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ओपीडी 300 पार, दवा को मोहताज
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पानीपत। सिविल अस्पताल में कचरा नंबर-15 के बाहर लगी हुई मरीजों की भारी भीड़।
- फोटो : Panipat
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पानीपत। सिविल अस्पताल की व्यवस्थाएं सालों बाद भी नहीं सुधरी हैं। अस्पताल में दवाओं का टोटा सालों से बना है। दवाओं का पूरा स्टॉक उपलब्ध ही नहीं हो पता। नतीजा मरीजों के लिए बाहर से दवाएं लेना मजबूरी है। बच्चों की खांसी-जुकाम की दवा तक नहीं मिल रही है। ऐसे में मरीजों को बाहर से दवा लेनी पड़ती है।
अस्पताल में सबसे अधिक रोगी वायरल के आ रहे हैं। सोमवार को वायरल की ओपीडी 320 पहुंच गई। दो डॉक्टरों की टीमों ने लोगों की जांच की। कुल ओपीडी 1220 हुई। बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में सोमवार को 130 बच्चों की जांच की गई। डॉ. एकता एवं डॉ. निहारिका ने बच्चों की जांच की। डॉक्टरों के मुताबिक, रोज बाल रोगियों की ओपीडी 70-80 के बीच हो रही है। वायरल से बच्चे जल्द संक्रमित हो रहे हैं। डॉक्टरों की परिजनों से अपील है कि वे बच्चों को ठंडी वस्तुओं का सेवन न करने दें।
एक डॉक्टर छुट्टी पर, एक ऑपरेशन थियेटर में, मरीज परेशान
सोमवार की सुबह 11:30 बजे हड्डी रोग विशेषज्ञ को दिखाने के लिए 35 लोगों ने ओपीडी की पर्ची ली। डॉक्टर के ऑपरेशन थियेटर में होने पर मरीज उनके कमरे के बाहर ही बैठ गए। डॉक्टर ऑपरेशन थियेटर से दोपहर एक बजे तक भी नहीं आ सके। सभी मरीजों को बिना इलाज ही लौटना पड़ा। अस्पताल में दो हड्डी रोग विशेषज्ञ हैं। डॉ. प्रदीप कुमार छुट्टी पर चल रहे हैं, जबकि डॉ. वैभव की ड्यूटी सर्जरी में लगी है।
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दो घंटे लाइन में लगने के बाद मिली दवाएं, बाहर से लेने गए
दवा काउंटर पर भी रोगियों की भीड़ रही। लोगों को दवा के लिए दो-दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। काफी देर से लाइन में खड़े रहने के बाद भी जब दवा नहीं मिली तो बाहर से दवा खरीदने चले गए। इसके अलावा अल्ट्रासाउंड के लिए भी महिलाओं की भीड़ रही। लंबे इंतजार के बाद दोपहर दो बजे तक 65 महिलाओं के अल्ट्रासाउंड किए गए। दो नेत्र रोगियों ने 150 मरीजों की जांच की।
बोले मरीज
केवल एक ही दवा मिली
आंखों की जांच कराने के लिए अस्पताल में आई थी। परीक्षण के बाद डॉक्टर ने पर्चे में तीन दवाएं लिखीं। यहां सिर्फ एक ही मिली है, बाकी दवा बाहर मेडिकल स्टोर से लेनी पड़ेगी। - श्री कौर, निवासी जाटल रोड
खांसी की दवा भी नहीं
सरकार दवा उपलब्ध होने के सिर्फ दावे करती है। वह कई दिन से खांसी से परेशान हैं। डॉक्टर को दिखाने के बाद एक घंटे तक लाइन में खड़े होने पर पता चला कि खांसी की दवा नहीं है। - मिंटू लाल निवासी शिवपुरा
तीन में से दो दवाएं ही मिलीं
मानसिक तौर पर परेशान रहता हूं। डॉक्टर को दिखाया। उन्होंने जांच कराने के बाद तीन दवाएं लिखी थीं। अस्पताल में महज दो ही दवाएं मिल सकीं। बाकी एक दवा बाहर से लेनी पड़ेगी। - जितेंद्र निवासी गांव कुराड़
बच्चों का जुकाम-खांसी का सिरप नहीं
बच्चे को खांसी-जुकाम से परेशानी हो रही है। डॉक्टर ने देखने के बाद दवा लिखी, लेकिन यहां खांसी-जुकाम की दवा भी नहीं मिली। दो घंटे तक लाइन में खड़ा रहना पड़ा। - फराह, निवासी गढ़ी बेसिक
हर ओपीडी के बाहर ड्यूटी: पीएमओ
