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जिसके मन में हिंदू हिंदी भाषा का सत्कार नहीं, उसको हिंदुस्तान में रहने का कोई अधिकार नहीं

Tue, 10 Jan 2017 11:57 PM IST
amar ujala beuro panipat
amar ujala beuro panipat Updated Tue, 10 Jan 2017 11:57 PM IST
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panipat, kaby gosthi
dhh - फोटो : amar ujala
 हाली किताब घर में विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में काव्य गोष्ठी में हिंदी पर अपनी कविताओं की शानदार प्रस्तुतियां दी। मीडिया क्लब पानीपत द्वारा आयोजित गोष्ठी में मुख्य अतिथि हरीश कमल झांब व विशिष्ट अतिथि इकबाल पानीपती रहे। अध्यक्षता रमेश चंद्र पानीपती व मंच संचालन बीजेंद्र जैमिनी ने किया।
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ओमदत्त आर्य ने कहा कि जिसकी भाषा भेष खत्म हो जाए, रह कौन ना जिंदी, भारत मां के माथे ना ढलने देवो बिंदी, हिंदुस्तान रहेगा तब तक, जब तक रहेगी हिंदी।।
रमेश चंद्र पुहाल पानीपती ने कहा कि रात अंधेरी और ये हवाएं, हम किस को आवाज लगाएं, काश मेरे एहसास पुहाल, औरों के सुख-दुख बस जाएं।।


हरीश कमल झांब ने कहा कि बस बच्चों को सिखला दो, हिंदी कभी भी छोड़े ना, हिंदी हमारी मातृभाषा है, इससे कभी नाता तोड़े ना, फिर ढोल ढिंढोरे की ना जरुरत, आओ और अपनाओ इसे, हिंदी खुद ही छा जाएगी, मृदुता ही इसकी छोड़े ना।।
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केसर कमल शर्मा ने कहा कि माथे की शोभा बिंदी है, भाषा की शोभा हिंदी है, गैरों पर भी ममता करती है, ये हिंदी की भाषा हिंदी है।।
मदन मोहन ने कहा कि गंगा-गोदावरी की कल-कल में हिंदी है, हिंदुस्तान की मातृभाषा शान में हिंदी है।।


धर्मेंद्र अरोड़ा मुसाफिर ने कहा कि ईश्वर का उपहार जिंदगी, एक निराला प्यार जिंदगी, गर न वक्त साथ चली तो बन जाती है खार जिंदगी।।


डॉ. दर्शनलाल आजाद ने कहा कि गर मीडिया चाहे तो यह सारा समाज बदले, मीडिया चाहे तो गलत रस्मों रिवाज बदले, मीडिया की महान शक्ति को करता हूं नमन, गर मीडिया चाहे तो हर तखते ताज बदले।।
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मदनलाल आजाद ने कहा कि हिंदी दिवस तो पूरे विश्प में हर वर्ष सब मनाते हैं, पर अफसोस हिंदी के कवि भी शुद्ध हिंदी में कविता नहीं सुनाते हैं।।
कमलेश कुमार पालीवाल ने कहा कि हिंदी अपनी मातृभाषा फिर क्यों अंग्रेजी ठहरी है, ज्ञान ठंडी छाव है, अज्ञान तपती दुपहरी है।।

निर्मल आर्या ने कहा कि भारती के जन-जन की पहचान है हिंदी, सभ्यता, संस्कृति का उत्थान है हिंदी, गर्व हम करते रहे रच राष्ट्र भाषा पर, देश का सिरमौर है अभिमान है हिंदी।।

सुलेख जैन ने कहा कि जिसके मन में हिंदू हिंदी भाषा का सत्कार नहीं, उसको हिंदुस्तान में रहने का कोई अधिकार नहीं, भटकी युवा पीढ़ी को हम फिर सन्मार्ग पे लाएंगे, हिंदी के फूलों में सुलेख सदैव खुशबू का वास पाएंगे।
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