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ओपीडी बंद, सरकार की नीतियों के विरोध में सड़कों पर उतरे डॉक्टर
ब्यूरो/अमर उजाला/ पानीपत
Updated Wed, 16 Nov 2016 11:49 PM IST
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पानीपत
- फोटो : bureau
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आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आह्वान पर जिले के निजी अस्पतालों को डॉक्टरों ने बुधवार को ओपीडी बंद रखकर रोष प्रकट किया और डीसी के मार्फत मांग पत्र सौंपा। निजी अस्पतालों में ओपीडी बंद होने के चलते मरीजों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
इस दौरान सिविल अस्पताल में मरीजों की मारामारी रही। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर बुधवार को टोलरेंस डे पर सत्याग्रह के दौरान दिल्ली के जंतर मंतर पर सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया। आईएमए के आह्वान पर जिले समेत प्रदेशभर के निजी अस्पतालों ने सुबह नौ से दोपहर 12 बजे तक ओपीडी बंद रखी।
ओपीडी बंद रहने से हजारों मरीजों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मरीजों को निजी अस्पतालों से बिना इलाज के ही लौटना पड़ा। निजी अस्पतालों में ओपीडी बंद रहने से सिविल अस्पताल में ओपीडी के लिए मरीजों की मारामारी रही। जिले भर के 135 निजी अस्पतालों के डॉक्टरों ने लघु सचिवायल में सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन कर उपायुक्त डॉ. चंद्रशेखर खरे को ज्ञापन सौंपा।
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आईएमए के जिला प्रधान डॉ. दीपक भारद्वाज ने कहा कि देश भर के निजी डॉक्टर पिछले लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार से लड़ाई लड़ रहे हैं। सरकार ने उन्हें मांगे माने जाने का कई बार आश्वासन भी दिया है, लेकिन सरकार की मंशा डॉक्टरों को परेशान करने वाली रही है।
अब डॉक्टरों ने सरकार के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। डॉ. भारद्वाज ने कहा कि डॉक्टर बहुत मुश्किल दौर से गुजर रहे है। वे सरकार से पीएनडीटी एक्ट में सुधार, चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए देश व्यापी कानून बनाने की मांग, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को रद्द करने की मांग,
क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट में पुलिस के हस्तक्षेप समाप्त करने की मांग, उपभोक्ता मामलों में मुआवजे की अधिकतम सीमा तय करने की मांग व डॉक्टरों ने जिस पैथी में शिक्षा प्राप्त की उसी पैथी में डॉक्टरों को इलाज करने की अनुमति देने की मांग कर रहे है,
लेकिन सरकार उनकी मांगों की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही। पीएनडीटी एक्ट पर काफी खामियां है। इन्हीं खामियों के कारण डॉक्टरों को बिना वजह सलाखों के पीछे जाना पड़ रहा है। उन्होंने अपने हकों की लड़ाई लडने का फैसला लिया है। बुधवार को देश भर के निजी अस्पतालों में सुबह तीन घंटे ओपीडी बंद रखी गई है।
आईएमए ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन कर बड़े आंदोलन के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी है। अगर सरकार ने छह सप्ताह में उनकी मांगों को नहीं माना तो आईएमए सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरेगी और सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा कर देगी।
पहले प्राइवेट व फिर सरकारी में गए मरीज
जिले के 135 प्राइवेट अस्पतालों में सुबह नौ से 12 बजे तक ओपीडी बंद रहने से मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। ओपीडी में डॉक्टर न मिलने पर मरीजों को या तो ओपीडी खुलने का इंतजार करना पड़ा या फिर सरकारी अस्पताल में जांच कराई।
आरती व संतोष ने बताया कि वह सुबह प्राइवेट अस्पताल में दवा लेने गई थी, लेकिन यहां ओपीडी बंद मिली। उसको फिर सरकारी अस्पताल में जाना पड़ा। यहां पर पहले से ही लंबी लाइन लगी हुई थी। उसको चेकअप कराने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।
