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गीता के श्लोकों और मंत्रों से गूंजी औद्योगिक नगरी
amar ujala beuro panipat
Updated Sat, 10 Dec 2016 11:37 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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अंतरराष्ट्रीय जयंती महोत्सव पर नगर शोभायात्रा में शहर गीता के श्लोकों और मंत्रों से गूंज उठा और बच्चों से लेकर बड़ों तक ने भक्ति भाव के साथ शोभायात्रा में गीता के समक्ष अपनी हाजिरी लगाई। अलग-अलग टोलियों में बच्चे व महिलाएं भक्ति गीतों पर झूमती हुई यात्रा में शामिल हुई। शिवाजी स्टेडियम में गीता का सामूहिक पूजन विधि विधान के साथ किया गया।
अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के तीसरे दिन प्रात ठीक 10 बजे उपायुक्त डॉ. चंद्रशेखर खरे की देखरेख में प्राचीन शिव मंदिर हुडा 11-12 से पूरे विधि-विधान और पूजा अर्चना कर गीता जयंती शोभायात्रा का शुभारंभ किया। यात्रा साईं चौक से होते हुए सनौली रोड, संजय चौक, जीटी रोड, लालबत्ती, असंध रोड, रामलाल चौक से होते हुए शिवाजी स्टेडियम में पहुंची। यहां पंहुचने पर जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों, सभी धार्मिक संस्थाओं के पदाधिकारियों और नागरिकों ने शोभा यात्रा का स्वागत किया।
देखते बन रही थी शोभायात्रा की भव्यता
यूं तो इन तीन दिनों में पूरा शहर गीतामय हो गया, लेकिन शोभायात्रा की भव्यता देखते ही बनती थी। शोभायात्रा शहर के जिन-जिन मार्गों से होते हुए गुजरी, उन मार्गों के दोनों और पुष्प वर्षा कर गीता शोभायात्रा का स्वागत किया। शहर में अधिकतर मार्गों पर मुख्य द्वार बनाए गए। शहरवासियों ने भी शोभायात्रा को सराहनीय बताया।
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सांस्कृतिक गतिविधियों ने मोहा मन
शिवाजी स्टेडियम में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने की और समारोह की मुख्यातिथि जिला परिषद की चेयरपर्सन आशु शेरा रही। विशिष्ठ अतिथियों में उपायुक्त डॉ. चंद्रशेखर खरे, शहरी विधायक रोहिता रेवड़ी, समाजसेवी विजय लक्ष्मी पालीवाल, अतिरिक्त उपायुक्त राजीव मेहता, श्री कृष्ण कृपा सेवा समिति के प्रधान सुरेश अरोड़ा और उप प्रधान सुरज दुरेजा रहे। इस अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए और गीता आरती का आयोजन किया गया। स्वामी ज्ञानानन्द जी महाराज की मधुर वाणी में की गई गीता आरती में नगरवासियों ने जब अपना सुर मिलाया तो मानों पानीपत के शिवाजी स्टेडियम में कुरुक्षेत्र की गीता आरती का नजारा बन गया हो।
गीता केवल ग्रंथ नहीं बल्कि सामाजिक व धार्मिक वार्ता का ग्रंथ थी
गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि गीता महज एक उपदेश देने वाला ग्रंथ ही नहीं बल्कि मानव इतिहास की सबसे महान सामाजिक, धार्मिक, दार्शनिक और राजनैतिक वार्ता का ग्रंथ भी है। संसार की समस्त शुभता गीता में ही निहित है। गीता के उपदेश जगत कल्याण का सात्विक मार्ग और पराज्ञान का कुंड है। श्री कृष्ण अर्जुन रूपी मानव को धर्म समाज, राष्ट्र, राजनीति और कुटनीति की जो शिक्षा दी उसकी प्रसांगकिता आज भी बरकरार है। गीता भारतीय संस्कृति की आत्मा ही नहीं विश्व का एकमात्र ऐसा महान ग्रंथ है, जिसमें मानव जीवन की सभी समस्याओं का समाधान समाहित है और यह एकमात्र ऐसा ग्रंथ भी है, जिसकी जयंती मनाई जाती है। इस बार प्रदेश में हरियाणा स्वर्ण जयंती वर्ष मनाया जा रहा है।
