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दुर्गा अष्टमी आज, मां के भक्तों ने तैयारी की पूरी
amar ujala beuro panipat
Updated Sun, 09 Oct 2016 12:29 AM IST
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- फोटो : j
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शारदीय नवरात्र को लेकर हर तरफ मां दुर्गा के जयकारे और घंट-घडिय़ाल से मंदिर गूंज रहे हैं। सातवें दिन प्राचीन देवी मंदिर में कालरात्रि की पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। सुबह से देर शाम तक भक्तों की लाइन लगी रही। मां की एक झलक पाने के लिए भक्त बेताब दिखे। शनिवार को महाष्टमी को लेकर भी तैयारियां पूरी कर ली गई है। इसको लेकर बाजारों में खरीदारी चलती रही।
शनिवार को महाअष्टमी को देखते हुए मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया है। चारों तरफ लाइट की जगमगाहट से मंदिर की छटां ही अलग दिखाई पड़ रही है। प्राचीन देवी मंदिर में शनिवार को मां के सातवें स्वरूप कालरात्रि की पूजा अर्चना की गई। मंदिर में प्रात: तीन बजे ही भक्त मां के दर्शन करने को पहुंच गए। अल सुबह में मंदिर के कपाट खुलते ही मां के दर्शन करने को भक्त उमड़ पड़े।
देवी मंदिर में कहीं पर भी पैर रखने तक को रास्ता नहीं मिला। भक्त और बच्चों ने मेले में जमकर आनंद लिया। पंडित लालमणि पांडेय ने बताया कि नवरात्र के सातवें दिन दुर्गा मां के सातवें स्वरूप देवी कालरात्रि के दर्शन-पूजन का विधान है। इसी के तहत लोगों ने पूजा अर्चना की। उन्होंने बताया कि भगवती कालरात्रि की उपासना से सभी तरह के भय से मुक्ति मिलती है। मन से साधना व अराधना करने से देवी कालरात्रि भौतिक तापों का नाश करती है।
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जमकर हुई खरीदारी
दुर्गा अष्टमी को लेकर बाजारों में जमकर खरीदारी हुई। कंजकों को गिफ्ट देने के लिए औरतें खरीदारी करती दिखी। हालांकि पिछले वर्ष की अपेक्षा अबकी बार सामान के रेट तीन गुना बढ़े हुए मिले। वहीं लोगों ने पूजा पाठ के लिए भी सामान की खरीदारी की गई। विद्वानों के अनुसार दुर्गाष्टमी पर अल सुबह कढ़ाई कर मां को भोग लगाना शुभकारी होता है।
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शनिवार को महाअष्टमी को देखते हुए मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया है। चारों तरफ लाइट की जगमगाहट से मंदिर की छटां ही अलग दिखाई पड़ रही है। प्राचीन देवी मंदिर में शनिवार को मां के सातवें स्वरूप कालरात्रि की पूजा अर्चना की गई। मंदिर में प्रात: तीन बजे ही भक्त मां के दर्शन करने को पहुंच गए। अल सुबह में मंदिर के कपाट खुलते ही मां के दर्शन करने को भक्त उमड़ पड़े।
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देवी मंदिर में कहीं पर भी पैर रखने तक को रास्ता नहीं मिला। भक्त और बच्चों ने मेले में जमकर आनंद लिया। पंडित लालमणि पांडेय ने बताया कि नवरात्र के सातवें दिन दुर्गा मां के सातवें स्वरूप देवी कालरात्रि के दर्शन-पूजन का विधान है। इसी के तहत लोगों ने पूजा अर्चना की। उन्होंने बताया कि भगवती कालरात्रि की उपासना से सभी तरह के भय से मुक्ति मिलती है। मन से साधना व अराधना करने से देवी कालरात्रि भौतिक तापों का नाश करती है।
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जमकर हुई खरीदारी
दुर्गा अष्टमी को लेकर बाजारों में जमकर खरीदारी हुई। कंजकों को गिफ्ट देने के लिए औरतें खरीदारी करती दिखी। हालांकि पिछले वर्ष की अपेक्षा अबकी बार सामान के रेट तीन गुना बढ़े हुए मिले। वहीं लोगों ने पूजा पाठ के लिए भी सामान की खरीदारी की गई। विद्वानों के अनुसार दुर्गाष्टमी पर अल सुबह कढ़ाई कर मां को भोग लगाना शुभकारी होता है।