आशीष व दीपक ने बताया कि उसका एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। वह बुधवार को अस्पताल में आ गया, लेकिन यहां पर डॉक्टर नहीं मिले। उसको ओपीडी खुलने का इंतजार करना पड़ा।
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इस दौरान सिविल अस्पताल में मरीजों की मारामारी रही। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर बुधवार को टोलरेंस डे पर सत्याग्रह के दौरान दिल्ली के जंतर मंतर पर सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया। आईएमए के आह्वान पर जिले समेत प्रदेशभर के निजी अस्पतालों ने सुबह नौ से दोपहर 12 बजे तक ओपीडी बंद रखी।
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ओपीडी बंद रहने से हजारों मरीजों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मरीजों को निजी अस्पतालों से बिना इलाज के ही लौटना पड़ा। निजी अस्पतालों में ओपीडी बंद रहने से सिविल अस्पताल में ओपीडी के लिए मरीजों की मारामारी रही। जिले भर के 135 निजी अस्पतालों के डॉक्टरों ने लघु सचिवायल में सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन कर उपायुक्त डॉ. चंद्रशेखर खरे को ज्ञापन सौंपा।
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आईएमए के जिला प्रधान डॉ. दीपक भारद्वाज ने कहा कि देश भर के निजी डॉक्टर पिछले लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार से लड़ाई लड़ रहे हैं। सरकार ने उन्हें मांगे माने जाने का कई बार आश्वासन भी दिया है, लेकिन सरकार की मंशा डॉक्टरों को परेशान करने वाली रही है।
अब डॉक्टरों ने सरकार के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। डॉ. भारद्वाज ने कहा कि डॉक्टर बहुत मुश्किल दौर से गुजर रहे है। वे सरकार से पीएनडीटी एक्ट में सुधार, चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए देश व्यापी कानून बनाने की मांग, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को रद्द करने की मांग,
क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट में पुलिस के हस्तक्षेप समाप्त करने की मांग, उपभोक्ता मामलों में मुआवजे की अधिकतम सीमा तय करने की मांग व डॉक्टरों ने जिस पैथी में शिक्षा प्राप्त की उसी पैथी में डॉक्टरों को इलाज करने की अनुमति देने की मांग कर रहे है,
लेकिन सरकार उनकी मांगों की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही। पीएनडीटी एक्ट पर काफी खामियां है। इन्हीं खामियों के कारण डॉक्टरों को बिना वजह सलाखों के पीछे जाना पड़ रहा है। उन्होंने अपने हकों की लड़ाई लडने का फैसला लिया है। बुधवार को देश भर के निजी अस्पतालों में सुबह तीन घंटे ओपीडी बंद रखी गई है।
आईएमए ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन कर बड़े आंदोलन के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी है। अगर सरकार ने छह सप्ताह में उनकी मांगों को नहीं माना तो आईएमए सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरेगी और सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा कर देगी।
पहले प्राइवेट व फिर सरकारी में गए मरीज
जिले के 135 प्राइवेट अस्पतालों में सुबह नौ से 12 बजे तक ओपीडी बंद रहने से मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। ओपीडी में डॉक्टर न मिलने पर मरीजों को या तो ओपीडी खुलने का इंतजार करना पड़ा या फिर सरकारी अस्पताल में जांच कराई।
आरती व संतोष ने बताया कि वह सुबह प्राइवेट अस्पताल में दवा लेने गई थी, लेकिन यहां ओपीडी बंद मिली। उसको फिर सरकारी अस्पताल में जाना पड़ा। यहां पर पहले से ही लंबी लाइन लगी हुई थी। उसको चेकअप कराने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।
आशीष व दीपक ने बताया कि उसका एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। वह बुधवार को अस्पताल में आ गया, लेकिन यहां पर डॉक्टर नहीं मिले। उसको ओपीडी खुलने का इंतजार करना पड़ा।