गीता अमरवाणी, इसमें सात सौ श्लोक
गीता अमरवाणी है, इसमें सात सौ श्लोक हैं। जिनमे से 574 श्लोक भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए संदेश के रूप में हैं। इसी के दृष्टिगत इस बार अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के अवसर पर कुरूक्षेत्र में भारत के 574 जिलों से गीता के विद्वान अपने-अपने जिलों से मिट्टी लेकर आएं हैं और सभी ने एक सुर में गीता के 574 श्लोकों का उच्चारण किया है। यदि विश्व मे अमन शांति कायम करनी है तो विश्व मानव को गीता को अपनाना होगा।
राष्ट्र की पहचान शिक्षा व संस्कारों से : डीसी
डीसी डॉ. चंद्रशेखर खरे ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की पहचान, वहां के नागरिकों की शिक्षा, संस्कार और जीवन स्तर से होती है। यदि देश को महान बनाना है तो हमें गीता को जन-जन तक पहुंचाना होगा। उन्होंने शिवाजी स्टेडियम में लगाए गए सभी स्टालों की सराहना करते हुए कहा कि जिला के सभी अध्यापकों व छात्र-छात्राओं ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में पूरा सहयोग दिया है। शिक्षा विभाग द्वारा लगाए गए सभी स्टालों को देखकर वे अत्यधिक प्रभावित हुए हैं।
देश में सबसे पहले सभ्यता व संस्कृति का हुआ विकास
जिला परिषद चेयरपर्सन आशु शेरा ने कहा कि विश्व में सबसे पहले भारत में ही सभ्यता और संस्कृति का विकास हुआ। भारत की महान धार्मिक संस्कृति और उसके मूल्यों को समझने का ऐतिहासिक साहित्य साक्ष्य है। गीता इतिहास भी है, दर्शन शास्त्र भी है, समाज शास्त्र भी है और युद्ध कौशल का विज्ञान भी है। शहरी विधायक रोहिता रेवड़ी ने कहा कि गीता के प्रथम अध्याय में कुरुक्षेत्र के युद्ध स्थल में अर्जुन को मोहग्रस्त स्थिति से बाहर निकालने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने उपदेश दिया और गीता का जन्म हुआ। गीता जयंती आज सारे विश्व में एक साथ मनाई जा रही है और यदि इसी तरह प्रयास होते रहे तो अगले वर्ष भी गीता जयंती और भी भव्य तरीके से मनाई जाएगी। उन्होंने सभी नागरिकों को गीता जयंती कीे शुभकामनाएं दी।
ये लोग रहे मौजूद
इस समारोह में भाजपा के पूर्व जिला प्रधान गजेंद्र सलुजा, सुरेश कुमार, ज्योतिषाचार्य पंडित दाऊजी महाराज, एसडीएम विवेक चौधरी, समालखा एसडीएम गौरव कुमार, श्री कृष्ण कृपा समिति के प्रधान सुरेश अरोड़ा, देवेंद्र दत्ता, प्रदीप चौधरी, राजेश बतरा, सुनील ग्रोवर, कृष्ण नारंग, सुभाष मेहता, रमेश माटा, विजय लक्ष्मी पालीवाल, ओपी माटा, पुरूषोतम शर्मा, वीरेंद्र सोनी, राजकुमार झांब, अनिल कुमार, अवनीश ठाकुर, सुखदेव सिंह, दर्शन बवेजा, हरिओम तायल, कालू बजाज, पंकज वर्मा, अनिल शर्मा, रैडक्रास सचिव विकास कुमार, प्रदीप मलिक, ओमप्रकाश शास्त्री, सुमेर सिंह, सुमित्रा सांगवान, विभा वत्स जोगेंद्र सिंह, जयपाल शर्मा, बीईओ कौशल्या आर्य, पूनम चहल, नई दिल्ली के राजतंवर, योगेश नांगीु, वेद मक्कड़, हरिओम तायल, गीता मंदिन के प्रधान दर्शनलाल बवेजा, गुरुद्वारा पहली पातशाही के प्रधान सुखदेव सिंह, हरविंदर सिंह, हरभजन सिंह, राजेश सूरी, विजय लक्ष्मी पालीवाल, गुरु शरण सिंह बब्बू, कालू बजाज, पुरुषोत्तम शर्मा और श्याम मंडल समालखा के प्रधान सत्यवीर गुप्ता मौजूद रहे।
