सुरक्षाकर्मियों और स्वयं सेवकों ने जायजा लिया और व्यवधान को दूर किया।
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इसे समझाने के लिए उन्होंने एक किसान की कहानी सुनाई। बोले, एक किसान के खेत में हर रोज कपास खा ली जाती थी। रखवाली करने पर उसने देखा कि एक हाथी स्वर्ग से आकर कपास खा जाता है। उसने अपने साथियों के साथ हाथी को पकड़ने की योजना बनाई।
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हाथी आया तो उसकी पूंछ पकड़ ली। वह उड़ने लगा तो उसके साथी ने उसके साथी भी उसके सहारे चेन बनाकर हाथी के साथ उड़ने लगे। हाथी न किसान को बातों में उलझा लिया। उसकी बातों से आश्वस्त हो किसान ने हाथ ढीले छोड़ दिए और वह साथियों समेत जमीन पर आ गया।
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इसी तरह श्रीराम के अयोध्या लौटने पर सम्मान समारोह में हनुमान का दृष्टांत सुना उन्होंने स्वयंसेवकों को सत्यम सेवक बनने का संदेश दिया। कहा कि समारोह में सीता ने मोतियों की माला हनुमान को पहनाकर स्वागत किया।
हनुमान अपनी जगह बैठकर मोतियों को तोड़ने लगे तो लोगों ने इसका कारण पूछा। हनुमान ने जवाब दिया कि इन मोतियों में श्रीराम नहीं हैं। इसलिए यह उनके लिए बेकार हैं। एक स्वयंसेवक को संघ का कार्य भी इसी तरह करना चाहिए।
डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि एक कील ढीली होने पर भी राजा का सिंहासन चला जाता है। इसे स्पष्ट करने के लिए उन्होंने कहानी सुनाई। बोले-एक राज्य पर आक्रमण कर दिया गया। राजा को अपना राज्य बचाने के लिए पहाड़ी की चोटी पर पहुंचना था।
वह अपनी सेना लेकर आगे-आगे चल पड़ा। राजा का घोड़ा लंगड़ा रहा था। ऐसा नाल की एक कील ढीली होने के कारण हो रहा था। राजा ने इस बात को नजरअंदाज कर दिया और एक के बाद नाल की सारी कील निकल गई और नाल की गिर गई।
इससे घोड़े की गति कम हो गई। तो सेना की गति भी कम हो गई। दुश्मन की सेना राजा की सेना से पहले पहाड़ी की चोटी पर पहुंच गई। इस तरह एक छोटी चूक के चलते राजा को अपने राज से हाथ धोना पड़ा। सार ये कि व्यक्ति को छोटी-छोटी कमियों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
युवा व बुजुर्ग स्वयंसेवकों में भी दिखा जोश
आरएसएस के कार्यक्रम को लेकर युवा व बुजुर्ग स्वयंसेवकों में भी जोश दिखाई दिया। करीब चार सौ युवा व बुजुर्ग स्वयंसेवकों ने भागवत के सम्मुख शारीरिक और योग क्रियाओं का प्रदर्शन किया। स्वयंसेवकों ने सुरक्षा, यातायात व्यवस्था, जलपान, आगंतुकों को बैठाने, साफ-सफाई की पूरी व्यवस्था खुद की।
मंच के पीछे शार्ट सर्किट ने पैदा की हलचल
आएसएस के कार्यक्रम में सब कुछ शांति से चल रहा था। इसी वक्त मंच के पीछे बिजली की तारों में शार्ट सर्किट हो गया। यह कुछ अंतराल में दो बार हुआ। इससे मंच के नजदीक हलचल पैदा हो गई। सुरक्षाकर्मियों और स्वयं सेवकों ने जायजा लिया और व्यवधान को दूर किया।