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सीबीआई सरकार की हैंडलिंग एजेंसी जैसे चाहे कर देती है कार्रवाई : कादियान
amar ujala beuro panipat
Updated Wed, 18 Jan 2017 11:51 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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पूर्व स्पीकर एवं इनेलो के वरिष्ठ नेता सतबीर सिंह कादियान ने कहा सीबीआई सरकार की हैंडलिंग एजेंसी है। सरकार जिस भी नेता को फंसाना चाहे, सीबीआई के मार्फत कार्रवाई करा सकती है। सीबीआई द्वारा सरकार के इशारे पर फंसाया गया, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट में सीबीआई वकील अपने सबूत तक नहीं पेश कर सका और कोर्ट ने उनको कड़ी फटकार लगाई। कादियान ने स्पष्ट किया कि उन पर इफको मामले में 114 करोड़ नहीं बल्कि चार करोड़ रुपये का आरोप था।
पूर्व स्पीकर सतबीर सिंह कादियान दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत लेने के बाद पहली बार अपने आवास पर मीडिया से रूबरू हुए। कादियान ने पूरे मामले को स्पष्ट किया। कहा 26 मार्च 1999, को इफको के चेयरमैन बने थे। उनकी चेयरमैनशिप में इफ्को को पहले साल 18 करोड़ और दूसरे दिन तीन सौ करोड़ रुपये का प्रॉफिट हुआ था। इफ्को द्वारा बैंक ऑफ इंडिया को 12.60 प्रतिशत के हिसाब से ब्यान देने की बात कही थी, लेकिन बैंक ऑफ इंडिया ने इस ब्याज रेट पर पैसे लेने से मना कर दिया। उन्होंने युनाइटेड कमर्शियल बैंक को चार करोड़ रुपये 12.60 प्रतिशत के हिसाब से ब्याज पर दिए थे।
पूर्व स्पीकर ने बताया कि तत्कालीन सरकार द्वारा 1991 में फर्टिलाइजर के रेट बढ़ा दिए थे और उन्होंने विरोधस्वरूप 30 जुलाई 1991 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया। वे मार्च 1992 तक चेयरमैन के पद पर बने रहे। तत्कालीन सरकार द्वारा राजनीतिक द्वेष भावना रखते हुए उनको इस मामले में फंसा दिया, जबकि इस पूरे मामले में चेयरमैन की कोई भूमिका नहीं होती। उन पर 114 करोड़ रुपये की बात कही गई, जबकि पूरा मामला चार करोड़ रुपये का था। उन्होंने इन चार करोड़ रुपये में न तो खुद का और न ही किसी दूसरे का फायदा करने की नीयत से बैंक को दिया।
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सीबीआई की दलील पर ट्रायल कोर्ट ने उनको सात साल की कैद व 50 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुना दी, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट में सीबीआई के वकील किसी तरह के तथ्यों को पेश नहीं कर पाए। ऐसे में कोर्ट ने उनको लेकर ट्रायल कोर्ट के फैसले को सस्पेंड कर दिया और उनको स्थायी जमानत दे दी गई। इस मौके पर हरलाल मलिक, लाभ सिंह कादियान, रामपाल, जगबीर सिंह, बिजेंद्र कादियान, प्राण रत्नाकर, डॉ. यशपाल ढांडा, पुष्पेंद्र शर्मा, मास्टर जयसिंह, राजपाल फौजी, धर्मबीर राठी, कृष्ण चंदौली, अनूप राठी, महाबीर, धर्मवीर मान, केवल किशोर शर्मा, रघबीर सिंह, डॉ. रणबीर जोशी, निर्मल कादियान, नरेंद्र, महेंद्र कादियान व सुभाष बबैल मौजूद रहे।
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पूर्व स्पीकर सतबीर सिंह कादियान दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत लेने के बाद पहली बार अपने आवास पर मीडिया से रूबरू हुए। कादियान ने पूरे मामले को स्पष्ट किया। कहा 26 मार्च 1999, को इफको के चेयरमैन बने थे। उनकी चेयरमैनशिप में इफ्को को पहले साल 18 करोड़ और दूसरे दिन तीन सौ करोड़ रुपये का प्रॉफिट हुआ था। इफ्को द्वारा बैंक ऑफ इंडिया को 12.60 प्रतिशत के हिसाब से ब्यान देने की बात कही थी, लेकिन बैंक ऑफ इंडिया ने इस ब्याज रेट पर पैसे लेने से मना कर दिया। उन्होंने युनाइटेड कमर्शियल बैंक को चार करोड़ रुपये 12.60 प्रतिशत के हिसाब से ब्याज पर दिए थे।
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पूर्व स्पीकर ने बताया कि तत्कालीन सरकार द्वारा 1991 में फर्टिलाइजर के रेट बढ़ा दिए थे और उन्होंने विरोधस्वरूप 30 जुलाई 1991 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया। वे मार्च 1992 तक चेयरमैन के पद पर बने रहे। तत्कालीन सरकार द्वारा राजनीतिक द्वेष भावना रखते हुए उनको इस मामले में फंसा दिया, जबकि इस पूरे मामले में चेयरमैन की कोई भूमिका नहीं होती। उन पर 114 करोड़ रुपये की बात कही गई, जबकि पूरा मामला चार करोड़ रुपये का था। उन्होंने इन चार करोड़ रुपये में न तो खुद का और न ही किसी दूसरे का फायदा करने की नीयत से बैंक को दिया।
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सीबीआई की दलील पर ट्रायल कोर्ट ने उनको सात साल की कैद व 50 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुना दी, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट में सीबीआई के वकील किसी तरह के तथ्यों को पेश नहीं कर पाए। ऐसे में कोर्ट ने उनको लेकर ट्रायल कोर्ट के फैसले को सस्पेंड कर दिया और उनको स्थायी जमानत दे दी गई। इस मौके पर हरलाल मलिक, लाभ सिंह कादियान, रामपाल, जगबीर सिंह, बिजेंद्र कादियान, प्राण रत्नाकर, डॉ. यशपाल ढांडा, पुष्पेंद्र शर्मा, मास्टर जयसिंह, राजपाल फौजी, धर्मबीर राठी, कृष्ण चंदौली, अनूप राठी, महाबीर, धर्मवीर मान, केवल किशोर शर्मा, रघबीर सिंह, डॉ. रणबीर जोशी, निर्मल कादियान, नरेंद्र, महेंद्र कादियान व सुभाष बबैल मौजूद रहे।