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अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के तीसरे दिन प्रात ठीक 10 बजे उपायुक्त डॉ. चंद्रशेखर खरे की देखरेख में प्राचीन शिव मंदिर हुडा 11-12 से पूरे विधि-विधान और पूजा अर्चना कर गीता जयंती शोभायात्रा का शुभारंभ किया। यात्रा साईं चौक से होते हुए सनौली रोड, संजय चौक, जीटी रोड, लालबत्ती, असंध रोड, रामलाल चौक से होते हुए शिवाजी स्टेडियम में पहुंची। यहां पंहुचने पर जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों, सभी धार्मिक संस्थाओं के पदाधिकारियों और नागरिकों ने शोभा यात्रा का स्वागत किया।
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देखते बन रही थी शोभायात्रा की भव्यता
यूं तो इन तीन दिनों में पूरा शहर गीतामय हो गया, लेकिन शोभायात्रा की भव्यता देखते ही बनती थी। शोभायात्रा शहर के जिन-जिन मार्गों से होते हुए गुजरी, उन मार्गों के दोनों और पुष्प वर्षा कर गीता शोभायात्रा का स्वागत किया। शहर में अधिकतर मार्गों पर मुख्य द्वार बनाए गए। शहरवासियों ने भी शोभायात्रा को सराहनीय बताया।
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सांस्कृतिक गतिविधियों ने मोहा मन
शिवाजी स्टेडियम में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने की और समारोह की मुख्यातिथि जिला परिषद की चेयरपर्सन आशु शेरा रही। विशिष्ठ अतिथियों में उपायुक्त डॉ. चंद्रशेखर खरे, शहरी विधायक रोहिता रेवड़ी, समाजसेवी विजय लक्ष्मी पालीवाल, अतिरिक्त उपायुक्त राजीव मेहता, श्री कृष्ण कृपा सेवा समिति के प्रधान सुरेश अरोड़ा और उप प्रधान सुरज दुरेजा रहे। इस अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए और गीता आरती का आयोजन किया गया। स्वामी ज्ञानानन्द जी महाराज की मधुर वाणी में की गई गीता आरती में नगरवासियों ने जब अपना सुर मिलाया तो मानों पानीपत के शिवाजी स्टेडियम में कुरुक्षेत्र की गीता आरती का नजारा बन गया हो।
गीता केवल ग्रंथ नहीं बल्कि सामाजिक व धार्मिक वार्ता का ग्रंथ थी
गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि गीता महज एक उपदेश देने वाला ग्रंथ ही नहीं बल्कि मानव इतिहास की सबसे महान सामाजिक, धार्मिक, दार्शनिक और राजनैतिक वार्ता का ग्रंथ भी है। संसार की समस्त शुभता गीता में ही निहित है। गीता के उपदेश जगत कल्याण का सात्विक मार्ग और पराज्ञान का कुंड है। श्री कृष्ण अर्जुन रूपी मानव को धर्म समाज, राष्ट्र, राजनीति और कुटनीति की जो शिक्षा दी उसकी प्रसांगकिता आज भी बरकरार है। गीता भारतीय संस्कृति की आत्मा ही नहीं विश्व का एकमात्र ऐसा महान ग्रंथ है, जिसमें मानव जीवन की सभी समस्याओं का समाधान समाहित है और यह एकमात्र ऐसा ग्रंथ भी है, जिसकी जयंती मनाई जाती है। इस बार प्रदेश में हरियाणा स्वर्ण जयंती वर्ष मनाया जा रहा है।
गीता अमरवाणी, इसमें सात सौ श्लोक
