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सुपर सकर मशीन खोलेगी शहर का जाम सीवर

Wed, 23 Apr 2014 12:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत Updated Wed, 23 Apr 2014 12:19 AM IST
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panipat, sewerage, machine
शहरवासियों को सीवर जाम से जूझना नहीं पड़ेगा और न ही संसाधन की कमी के नाम पर विभागीय टीम को पीछे हटना पड़ेगा।
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शहरवासियों व जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की समस्या का सुपर सकर मशीन समाधान करेगी और पूरी तरह से जाम सीवर को भी आसानी से खोला जा सकेगा।

करीब तीन करोड़ की दो सुपर सकर मशीन जिला स्तर पर पहुंच गई हैं और जल्द ही ट्रेंड कर्मियों के हाथ में मशीनों को सौंप दिया जाएगा।

औद्योगिक नगरी पानीपत में करीब 250 किलोमीटर लंबा सीवर है। बारिश के दिनों में हर बार सीवर जाम होने से लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता था।

आसमान में बादल छाते ही शहर पानी-पानी होने का डर सताने लग जाता था। स्वास्थ्य विभाग भी पर्याप्त संसाधन न होने पर सीवर जाम की समस्या का पूरी तरह से समाधान नहीं कर पाता था।

एक मशीन की कीमत है डेढ़ करोड़
सुपर शकर मशीन मंगलवार को जन स्वास्थ्य विभाग के जिला कार्यालय पर पहुंच गई है। एक मशीन की कीमत डेढ़ करोड़ रुपये बताई गई है।

मशीन के साथ 15 कर्मचारी काम करेंगे, जिसमें कंपनी की तरफ से चार चालक, चार हेल्पर व इंजीनियर होंगे और विभाग की तरफ से सीवरमैन साथ रहेंगे। इसका कंपनी के साथ अनुबंध किया गया है।
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मशीन ऐसे करेगी काम
एक मशीन के साथ तीन सेट होंगे। इसमें एक पानी का टैंक और दो मलबा उठाने वाले टैंक होंगे। पानी के टैंक की कैपेसिटी नौ हजार लीटर और मलबा उठाने वाले टैंक की कैपेसिटी 10 हजार लीटर होगी।
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जेटिंग टैंक सीवर में जमा मलबे को अपनी तरफ खींचेगा और दूसरे टैंक से पानी का प्रेशर दिया जाएगा, जिससे जाम सीवर को आसानी से खोला जा सकेगा।

यह होती थी परेशानी
शहर में संजय चौक, सनौली रोड, कई वार्डों और मॉडल टाउन में कई जगह सीवर जाम रहने की समस्या बनी रहती थी, जिसके समाधान को लेकर जनस्वास्थ्य विभाग लंबे समय से अच्छी गुणवत्ता और क्षमता वाली मशीन लाने के प्रयास में था।


विभागीय अधिकारियों की मानें तो कई बार सीवर में मृत पशु तक मिलता था। इसके अलावा कट्टे, बोरी और पॉलीथिन भी सीवर जाम का बड़ा कारण बनते थे।

विभागीय अधिकारी नगर निगम द्वारा नालों पर जाल न लगाने की कहते थे, जबकि नगर निगम अधिकारी अपने स्तर पर हरसंभव कदम उठाने का आश्वासन देते थे। जनस्वास्थ्य और नगर निगम के बीच लड़ाई की परेशानी शहर निवासियों को उठानी पड़ती थी।
 

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