शहर की कई कालोनियों में गहरा सकता है पानी का संकट!

अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत Updated Thu, 08 May 2014 06:34 PM IST
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गर्मी की आहट के साथ ही कई कालोनियों में पेयजल के संकट का असर दिखाई देने लगा है। शहर की करीब सात लाख की आबादी के लिए नॉर्म्स के मुताबिक 95 एमएलडी पानी चाहिए, जबकि मिल रहा है सिर्फ 60 एमएलडी।
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जनस्वास्थ्य विभाग का दावा है कि उनकी ओर से रोजाना दिन में दो टाइम कई-कई घंटे पानी की सप्लाई दी जा रही है मगर वास्तविकता यह है कि विभाग के पास जेनरेटर न होने के कारण अगर बत्ती गुल हो गई तो समझो पानी भी गया। ऐसे में शहर की जनता विभाग के दावाें से इत्तेफाक नहीं रखती।
एमरजेंसी के लिए भी विभाग पर नहीं साधन
बिजली जाने पर ट्यूबवेल न चलने की स्थिति में कालोनियाें में पानी सप्लाई करने के लिए विभाग के पास एक भी टैंकर नहीं है।

विभाग का दावा है कि ऐसी स्थिति में टैंकर किराए पर ले लेते हैं, लेकिन शायद ही किसी कालोनी में एमरजेंसी में टैंकर से पानी की सप्लाई मिली हो।

वहीं, बत्ती गुल होने पर ट्यूबवेल को चलाने के लिए सिर्फ पुराना किला मैदान बूस्टर पर मात्र दो जेनरेटर रखे हैं। अगर बिजली गुल हो गई तो समझो पानी नहीं मिलेगा।

ठप हुए 12, मंजूरी मिली छह की
पिछले साल शहर के 181 ट्यूबवेलों में से 12 ठप हो गए थे। ऐसे में 169 ट्यूबवेलों के सहारे काम चल रहा है। इस दौरान पानी की डिमांड बढ़ी है जबकि साधन यानी की ट्यूबवेलों की संख्या घटी है। इन हालात में विभाग पर पानी की सप्लाई को कायम रखने का जबरदस्त दबाव है। सर्दियां में डिमांड कम होने के कारण सीजन निकल गया मगर असली परीक्षा अब गर्मियाें में होगी।

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गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत बढ़ गई है। जब पानी की सप्लाई का समय आता है तो बत्ती गुल हो जाती है। जब बिजली आती है तब तक ऑपरेटर नलकूप का ताला लगाकर निकल जाते हैं। टंकी में पर्याप्त पानी नहीं होने के कारण गंदे कपड़ाें का ढेर लग जाता है। विभाग दावाें तक सीमित है जबकि सच्चाई कुछ और ही है।
-अमृता मान, गृहिणी

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गर्मी का सीजन शुरू होते ही पानी के संकट ने भी पैर पसार लिए। पानी जरूरत के हिसाब से नहीं मिल रहा। नहाने, कपड़े धोने व घर की सफाई के लिए पूरा पानी मिलना चाहिए अन्यथा जनजीवन प्रभावित सा होता जाता है। एमरजेंसी के लिए विभाग के बाद कोई प्रबंध नहीं है। आला अधिकारियों को इस बारे में सोचना चाहिए।
-रेणुका वर्मा, गृहिणी

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आंधी के कारण बिजली जाते ही पानी की आपूर्ति ठप जाती है। इतने बडे़ विभाग के पास बिजली जाने के बाद पानी सप्लाई के कोई प्रबंध नहीं। यह अपने आप में शर्मनाक बात है।
-कलावती मिश्रा, गृहिणी

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उनके मोहल्ले में सुबह सवेरे पांच बजे पानी आता है। अकसर पानी का प्रेशर कम होता है। सुबह पानी भरने में अगर जरा सी चूक हुई तो समझो सारा दिन पानी की मारामारी में गुजरेगा। नहाने, कपडे़ धोने व अन्य जरू री काम निपटाना के बारे में तो सोच ही नहीं सकते।
-मंजू, वीवर्स कालोनी

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सुबह की शुरूआत पानी की चिंता के साथ होती है। सुबह पानी भरने के लिए आपको सुबह घर के सारे कामकाज छोड़ने पड़ेंगे। ऐसा करने के बाद भी गारंटी नहीं कि आप पूरा पानी स्टोर कर पाए। कारण बिजली ने झटका दे दिया तो सारा काम खराब हो जाएगा। उसके बाद पानी आने की कोई गारंटी नहीं।
-शकुंतला, वीवर्स कालोनी

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गर्मी के सीजन में पानी का संकट बढ़ता जा रहा है। कई बार तो प्रेशर बिल्कुल ही नहीं मिल पाता। टंकी भरने से पहले ही सप्लाई बंद हो जाती है। ऐसे में दिनभर पानी की कटौती के साथ दिनचर्या चलती है।
-मीना पांडे, गृहिणी



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