गीता अमरवाणी है, इसमें सात सौ श्लोक हैं। जिनमे से 574 श्लोक भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए संदेश के रूप में हैं। इसी के दृष्टिगत इस बार अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के अवसर पर कुरूक्षेत्र में भारत के 574 जिलों से गीता के विद्वान अपने-अपने जिलों से मिट्टी लेकर आएं हैं और सभी ने एक सुर में गीता के 574 श्लोकों का उच्चारण किया है। यदि विश्व मे अमन शांति कायम करनी है तो विश्व मानव को गीता को अपनाना होगा।
राष्ट्र की पहचान शिक्षा व संस्कारों से : डीसी
डीसी डॉ. चंद्रशेखर खरे ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की पहचान, वहां के नागरिकों की शिक्षा, संस्कार और जीवन स्तर से होती है। यदि देश को महान बनाना है तो हमें गीता को जन-जन तक पहुंचाना होगा। उन्होंने शिवाजी स्टेडियम में लगाए गए सभी स्टालों की सराहना करते हुए कहा कि जिला के सभी अध्यापकों व छात्र-छात्राओं ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में पूरा सहयोग दिया है। शिक्षा विभाग द्वारा लगाए गए सभी स्टालों को देखकर वे अत्यधिक प्रभावित हुए हैं।
देश में सबसे पहले सभ्यता व संस्कृति का हुआ विकास
जिला परिषद चेयरपर्सन आशु शेरा ने कहा कि विश्व में सबसे पहले भारत में ही सभ्यता और संस्कृति का विकास हुआ। भारत की महान धार्मिक संस्कृति और उसके मूल्यों को समझने का ऐतिहासिक साहित्य साक्ष्य है। गीता इतिहास भी है, दर्शन शास्त्र भी है, समाज शास्त्र भी है और युद्ध कौशल का विज्ञान भी है। शहरी विधायक रोहिता रेवड़ी ने कहा कि गीता के प्रथम अध्याय में कुरुक्षेत्र के युद्ध स्थल में अर्जुन को मोहग्रस्त स्थिति से बाहर निकालने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने उपदेश दिया और गीता का जन्म हुआ। गीता जयंती आज सारे विश्व में एक साथ मनाई जा रही है और यदि इसी तरह प्रयास होते रहे तो अगले वर्ष भी गीता जयंती और भी भव्य तरीके से मनाई जाएगी। उन्होंने सभी नागरिकों को गीता जयंती कीे शुभकामनाएं दी।
ये लोग रहे मौजूद
इस समारोह में भाजपा के पूर्व जिला प्रधान गजेंद्र सलुजा, सुरेश कुमार, ज्योतिषाचार्य पंडित दाऊजी महाराज, एसडीएम विवेक चौधरी, समालखा एसडीएम गौरव कुमार, श्री कृष्ण कृपा समिति के प्रधान सुरेश अरोड़ा, देवेंद्र दत्ता, प्रदीप चौधरी, राजेश बतरा, सुनील ग्रोवर, कृष्ण नारंग, सुभाष मेहता, रमेश माटा, विजय लक्ष्मी पालीवाल, ओपी माटा, पुरूषोतम शर्मा, वीरेंद्र सोनी, राजकुमार झांब, अनिल कुमार, अवनीश ठाकुर, सुखदेव सिंह, दर्शन बवेजा, हरिओम तायल, कालू बजाज, पंकज वर्मा, अनिल शर्मा, रैडक्रास सचिव विकास कुमार, प्रदीप मलिक, ओमप्रकाश शास्त्री, सुमेर सिंह, सुमित्रा सांगवान, विभा वत्स जोगेंद्र सिंह, जयपाल शर्मा, बीईओ कौशल्या आर्य, पूनम चहल, नई दिल्ली के राजतंवर, योगेश नांगीु, वेद मक्कड़, हरिओम तायल, गीता मंदिन के प्रधान दर्शनलाल बवेजा, गुरुद्वारा पहली पातशाही के प्रधान सुखदेव सिंह, हरविंदर सिंह, हरभजन सिंह, राजेश सूरी, विजय लक्ष्मी पालीवाल, गुरु शरण सिंह बब्बू, कालू बजाज, पुरुषोत्तम शर्मा और श्याम मंडल समालखा के प्रधान सत्यवीर गुप्ता मौजूद रहे।