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लोगों पर फर्जीवाड़े का आरोप लगाने वाला हुडा खुद कर रहा फर्जीवाड़ा
amar ujala beuro panipat
Updated Sun, 01 Jan 2017 11:37 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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हुडा सेक्टरों में प्लाटों की अलॉटमेंट के फर्जीवाड़े के साथ कंपलीएशन रिपोर्ट जारी करने में भी बड़ा फर्जीवाड़ा चल रहा है। कई अधिकारी आर्किटेक्टों के साथ मिलकर विभाग के नियमों की धज्जियां उड़ाकर खुद फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। अधिकारियों ने हुडा सेक्टर-17 स्थित एक निर्माणाधीन मकान की फर्जी तरीके से कंपलीएशन रिपोर्ट जारी कर दी। जबकि मकान अब तक आधा भी बनकर तैयार नहीं हो पाया है। मामला सामने आने के बाद अब पसीने छूटे हुए हैं।
हुडा फर्जी तरीके से प्लाट अलॉट कराने वालों पर खुद मुकदमा दर्ज करा रहा है, लेकिन हुडा में अंदरखाते प्लाटों की कंपलीएशन में बड़ा फर्जीवाड़ा चल रहा है। हुडा द्वारा सेक्टर-17 स्थित एक मकान का तीन अक्तूबर 2016 को ऑकूपेशन सर्टिफिकेट जारी किया गया है। अमर उजाला ने अपुष्ट सूत्र द्वारा सटीक जानकारी देने के बाद प्लाट को देखा गया तो मकान अनकंपलीट मिला। सही मायने में तो प्लाट पर अब तक करीब 50 प्रतिशत ही निर्माण पूरा हुआ है।
ऐसे मिलता है ऑकूपेशन सर्टिफिकेट
हुडा के अनुसार पहले किसी भी निर्माण पर कंपलीएशन सर्टिफिकेट दिया जाता था। अब रूल 2007 के बाद सेल्फ कंपलीएशन ऑकूपेशन स्कीम के तहत सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। संबंधित व्यक्ति आर्किटेक्ट के माध्यम शपथ पत्र देकर ऑकूपेशन सर्टिफिकेट के अप्लाई कर सकता है। इसमें मकान मालिक द्वारा की गई वाइलेशन को दर्शाया जाता है। हुडा को नियमानुसार सात दिन के अंदर इसका सर्टिफिकेट जारी करना होगा। हुडा इसके बाद ही निर्माण का मौका देखता है।
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गलत पाए जाने पर लाइसेंस हो सकता है रद्द
हुडा अधिकारी ऑकूपेशन सर्टिफिकेट जारी करने के बाद मौका मुआयना करते हैं। अधिकारियों को निरीक्षण के दौरान शपथ पत्र में दर्शाई गई वाइलेशन से अधिक कमी मिलती है तो संबंधित मकान मालिक व आर्किटेक्ट पर कार्रवाई कर सकता है। हुडा भी इसको धोखाधड़ी में शामिल करता है। हुडा आर्किटेक्ट के खिलाफ कौंसिल आर्किटेक्ट ऑफ इंडिया को लिख सकता है। कौंसिल आर्किटेक्ट ऑफ इंडिया पूरे मामले की जांच करती है और आरोपी साबित होने पर आर्किटेक्ट का लाइसेंस सस्पेंड किया जा सकता है। कौंसिल द्वारा एक बार आर्किटेक्ट का लाइसेंस सस्पेंड करने के बाद दोबारा अप्लाई तक नहीं कर सकता।
आठ लोगों पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज
हुडा सेक्टरों में फर्जी तरीके से प्लाट अलॉट कराने के मामलों का लगातार भंडा फूट रहा है। पुलिस ईओ हुडा की शिकायत पर हर रोज मुकदमा दर्ज कर रही है। पुलिस ईओ हुडा की शिकायत पर शनिवार को आठ मुकदमें दर्ज किए हैं। पुलिस के अनुसार अरविंद मोहन मेहरा निवासी दयानंद कॉलोनी मॉडल टाउन करनाल ने सेक्टर आठ में फीर्जी डॉक्यूमेंट के आधार पर प्लाट अलॉट करा लिया। वहीं बीरमती वार्ड-दो गढ़ी मोहल्ला रोहतक ने सेक्टर-13, प्रदीप कुमार वेस्ट रामनगर सोनीपत ने सेक्टर-13, दर्शना देवी निवासी मॉडर्न गार्ड न्यू दिल्ली सेक्टर-24, वेद प्रकाश निवासी घीर जिला करनाल ने सेक्टर-24, महेंद्र सिंह निवासी खन्ना रोड कृष्णपुरा सेक्टर-24, पवन कुमार निवासी अबोहर फिरोजपुर पंजाब सेक्टर-24 और करण सिंह यादव निवासी सेक्टर-23 गुडग़ांव ने सेक्टर-24 व सेक्टर-25-टू में प्लाट अलॉट करा लिए हैं। पुलिस ने ईओ हुडा की शिकायत के आधार पर सभी आरोपियों पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर लिया है।
हुडा सेक्टर-17 में अनकंपलीट प्लाटों की कंपलीएशन रिपोर्ट जारी होना नियमों के विरुद्ध है। मेरे संज्ञान में ऐसा मामला नहीं था। उक्त प्लाट का कंपलीएशन रिपोर्ट विड्रो कर लिया जाएगा। वे आगे भी इस तरफ ध्यान रखेंगे।