पीएमओ डॉ. संजीव ग्रोवर ने बताया कि हर ओपीडी के बाहर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की ड्यूटी लगी है। रजिस्ट्रेशन और दवा विंडो के बाहर गार्ड्स रहते हैं। मरीजों-तीमारदारों को दो गज की दूरी के लिए कहते हैं, कुछ देर बाद पहले जैसी स्थिति बन जाती है। हर व्यक्ति को खुद कदम उठाने होंगे।
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अस्पताल में सबसे अधिक रोगी वायरल के आ रहे हैं। सोमवार को वायरल की ओपीडी 320 पहुंच गई। दो डॉक्टरों की टीमों ने लोगों की जांच की। कुल ओपीडी 1220 हुई। बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में सोमवार को 130 बच्चों की जांच की गई। डॉ. एकता एवं डॉ. निहारिका ने बच्चों की जांच की। डॉक्टरों के मुताबिक, रोज बाल रोगियों की ओपीडी 70-80 के बीच हो रही है। वायरल से बच्चे जल्द संक्रमित हो रहे हैं। डॉक्टरों की परिजनों से अपील है कि वे बच्चों को ठंडी वस्तुओं का सेवन न करने दें।
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एक डॉक्टर छुट्टी पर, एक ऑपरेशन थियेटर में, मरीज परेशान
सोमवार की सुबह 11:30 बजे हड्डी रोग विशेषज्ञ को दिखाने के लिए 35 लोगों ने ओपीडी की पर्ची ली। डॉक्टर के ऑपरेशन थियेटर में होने पर मरीज उनके कमरे के बाहर ही बैठ गए। डॉक्टर ऑपरेशन थियेटर से दोपहर एक बजे तक भी नहीं आ सके। सभी मरीजों को बिना इलाज ही लौटना पड़ा। अस्पताल में दो हड्डी रोग विशेषज्ञ हैं। डॉ. प्रदीप कुमार छुट्टी पर चल रहे हैं, जबकि डॉ. वैभव की ड्यूटी सर्जरी में लगी है।
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दो घंटे लाइन में लगने के बाद मिली दवाएं, बाहर से लेने गए
दवा काउंटर पर भी रोगियों की भीड़ रही। लोगों को दवा के लिए दो-दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। काफी देर से लाइन में खड़े रहने के बाद भी जब दवा नहीं मिली तो बाहर से दवा खरीदने चले गए। इसके अलावा अल्ट्रासाउंड के लिए भी महिलाओं की भीड़ रही। लंबे इंतजार के बाद दोपहर दो बजे तक 65 महिलाओं के अल्ट्रासाउंड किए गए। दो नेत्र रोगियों ने 150 मरीजों की जांच की।
बोले मरीज
केवल एक ही दवा मिली
आंखों की जांच कराने के लिए अस्पताल में आई थी। परीक्षण के बाद डॉक्टर ने पर्चे में तीन दवाएं लिखीं। यहां सिर्फ एक ही मिली है, बाकी दवा बाहर मेडिकल स्टोर से लेनी पड़ेगी। - श्री कौर, निवासी जाटल रोड
खांसी की दवा भी नहीं
सरकार दवा उपलब्ध होने के सिर्फ दावे करती है। वह कई दिन से खांसी से परेशान हैं। डॉक्टर को दिखाने के बाद एक घंटे तक लाइन में खड़े होने पर पता चला कि खांसी की दवा नहीं है। - मिंटू लाल निवासी शिवपुरा
तीन में से दो दवाएं ही मिलीं
मानसिक तौर पर परेशान रहता हूं। डॉक्टर को दिखाया। उन्होंने जांच कराने के बाद तीन दवाएं लिखी थीं। अस्पताल में महज दो ही दवाएं मिल सकीं। बाकी एक दवा बाहर से लेनी पड़ेगी। - जितेंद्र निवासी गांव कुराड़
बच्चों का जुकाम-खांसी का सिरप नहीं
बच्चे को खांसी-जुकाम से परेशानी हो रही है। डॉक्टर ने देखने के बाद दवा लिखी, लेकिन यहां खांसी-जुकाम की दवा भी नहीं मिली। दो घंटे तक लाइन में खड़ा रहना पड़ा। - फराह, निवासी गढ़ी बेसिक
हर ओपीडी के बाहर ड्यूटी: पीएमओ
पीएमओ डॉ. संजीव ग्रोवर ने बताया कि हर ओपीडी के बाहर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की ड्यूटी लगी है। रजिस्ट्रेशन और दवा विंडो के बाहर गार्ड्स रहते हैं। मरीजों-तीमारदारों को दो गज की दूरी के लिए कहते हैं, कुछ देर बाद पहले जैसी स्थिति बन जाती है। हर व्यक्ति को खुद कदम उठाने होंगे।

पानीपत। सिविल अस्पताल में पर्ची बनाने वाले काउंटर पर लगी हुई मरीजों की भारी भीड़।- फोटो : Panipat