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सरकारी अस्पताल में नवजात की मौत
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
Updated Thu, 03 Jul 2014 12:28 AM IST
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सिविल अस्पताल में डिलीवरी के साढ़े 16 घंटे बाद एक नवजात बच्चे की मौत हो गई। परिजनों ने डाक्टरों पर अनदेखी का आरोप लगाते रोष व्यक्त किया। चिकित्सकों ने नवजात की मौत का कारण गर्भ में मल-मूत्र निकलना बताया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
फरीदपुर निवासी विनोद ने बताया कि उसने अपनी पत्नी कमलेश को दो दिन पहले अस्पताल में डिलीवरी के लिए दाखिल कराया। अस्पताल के डाक्टरों ने ऑपरेशन से बच्चे को बाहर निकाला और उसको आईसीयू में ले गए।
आरोप है कि डाक्टरों ने जच्चा व बच्चा की स्थिति को स्पष्ट नहीं किया और उनको इस मामले में गुमराह कर दिया। वे डाक्टरों पर भरोसा कर निश्ंिचत रहे, लेकिन साढ़े 16 घंटे बाद डाक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया।
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परिजनों के रोष को बढ़ता देख सिविल अस्पताल प्रशासन ने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर नवजात बच्चे के शव को कब्जे में ले लिया। पुलिस ने परिजनों के बयान दर्ज किए और पोस्टमार्टम कराकर नवजात का शव परिजनों को सौंप दिया।
मलमूत्र निकलने से हुई मौत
सिविल अस्पताल के डॉ. विजय गोयल ने बताया कि कमलेश का ऑपरेशन कर बच्चे को बाहर निकाला था। बच्चे ने गर्भ में ही मूल मूत्र (निकोनियम पास) कर दिया था। जन्म के बाद बच्चे की धड़कन बहुत कम थी और पानी भी खत्म हो चुका था। उसका नर्सरी में इलाज शुरू कर दिया गया था। अपने स्तर पर नवजात को बचाने का काफी प्रयास किया, लेकिन अफसोस है।
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फरीदपुर निवासी विनोद ने बताया कि उसने अपनी पत्नी कमलेश को दो दिन पहले अस्पताल में डिलीवरी के लिए दाखिल कराया। अस्पताल के डाक्टरों ने ऑपरेशन से बच्चे को बाहर निकाला और उसको आईसीयू में ले गए।
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आरोप है कि डाक्टरों ने जच्चा व बच्चा की स्थिति को स्पष्ट नहीं किया और उनको इस मामले में गुमराह कर दिया। वे डाक्टरों पर भरोसा कर निश्ंिचत रहे, लेकिन साढ़े 16 घंटे बाद डाक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया।
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परिजनों के रोष को बढ़ता देख सिविल अस्पताल प्रशासन ने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर नवजात बच्चे के शव को कब्जे में ले लिया। पुलिस ने परिजनों के बयान दर्ज किए और पोस्टमार्टम कराकर नवजात का शव परिजनों को सौंप दिया।
मलमूत्र निकलने से हुई मौत
सिविल अस्पताल के डॉ. विजय गोयल ने बताया कि कमलेश का ऑपरेशन कर बच्चे को बाहर निकाला था। बच्चे ने गर्भ में ही मूल मूत्र (निकोनियम पास) कर दिया था। जन्म के बाद बच्चे की धड़कन बहुत कम थी और पानी भी खत्म हो चुका था। उसका नर्सरी में इलाज शुरू कर दिया गया था। अपने स्तर पर नवजात को बचाने का काफी प्रयास किया, लेकिन अफसोस है।