देवेंद्र मलिक, एसडीओ, हुडा पानीपत।
अधिकारियों व कर्मचारियों को इमानदारी व निष्ठा के साथ काम करने की बार-बार हिदायत दी जाती है। हुडा में इस तरह की अनदेखी बरती गई है तो इसकी जांच कराई जाएगी। दोषी अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. चंद्रशेखर खरे, डीसी, पानीपत।
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हुडा फर्जी तरीके से प्लाट अलॉट कराने वालों पर खुद मुकदमा दर्ज करा रहा है, लेकिन हुडा में अंदरखाते प्लाटों की कंपलीएशन में बड़ा फर्जीवाड़ा चल रहा है। हुडा द्वारा सेक्टर-17 स्थित एक मकान का तीन अक्तूबर 2016 को ऑकूपेशन सर्टिफिकेट जारी किया गया है। अमर उजाला ने अपुष्ट सूत्र द्वारा सटीक जानकारी देने के बाद प्लाट को देखा गया तो मकान अनकंपलीट मिला। सही मायने में तो प्लाट पर अब तक करीब 50 प्रतिशत ही निर्माण पूरा हुआ है।
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ऐसे मिलता है ऑकूपेशन सर्टिफिकेट
हुडा के अनुसार पहले किसी भी निर्माण पर कंपलीएशन सर्टिफिकेट दिया जाता था। अब रूल 2007 के बाद सेल्फ कंपलीएशन ऑकूपेशन स्कीम के तहत सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। संबंधित व्यक्ति आर्किटेक्ट के माध्यम शपथ पत्र देकर ऑकूपेशन सर्टिफिकेट के अप्लाई कर सकता है। इसमें मकान मालिक द्वारा की गई वाइलेशन को दर्शाया जाता है। हुडा को नियमानुसार सात दिन के अंदर इसका सर्टिफिकेट जारी करना होगा। हुडा इसके बाद ही निर्माण का मौका देखता है।
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गलत पाए जाने पर लाइसेंस हो सकता है रद्द
हुडा अधिकारी ऑकूपेशन सर्टिफिकेट जारी करने के बाद मौका मुआयना करते हैं। अधिकारियों को निरीक्षण के दौरान शपथ पत्र में दर्शाई गई वाइलेशन से अधिक कमी मिलती है तो संबंधित मकान मालिक व आर्किटेक्ट पर कार्रवाई कर सकता है। हुडा भी इसको धोखाधड़ी में शामिल करता है। हुडा आर्किटेक्ट के खिलाफ कौंसिल आर्किटेक्ट ऑफ इंडिया को लिख सकता है। कौंसिल आर्किटेक्ट ऑफ इंडिया पूरे मामले की जांच करती है और आरोपी साबित होने पर आर्किटेक्ट का लाइसेंस सस्पेंड किया जा सकता है। कौंसिल द्वारा एक बार आर्किटेक्ट का लाइसेंस सस्पेंड करने के बाद दोबारा अप्लाई तक नहीं कर सकता।
आठ लोगों पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज
हुडा सेक्टरों में फर्जी तरीके से प्लाट अलॉट कराने के मामलों का लगातार भंडा फूट रहा है। पुलिस ईओ हुडा की शिकायत पर हर रोज मुकदमा दर्ज कर रही है। पुलिस ईओ हुडा की शिकायत पर शनिवार को आठ मुकदमें दर्ज किए हैं। पुलिस के अनुसार अरविंद मोहन मेहरा निवासी दयानंद कॉलोनी मॉडल टाउन करनाल ने सेक्टर आठ में फीर्जी डॉक्यूमेंट के आधार पर प्लाट अलॉट करा लिया। वहीं बीरमती वार्ड-दो गढ़ी मोहल्ला रोहतक ने सेक्टर-13, प्रदीप कुमार वेस्ट रामनगर सोनीपत ने सेक्टर-13, दर्शना देवी निवासी मॉडर्न गार्ड न्यू दिल्ली सेक्टर-24, वेद प्रकाश निवासी घीर जिला करनाल ने सेक्टर-24, महेंद्र सिंह निवासी खन्ना रोड कृष्णपुरा सेक्टर-24, पवन कुमार निवासी अबोहर फिरोजपुर पंजाब सेक्टर-24 और करण सिंह यादव निवासी सेक्टर-23 गुडग़ांव ने सेक्टर-24 व सेक्टर-25-टू में प्लाट अलॉट करा लिए हैं। पुलिस ने ईओ हुडा की शिकायत के आधार पर सभी आरोपियों पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर लिया है।
हुडा सेक्टर-17 में अनकंपलीट प्लाटों की कंपलीएशन रिपोर्ट जारी होना नियमों के विरुद्ध है। मेरे संज्ञान में ऐसा मामला नहीं था। उक्त प्लाट का कंपलीएशन रिपोर्ट विड्रो कर लिया जाएगा। वे आगे भी इस तरफ ध्यान रखेंगे।
देवेंद्र मलिक, एसडीओ, हुडा पानीपत।
अधिकारियों व कर्मचारियों को इमानदारी व निष्ठा के साथ काम करने की बार-बार हिदायत दी जाती है। हुडा में इस तरह की अनदेखी बरती गई है तो इसकी जांच कराई जाएगी। दोषी अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. चंद्रशेखर खरे, डीसी, पानीपत।