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बेटी पैदा होने पर जच्चा-बच्चा को छोड़ पति फुर्र
ब्यूरो/अमर उजाला पानीपत
Updated Tue, 08 Sep 2015 12:28 AM IST
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सिविल अस्पताल में परी को अपनी असल मां की गोद मिलने से पहले एक और नवजात बच्ची पिता के पुत्र मोह का शिकार हो गई। पिता ने न केवल बच्ची, बल्कि अपनी पत्नी को भी अपनाने से इनकार कर दिया।
वह दोनों को सिविल अस्पताल में छोड़कर अपनी मां के साथ फुर्र हो गया। मां का पति के जाने के बाद रोकर बुरा हाल है। स्वास्थ्य विभाग ने मामला सामने आने के बाद कार्रवाई शुरू कर दी है।
मामला सिविल अस्पताल पानीपत में पांच सितंबर का है और आज जच्चा महिला के रोने के बाद मामला सामने आया। प्रवासी महिला रिंकू का पति उसको सिविल अस्पताल में छोड़कर चला गया। उसके रोने की आवाज सुनकर डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ उसके पास पहुंचे।
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रिंकू ने बताया कि वे प्रवासी हैं और उसकी शादी मिथलेश के साथ हुई थी। मिथलेश राज मिस्त्री है और ज्योति कॉलोनी में रहता है। उसने बताया कि पांच सितंबर को उसको प्रसव पीड़ा हुई। उसका पति मिथलेश और सास उसको लेकर सिविल अस्पताल पहुंचे।
उसने यहां पर ऑपरेशन के बाद एक बच्ची को जन्म दिया। आरोप है कि उसी शाम को मिथलेश व उसकी मां उन दोनों मां-बेटी को छोड़कर चले गए। उसने उनका काफी इंतजार किया, लेकिन वे लौटकर नहीं आए। उसने बताया कि उसको इससे पहले एक लड़का और एक लड़की है।
वहीं पुलिस ने 17 जून को सिविल अस्पताल में जन्मी परी का डीएनए कराने के लिए फिर से कमर कस ली है और पुलिस ने मधुबन लैब से एक बार फिर समय लेने का फैसला लिया है।
हम बता दें कि 17 जून को सिविल अस्पताल में परी का जन्म हुआ था। डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ ने परी रामनगर निवासी कविता की लड़की बताया था। कविता ने 18 जून को एक लड़के को दूध पिलवाने व उसके हाथ पर अपने नाम टैग देखने पर हंगामा खड़ा कर दिया।
महिला कविता ने बच्ची को अपनाने से इनकार कर दिया। जिसमें थाना शहर में मुकदमा दर्ज किया गया। परिजनों ने उनका डीएनए टेस्ट कराने की मांग की। पुलिस ने मधुबन लैब से तीन बार समय मांगा, लेकिन परिजनों ने मधुबन जाने से इनकार कर दिया और तीसरी तारीख चार सितंबर को अंडर ग्राउंड हो गए।
जच्चा बच्चा वार्ड में एक महिला और उसकी नवजात बच्ची को छोड़ जाने का मामला सामने आया है। महिला फिलहाल अस्पताल में उपचाराधीन है। परिवार के लोग उसको लेने नहीं आते हैं तो विभाग अपने स्तर पर कार्रवाई करेगा।
डॉ. एसके गुप्ता, एमएस, सिविल अस्पताल पानीपत
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वह दोनों को सिविल अस्पताल में छोड़कर अपनी मां के साथ फुर्र हो गया। मां का पति के जाने के बाद रोकर बुरा हाल है। स्वास्थ्य विभाग ने मामला सामने आने के बाद कार्रवाई शुरू कर दी है।
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मामला सिविल अस्पताल पानीपत में पांच सितंबर का है और आज जच्चा महिला के रोने के बाद मामला सामने आया। प्रवासी महिला रिंकू का पति उसको सिविल अस्पताल में छोड़कर चला गया। उसके रोने की आवाज सुनकर डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ उसके पास पहुंचे।
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रिंकू ने बताया कि वे प्रवासी हैं और उसकी शादी मिथलेश के साथ हुई थी। मिथलेश राज मिस्त्री है और ज्योति कॉलोनी में रहता है। उसने बताया कि पांच सितंबर को उसको प्रसव पीड़ा हुई। उसका पति मिथलेश और सास उसको लेकर सिविल अस्पताल पहुंचे।
उसने यहां पर ऑपरेशन के बाद एक बच्ची को जन्म दिया। आरोप है कि उसी शाम को मिथलेश व उसकी मां उन दोनों मां-बेटी को छोड़कर चले गए। उसने उनका काफी इंतजार किया, लेकिन वे लौटकर नहीं आए। उसने बताया कि उसको इससे पहले एक लड़का और एक लड़की है।
वहीं पुलिस ने 17 जून को सिविल अस्पताल में जन्मी परी का डीएनए कराने के लिए फिर से कमर कस ली है और पुलिस ने मधुबन लैब से एक बार फिर समय लेने का फैसला लिया है।
हम बता दें कि 17 जून को सिविल अस्पताल में परी का जन्म हुआ था। डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ ने परी रामनगर निवासी कविता की लड़की बताया था। कविता ने 18 जून को एक लड़के को दूध पिलवाने व उसके हाथ पर अपने नाम टैग देखने पर हंगामा खड़ा कर दिया।
महिला कविता ने बच्ची को अपनाने से इनकार कर दिया। जिसमें थाना शहर में मुकदमा दर्ज किया गया। परिजनों ने उनका डीएनए टेस्ट कराने की मांग की। पुलिस ने मधुबन लैब से तीन बार समय मांगा, लेकिन परिजनों ने मधुबन जाने से इनकार कर दिया और तीसरी तारीख चार सितंबर को अंडर ग्राउंड हो गए।
जच्चा बच्चा वार्ड में एक महिला और उसकी नवजात बच्ची को छोड़ जाने का मामला सामने आया है। महिला फिलहाल अस्पताल में उपचाराधीन है। परिवार के लोग उसको लेने नहीं आते हैं तो विभाग अपने स्तर पर कार्रवाई करेगा।
डॉ. एसके गुप्ता, एमएस, सिविल अस्पताल पानीपत